Ministry of Heavy Industries of the Republic of India

03/30/2026 | Press release | Distributed by Public on 03/30/2026 09:42

कोलकाता के जीआरएसई द्वारा निर्मित चौथी पनडुब्बी रोधी उथले पानी की नौका-एग्रे नौसेना में शामिल

रक्षा मंत्रालय

कोलकाता के जीआरएसई द्वारा निर्मित चौथी पनडुब्बी रोधी उथले पानी की नौका-एग्रे नौसेना में शामिल

प्रविष्टि तिथि: 30 MAR 2026 8:34PM by PIB Delhi

कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित आठ पनडुब्बी रोधी युद्धपोतों (एएसडब्ल्यू एसडब्ल्यूसी) में से चौथा, 'एग्रे', 30 मार्च 2026 को कोलकाता में भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया।

कोलकाता के जीआरएसई द्वारा भारतीय जहाजरानी रजिस्टर (आईआरएस) के वर्गीकरण नियमों के अनुसार इन एएसडब्ल्यू एसडब्ल्यूसी का डिजाइन और निर्माण किया गया है, जो स्वदेशी रक्षा जहाज निर्माण की सफलता को रेखांकित करता है।

लगभग 77 मीटर लंबे ये जहाज जलजेट द्वारा संचालित भारतीय नौसेना के सबसे बड़े युद्धपोत हैं और अत्याधुनिक हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और उथले पानी के सोनार से सुसज्जित हैं, जो पानी के नीचे के खतरों का प्रभावी ढंग से पता लगाने और उनसे निपटने में सक्षम बनाते हैं। इस जहाज के शामिल होने से भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी और बारूदी सुरंग रोधी क्षमताओं के साथ-साथ तटीय निगरानी में और वृद्धि होगी।

यह जहाज पूर्व के आईएनएस एग्रे का पुनरोद्धार है, जो 1241 पीई श्रेणी के गश्ती पोतों में से चौथा था और जिसे वर्ष 2017 में सेवामुक्त कर दिया गया था। इस प्रकार यह प्रतिष्ठित विरासत वाले नामों को बनाए रखने की नौसेना की परंपरा को जारी रखता है।

एग्रे की डिलीवरी भारतीय नौसेना द्वारा स्वदेशी जहाज निर्माण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह जहाज घरेलू रक्षा विनिर्माण इकोसिस्टम की बढ़ती शक्ति और आयात पर निर्भरता कम करने के निरंतर प्रयासों का प्रमाण है।

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