Amar Ujala Ltd

09/11/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/10/2026 23:01

एफएसएसएआई बदलेगा जांच तरीका: एआई की मदद से मिलावट पर लगाम कसने की तैयारी, जांच की दिशा तय करने में मिलेगी मदद

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एफएसएसएआई बदलेगा जांच तरीका: एआई की मदद से मिलावट पर लगाम कसने की तैयारी, जांच की दिशा तय करने में मिलेगी मदद

Fri, 11 Sep 2026 10:21 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Fri, 11 Sep 2026 10:21 AM IST
सार

एफएसएसएआई अपनी जांच का तरीका बदलेगा। एआई की मदद से मिलावट पर लगाम कसने की तैयारी हो रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल से इलाके, मौसम व त्योहार के हिसाब से जोखिम पहचान कर जांच की दिशा तय करने में मदद मिलेग।

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एआई के इस्तेमाल से मिलावट पर नकेल (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

दूध, मसाले, मिठाई या पैकेटबंद खाने में मिलावट की शिकायत के बाद जांच करने का तरीका अब बदलने की तैयारी है। भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) एआई की मदद से पहले ही पता लगाने की कोशिश करेगा कि मिलावट का खतरा कहां और किस खाद्य पदार्थ में बढ़ सकता है।

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देशभर के खाद्य कारोबारियों के लाइसेंस-पंजीकरण, निरीक्षण और नमूनों की जांच से जुड़े करोड़ों आंकड़ों को एक साथ खंगाल कर एआई संदिग्ध पैटर्न और जोखिम वाले इलाकों की पहचान करेगा। इसके आधार पर अधिकारियों को यह तय करने में मदद मिलेगी कि कहां पहले जांच करनी है और किस तरह के खाद्य कारोबार पर ज्यादा नजर रखनी है।
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एफएसएसएआई के पास देशभर में खाद्य कारोबार से जुड़े 25 लाख से ज्यादा लाइसेंस और 50 लाख से अधिक पंजीकरण हैं। इसके अलावा करीब तीन लाख निरीक्षण और तीन लाख से अधिक खाद्य नमूनों की जांच से जुड़ा आंकड़ा भी मौजूद है।
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मौसम-त्योहार भी बताएंगे कहां बढ़ सकता है खतरा
नई व्यवस्था में केवल पुराने निरीक्षण और शिकायतों के आंकड़ों को ही नहीं देखा जाएगा। इलाके की स्थिति, मौसम में बदलाव और त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग को भी ध्यान में रखा जा सकता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी इलाके में किसी खास खाद्य पदार्थ को लेकर बार-बार शिकायतें आती हैं या जांच में एक जैसी गड़बड़ियां मिलती हैं, तो एआई इन आंकड़ों से खतरे के संकेत पहचान सकेगा।

एआई खुद नहीं बताएगा खाना मिलावटी या नहीं
एफएसएसएआई अलग-अलग डिजिटल मंचों से आंकड़े जोड़ने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए दस्तावेजों से जरूरी जानकारी निकालने और उनका विश्लेषण करने वाली तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा एक ऐसा डिजिटल सहायक बनाने की योजना है, जिससे अधिकारी बड़ी मात्रा में मौजूद आंकड़ों को आसानी से समझ और खोज सकें। एफएसएसएआई ने इस काम के लिए एआई आधारित डाटा प्लेटफॉर्म तैयार करने को लेकर आईटी कंपनियों से आवेदन मांगे हैं।

छह साल में 28 हजार से ज्यादा नमूने फेल
पिछले छह साल में खाद्य नमूनों में गड़बड़ी का आंकड़ा लगातार चिंता बढ़ा रहा है। 2020-21 में 1.07 लाख नमूनों की जांच में 28,347 खरे नहीं उतरे थे। 2025-26 में जांच का दायरा बढ़कर 2.23 लाख नमूनों तक पहुंचा और इनमें 40,023 नमूने गैर-अनुरूप मिले। इनमें 9,086 को असुरक्षित पाया गया।
Amar Ujala Ltd published this content on September 11, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 11, 2026 at 05:01 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]