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07/31/2026 | Press release | Distributed by Public on 07/31/2026 06:04

बारूद फैक्टरियों में क्यों हो रहे विस्फोट?: रक्षा मंत्रालय ने कहा- नियमों की कमी नहीं, लापरवाही सबसे बड़ी वजह

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बारूद फैक्टरियों में क्यों हो रहे विस्फोट?: रक्षा मंत्रालय ने कहा- नियमों की कमी नहीं, लापरवाही सबसे बड़ी वजह

Fri, 31 Jul 2026 05:20 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Fri, 31 Jul 2026 05:20 PM IST
सार

Why Explosions at Ammunition Factories: देश में विस्फोटक और गोला-बारूद बनाने वाली इकाइयों में लगातार हो रहे हादसों पर रक्षा उत्पादन विभाग ने चिंता जताई। रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार ने कहा कि दुर्घटनाओं की वजह नियमों की कमी नहीं, बल्कि उनका सही तरीके से पालन न होना है। उन्होंने साफ कहा कि ऐसे हादसों को केवल कम नहीं, बल्कि पूरी तरह खत्म करना होगा। आखिर सरकार इसके लिए क्या कदम उठा रही है?

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सरकार की क्या रणनीति? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

देश में विस्फोटक और गोला-बारूद बनाने वाली इकाइयों में लगातार हो रहे हादसों पर रक्षा उत्पादन विभाग ने चिंता जताई है। रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार ने कहा कि दुर्घटनाओं की वजह नियमों की कमी नहीं, बल्कि उनका सही तरीके से पालन न होना है। उन्होंने साफ कहा कि ऐसे हादसों को केवल कम नहीं, बल्कि पूरी तरह खत्म करना होगा। आखिर सरकार इसके लिए क्या कदम उठा रही है?

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देश में विस्फोटक और गोला-बारूद बनाने वाली इकाइयों में लगातार हो रहे हादसों को लेकर रक्षा उत्पादन विभाग ने बड़ा बयान दिया है। रक्षा मंत्रालय के तहत रक्षा उत्पादन विभाग के सचिव संजीव कुमार ने कहा कि इन दुर्घटनाओं की सबसे बड़ी वजह सुरक्षा नियमों की कमी नहीं, बल्कि उनका ईमानदारी से पालन न होना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे हादसों को केवल कम करने की नहीं, बल्कि पूरी तरह खत्म करने की जरूरत है। इसके लिए तकनीक का अधिक इस्तेमाल करना होगा और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाना होगा।
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क्या सुरक्षा नियमों की कमी है या पालन में लापरवाही?

पुणे में आयोजित 'मिलिट्री एक्सप्लोसिव्स एंड प्रोपेलेंट्स- सेफ्टी एंड कंप्लायंस एंड क्वालिटी एश्योरेंस, डिफेंस प्रोडक्शन' विषय पर सेमिनार को संबोधित करते हुए संजीव कुमार ने कहा कि हाल के वर्षों में रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों और निजी उद्योगों में हुई कई दुर्घटनाओं के बाद रक्षा मंत्रालय ने इस विषय पर चर्चा करने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि जांच में यह सामने आया कि सुरक्षा मानक पहले से मौजूद हैं, लेकिन उनका गंभीरता और ईमानदारी से पालन नहीं किया जाता। लंबे समय तक एक ही काम करने वाले लोग कई बार लापरवाह हो जाते हैं और प्रक्रियाओं को हल्के में लेने लगते हैं।

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हादसों को खत्म करने के लिए सरकार की क्या रणनीति?

रक्षा उत्पादन सचिव ने कहा कि विस्फोटकों और प्रोपेलेंट से जुड़े हादसों में जान-माल का नुकसान बेहद गंभीर होता है। इसलिए उन्होंने जानबूझकर 'हादसों को खत्म करने' शब्द का इस्तेमाल किया। उनका कहना था कि केवल दुर्घटनाओं को कम करना या उनके असर को घटाना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि इंसानी जान की भरपाई कभी नहीं हो सकती। उन्होंने सुझाव दिया कि सुरक्षा नियमों के पालन के लिए सेंसर, सीसीटीवी कैमरे, स्वचालित निगरानी प्रणाली और डेटा एनालिटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों का अधिक उपयोग किया जाए। इससे मानव निगरानी पर निर्भरता कम होगी और सुरक्षा व्यवस्था लगातार निगरानी में रहेगी।

भारत के सामने क्या बड़ा अवसर?

संजीव कुमार ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। इसके कारण विस्फोटकों और प्रोपेलेंट की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने इसे भारत के लिए जीवन में एक बार मिलने वाला बड़ा अवसर बताया। उनका कहना था कि पिछले चार से पांच दशकों में कई देशों ने अपनी विनिर्माण क्षमता कम कर दी है। ऐसे में भारत अपने उत्पादन का विस्तार कर वैश्विक आपूर्तिकर्ता बन सकता है। उन्होंने उद्योगों से केवल तैयार गोला-बारूद बनाने पर ध्यान देने के बजाय प्रोपेलेंट जैसे महत्वपूर्ण कच्चे माल के उत्पादन में भी निवेश बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश में प्रोपेलेंट की कमी है और यदि आधार मजबूत नहीं होगा तो पूरी व्यवस्था लंबे समय तक टिक नहीं पाएगी।

सरकार नियमों में क्या बदलाव कर रही?

रक्षा उत्पादन सचिव ने कहा कि सरकार नई विनिर्माण इकाइयों की स्थापना आसान बनाने के लिए नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बना रही है। उन्होंने बताया कि मई 2025 से रक्षा उद्योग के साथ लगातार बातचीत की जा रही है। इस दौरान मानकों में अंतर और मंजूरी मिलने में देरी जैसे कई मुद्दों का समाधान किया गया है या वे अंतिम चरण में हैं। पहले रक्षा उत्पादन विभाग में मंजूरी के लिए 19 हितधारकों से परामर्श करना पड़ता था, लेकिन पिछले महीने इसे घटाकर केवल तीन कर दिया गया। इससे मंजूरी मिलने का समय तीन से छह महीने से घटकर एक महीने से भी कम होने की उम्मीद है।

देश में कितने हादसे हुए?

सरकार ने मार्च 2025 में संसद को बताया था कि देश के आयुध कारखानों में वर्ष 2024 में 62, वर्ष 2023 में 75, वर्ष 2022 में 83, वर्ष 2021 में 74 और वर्ष 2020 में 54 औद्योगिक दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। महाराष्ट्र के नागपुर और विदर्भ क्षेत्र में भी पिछले कुछ वर्षों के दौरान रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों और निजी विस्फोटक तथा गोला-बारूद निर्माण इकाइयों में कई विस्फोट और सुरक्षा चूक के मामले सामने आए हैं। संजीव कुमार ने कहा कि भविष्य में इस सेमिनार का दायरा बढ़ाकर सुरक्षा, नई तकनीक, नियमों और कारोबारी अवसरों पर अंतरराष्ट्रीय भागीदारी वाला बड़ा मंच बनाया जा सकता है।

वर्ष आयुध कारखानों में औद्योगिक दुर्घटनाएं
2024 62
2023 75
2022 83
2021 74
2020 54
Amar Ujala Ltd published this content on July 31, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on July 31, 2026 at 12:04 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]