10/01/2026 | Press release | Distributed by Public on 10/01/2026 11:22
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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
प्रविष्टि तिथि: 01 OCT 2026 5:22PM by PIB Delhi
भारत सरकार के केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने आज राष्ट्रीय राजधानी में प्रसवपूर्व और प्रसवपूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन निषेध) अधिनियम, 1994 (पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम) बेहतर तरीके से लागू करने पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की। इस कार्यशाला में सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों के साथ ही स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय तथा गृह मंत्रालय के तहत आने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
कार्यशाला में नियामक अनुपालन को मजबूत करने, डिजिटल शासन और कारोबार करने में आसानी को बढ़ाने, डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में उभरती चुनौतियों का समाधान करने और पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम के कार्यान्वयन में सुधार के लिए राज्य-स्तरीय सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य नियमों का और सख्ती से अनुपालन करना, डिजिटल गवर्नेंस और कारोबार करने में सुगमता लाने, डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में उभरती चुनौतियों का समाधान करना और पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम के कार्यान्वयन को बेहतर बनाने के लिए राज्यों के बेहतरीन तौर-तरीकों को साझा करना था।
मुख्य भाषण देते हुए, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में अपर सचिव और मिशन निदेशक (एनएचएम), श्रीमती आराधना पटनायक ने पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम को सख्ती और असरदार तरीके से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही, उन्होंने कहा कि इसके लिए लगातार सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) से जुड़े प्रयास भी किए जाने चाहिए, ताकि बालिकाओं के समान महत्व को बढ़ावा दिया जा सके।
उभरती प्रौद्योगिकियों की वजह से उपलब्ध अवसरों और चुनौतियों का ज़िक्र करते हुए, सुश्री पटनायक ने कहा कि पोर्टेबल डायग्नोस्टिक उपकरणों, ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म और सोशल मीडिया ने स्वास्थ्य देखभाल और सूचना तक पहुंच को काफ़ी बढ़ाया है, लेकिन इनका इस्तेमाल कानून के तहत निषिद्ध गतिविधियों के लिए भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल लिंग चयन या लिंग के आधार पर भेदभाव को बढ़ावा देने के बजाय स्वास्थ्य देखभाल और सामाजिक समावेश को आगे बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए।
जन्म के समय लिंगानुपात (एसआरबी) में सुधार की दिशा में हुई प्रगति पर बात करते हुए, सुश्री पटनायक ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय एसआबी में लगातार सुधार हुआ है। सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) रिपोर्ट 2024 के अनुसार, राष्ट्रीय एसआरबी में 20 अंकों की बढ़ोतरी हुई है; यह 2014-16 में प्रति 1,000 पुरुषों पर 898 महिलाओं से बढ़कर 2022-24 में प्रति 1,000 पुरुषों पर 918 महिलाएं हो गया है। यह सुधार पीसीएंड पीएनडीटी एक्ट को प्रभावी तरीके से लागू करने, विनियामक निगरानी और समुदाय स्तर पर किए गए प्रयासों का परिणाम है।
इस कार्यशाला में डिजिटल परितंत्र से जुड़ी नई चुनौतियों, विशेषरूप से लिंग चयन और लिंग निर्धारण से संबंधित ऑनलाइन विज्ञापनों और कंटेंट के बारे में भी चर्चा की गई।
पीसीएंड पीएनडीटी एक्ट की धारा 22 पर आयोजित एक विशेष सत्र में, प्रतिबंधित डिजिटल कंटेंट की पहचान करने, उसे चिह्नित करने और उस पर रोक लगाने में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भूमिका पर जोर दिया गया। चर्चाओं में 'सहयोग पोर्टल' के इस्तेमाल और डिजिटल मध्यस्थों के साथ सक्रिय तालमेल की ज़रूरत पर भी बात हुई, ताकि ऑनलाइन उल्लंघनों से निपटा जा सके और इस अधिनियम के तहत प्रतिबंधित गतिविधियों के लिए टेक्नोलॉजी के गलत इस्तेमाल को रोका जा सके।
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के पीसीएंड पीएनडीटी पोर्टल्स को स्टैंडर्डाइज़ और मज़बूत करने पर भी बातचीत हुई। चर्चाओं का मुख्य फोकस विनियामक प्रक्रियाओं, निगरानी और नियमों के अनुपालन के लिए डिजिटल मॉड्यूल को जोड़ने पर था, ताकि सुदृढ़ निगरानी की जा सके और इसके साथ ही कारोबार करने में सुगमता को बढ़ावा दिया जा सके। तेलंगाना और गुजरात द्वारा शुरू की गई डिजिटल पहलों के लाइव डेमो से व्यावहारिक जानकारी मिली और प्रतिभागी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को पीसीएंड पीएनडीटी फ्रेमवर्क के तहत डिजिटल गवर्नेंस को मज़बूत करने के लिए ऐसे मॉडल देखने का अवसार मिला, जिन्हें वे भी अपना सकते हैं।
इस कार्यशाला से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने अनुभव और नए तरीके (इनोवेटिव प्रैक्टिस) साझा करने का मंच भी उपलब्ध हुआ। आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, झारखंड, ओडिशा और तमिलनाडु जैसे राज्यों के प्रतिनिधियों ने राज्य-स्तरीय पहल और बेहतरीन तौर-तरीके पेश किए। इस आदान-प्रदान से एक-दूसरे से सीखने और पीसीएंड पीएनडीटी एक्ट को और बेहतर तरीके से लागू करने के लिए ठोस उपायों पर चर्चा करने में मदद मिली।
इस कार्यशाला में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में संयुक्त सचिव (आरसीएच) सुश्री मीरा श्रीवास्तव, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के एडिशनल कमिश्नर (पीसीएंड पीएनडीटी), डॉ. पवन कुमार, गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के वरिष्ठ अधिकारी और सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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पीके/केसी/आरटी/एमके
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English
पीसीएंडपीएनडीटी एक्ट को लागू करने के साथ-साथ लगातार आईईसी गतिविधियां भी चलनी चाहिए, ताकि बालिकाओं को समान महत्व देने को बढ़ावा मिले: श्रीमती आराधना पटनायक, अपर सचिव और मिशन निदेशक (एनएचएम)जन्म के समय राष्ट्रीय लिंगानुपात 1,000 पुरुषों पर 898 महिलाओं से बढ़कर 918 हो गया है: एनएचएम की अपर सचिव और प्रबंध निदेशक इस कार्यशाला में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल हुए, ताकि नियमों का अनुपालन, डिजिटल गवर्नेंस और लिंग चयन के विरूद्ध और सख्त कार्रवाई की जा सके"