07/24/2026 | Press release | Distributed by Public on 07/23/2026 15:58
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया, जब कुछ ही घंटे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के छात्रों के नाम एक वीडियो संदेश जारी कर पेपर लीक मामलों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक कोई सामान्य घटना नहीं है, बल्कि लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा बेहद संवेदनशील विषय है। उन्होंने कहा कि पिछले ढाई महीनों में दोषियों के खिलाफ कई कानूनी कदम उठाए गए हैं और कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। साथ ही सरकार ने संकेत दिया कि परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कैबिनेट स्तर पर भी कड़े फैसले लिए जाएंगे।
सोनम वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनका मुख्य आग्रह था कि कथित नीट पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय की जाए और छात्रों के साथ न्याय सुनिश्चित हो। आंदोलन के दौरान उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई। 18 जुलाई को स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें पुलिस की मौजूदगी में सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था।
बाद में उनकी पत्नी गीतांजलि एंग्मो ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर उन्हें बेहतर इलाज के लिए निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग की। अदालत के आदेश के बाद वांगचुक को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था।
अनशन समाप्त करने से पहले वांगचुक ने सरकार के सामने कुछ शर्तें भी रखी थीं। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को लिखे पत्र में मांग की थी कि आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग न किया जाए, उन पर एफआईआर दर्ज न हो और पुलिस कार्रवाई के जरिए उन्हें परेशान न किया जाए। उन्होंने कहा था कि यदि सरकार इस संबंध में भरोसा देती है तो वह अपना अनशन समाप्त करने को तैयार हैं।
मेदांता अस्पताल में हुई लंबी बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी और वांगचुक ने अपना 26 दिन पुराना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया। इसे नीट परीक्षा विवाद और छात्र आंदोलन के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
हालांकि अनशन समाप्त होने के बावजूद नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों की मांगों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है। अब सभी की निगाह इस बात पर रहेगी कि सरकार प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और भरोसा बहाल करने के लिए आगे क्या कदम उठाती है।