04/02/2026 | Press release | Distributed by Public on 04/02/2026 06:57
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा को बताया कि जैव प्रौद्योगिकी विभाग 2017 से बायोटेक-किसान (कृषि नवाचार विज्ञान अनुप्रयोग नेटवर्क) योजना को प्रमुख किसान-केंद्रित कार्यक्रम के रूप में कार्यान्वित कर रहा है। इस योजना के तहत विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में केंद्र स्थापित कर प्रयोगशालाओं और कृषि क्षेत्रों के बीच अंतर को पाटने में उल्लेखनीय सफलता मिली है। ये केंद्र प्रदर्शन इकाइयों, प्रशिक्षण केंद्रों और उद्यम इनक्यूबेटर के रूप में कार्यान्वित हैं, जिससे सुनिश्चित हो रहा है कि वैज्ञानिक नवाचारों को स्थानीय कृषि चुनौतियों के अनुरूप ढाला जाए और उन्हें सीधे ग्रामीण समुदायों तक पहुंचाया जाए। इस योजना के तहत एक लाख से अधिक किसानों तक सीधी पहुंच बनाई गई है, जिससे उपज में 15 से 37 प्रतिशत तक सुधार हुआ है। इस योजना से महिला किसान फैलोशिप द्वारा महिलाओं का सशक्तिकरण हुआ है, ग्रामीण जैव प्रौद्योगिकी उद्यमों को बढ़ावा मिला है और बाजार से संपर्क मजबूत हुआ है। किसानों ने अवशेष-मुक्त खेती, अुनकूलित कृषि (आधुनिक कृषि प्रबंधन प्रणाली जो फसल की उत्पादकता बढ़ाने के लिए सही समय पर, सही स्थान पर और सही मात्रा में संसाधनों पानी, उर्वरक, कीटनाशक का उपयोग करती है। यह तकनीक जीपीएस, ड्रोन, सेंसर और एआई का उपयोग करके फसल की निगरानी करती है, जिससे लागत कम होती है और पैदावार बेहतर होती है) और एकीकृत कीट प्रबंधन अपनाया है, जिससे उत्पादकता और स्थिरता दोनों में वृद्धि हुई है।
अब तक, जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 50 से अधिक बायोटेक किसान केंद्र स्थापित किए हैं, जिनमें शुष्क, अर्ध-शुष्क, तटीय, पहाड़ी, जनजातीय और पूर्वोत्तर क्षेत्रों सहित विविध कृषि-जलवायु क्षेत्र शामिल हैं। अभी 5 बायोटेक किसान केंद्र कार्यरत हैं।
निम्नलिखित जैव प्रौद्योगिकी पहल ग्रामीण किसानों तक सफलतापूर्वक पहुंचाई गई है:
मृदा स्वास्थ्य बेहतर बनाने और दलहन एवं तिलहन फसलों की उपज बढ़ाने में इन प्रौद्योगिकियों का प्रत्यक्ष प्रभाव निम्नलिखित है:
बायोटेक किसान के अंतर्गत क्षमता निर्माण पहल विशेष रूप से महिला किसान केन्द्रित है। 5,000 से अधिक महिला किसानों को जैव उर्वरक के उपयोग, बीज उत्पादन, मशरूम की खेती और रसोई उद्यान मॉडल में प्रशिक्षित किया गया है। 1,200 से अधिक स्वयं सहायता समूह गठित या सुदृढ़ बनाए गए हैं, जिससे खाद्य प्रसंस्करण, मत्स्य पालन और पुष्पकृषि में महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा मिला है। विभाग ने महिला नेतृत्व वाले नवाचार को बढ़ावा देने के लिए महिला बायोटेक फैलोशिप भी आरंभ की है, और "मशरूम मेंटर" जैसे मोबाइल एप्लिकेशन सहित सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी आधारित परामर्शों ने महिला कृषकों को समय पर मार्गदर्शन प्रदान किया है।
इन प्रयासों के पूरक प्रयास के रूप में, जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा कार्यान्वित टिशू कल्चर से उगाए पौधों के लिए राष्ट्रीय प्रमाणन प्रणाली ने जैव प्रौद्योगिकी पहल को जमीनी स्तर पर अपनाना प्रचलित बनाने के लिए क्षमता निर्माण को प्रमुख घटक के रूप में शामिल किया है। टिशू कल्चर उत्पादन सुविधाओं में कार्यरत लगभग 70 प्रतिशत कर्मचारी महिलाएं हैं, जो जैव प्रौद्योगिकी संचालित कृषि में उनकी केंद्रीय भूमिका दर्शाती है। संरचित कार्य-प्रशिक्षण और मानकीकृत प्रक्रियाओं के निरंतर उपयोग से, ये महिला श्रमिक जैव प्रौद्योगिकी के बुनियादी अनुप्रयोगों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त कर संधारणीय कृषि पद्धतियों में सीधे योगदान दे रही हैं।
ये सभी पहल एक व्यापक दृष्टिकोण दर्शाते हैं, जिसमें महिलाएं लाभार्थी होने के साथ ही जैव प्रौद्योगिकी आधारित कृषि परिवर्तन में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। वे कौशल, उद्यमशीलता के अवसर और पहचान हासिल कर ग्रामीण समुदायों में संवहनीयता, नवाचार और समावेशी विकास को बढ़ावा दे रही हैं।
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