05/21/2026 | Press release | Distributed by Public on 05/21/2026 05:54
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज कहा कि भारत और अमेरिका स्वाभाविक साझेदार के रूप में काम कर रहे हैं और प्रौद्योगिकी नवाचार, उच्च परिशुद्धता रक्षा, डिजिटल डेटा केंद्र, क्वांटम कंप्यूटिंग और चिकित्सा उपकरण सहित विभिन्न क्षेत्रों में एक-दूसरे के पूरक हैं। नई दिल्ली में अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स के वार्षिक लीडरशिप समिट को संबोधित करते हुए श्री गोयल ने कहा कि दोनों देशों के बीच साझेदारी आपसी विश्वास और साझा आर्थिक हितों से सुदृढ़ होती है।
श्री गोयल ने कहा कि पिछले छह महीनों में अमेरिकी उद्योग से अनुमानित 60 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश प्राप्त हुआ है, जिसमें अमेज़न और गूगल जैसी कंपनियों द्वारा किए गए प्रमुख डेटा सेंटर निवेश शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक कंपनियों के लिए एक विश्वसनीय ढांचा प्रदान करता है और वैश्विक स्तर पर अद्वितीय स्तर पर परिमाण, प्रतिभा और बाजार के अवसरों का संयोजन प्रस्तुत करता है।
श्री गोयल ने कहा कि अमेरिका एक भरोसेमंद साझेदार की तलाश में है और भारत ने बौद्धिक संपदा अधिकारों का सम्मान करते हुए समय पर उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने कहा कि भारत में कुशल प्रतिभाओं का विशाल भंडार है और 1.4 बिलियन महत्वाकांक्षी भारतीयों, बढ़ती आय और बढ़ते मध्यम वर्ग की मांग के कारण अमेरिकी नवाचार को व्यापक अवसर मिलते हैं।
श्री गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं और उनमें प्रतिस्पर्धा न्यूनतम है, जिससे साझेदारी और मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि जब पूरकता आपसी विश्वास के साथ जुड़ जाती है, तो यह एक अजेय संयोजन का निर्माण करती है जो भविष्य के लिए विश्वसनीय और गतिशील आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण में सक्षम है।
श्री गोयल ने कहा कि सरकार भव्य स्कीम के माध्यम से औद्योगिक विकास के लिए क्षेत्र-आधारित दृष्टिकोण अपना रही है, जिसका उद्देश्य देशभर में 100 नए औद्योगिक पार्क स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि यह मॉडल औद्योगिक बुनियादी ढांचे को श्रमिक आवास, मनोरंजन और सामाजिक सुविधाओं के साथ एकीकृत करता है ताकि एक समग्र औद्योगिक इकोसिस्टम का निर्माण हो सके।
श्री गोयल ने कहा कि बेहतर बुनियादी ढांचा, कम लॉजिस्टिक्स लागत और मुक्त व्यापार समझौते मिलकर निवेश, विनिर्माण वृद्धि और निर्यात प्रतिस्पर्धा का एक सकारात्मक चक्र बना रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत अगले कम से कम 25 वर्षों तक विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने में लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, श्री गोयल ने कहा कि सरकार ने एमएसएमई के लिए प्रौद्योगिकी उन्नयन और कौशल विकास का समर्थन करने के लिए एमएसएमई मंत्रालय और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग को शामिल करते हुए समन्वित प्रयास शुरू किए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित निर्यात प्रोत्साहन मिशन से लघु एवं मध्यम उद्यमों को अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं का हिस्सा बनने के लिए आवश्यक वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र प्राप्त करने में मदद मिलेगी। श्री गोयल ने कहा कि निर्यात निरीक्षण परिषद, भारतीय मानक ब्यूरो और एफएसएसएआई जैसी एजेंसियां भारत भर में विश्व स्तरीय परीक्षण और गुणवत्ता अवसंरचना के निर्माण के लिए मिलकर काम कर रही हैं।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की गतिशीलता को रेखांकित करते हुए श्री गोयल ने कहा कि यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया संकट जैसी चुनौतियों के बावजूद भारत के विकास पूर्वानुमान को 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह भारत की क्षमता, निर्णायक नेतृत्व और एक विश्वसनीय एवं पसंदीदा निवेश गंतव्य के रूप में विश्व के साथ जुड़ने के बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है।
श्री गोयल ने कहा कि वैश्विक नेता भारत को प्रशंसा और उम्मीदों की निगाहों से देखते हैं और यह सराहना भारतीयों को एक मजबूत राष्ट्र और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य के निर्माण की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित कर रही है। उन्होंने भारत-अमेरिका साझेदारी को 21वीं सदी की एक निर्णायक साझेदारी बताया, जो अमेरिकी नवाचार और निवेश के साथ-साथ भारतीय कौशल और प्रतिभा के मेल से संचालित है।
भारत के विनिर्माण क्षेत्र में हो रहे बदलाव का उल्लेख करते हुए श्री गोयल ने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक स्तर पर उत्पाद खरीदने और घरेलू स्तर पर असेंबल करने की पुरानी पद्धति से हटकर डिजाइन, नवाचार और बौद्धिक संपदा सृजन का केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि विकसित देशों में अरबों डॉलर की लागत से विकसित किए जाने वाले नवाचार भारत में एक तिहाई या एक पांचवें हिस्से की लागत से संभव हैं।
श्री गोयल ने कहा कि वैश्विक कंपनियां प्रतिभाओं को विदेशों में स्थानांतरित करने के बजाय वैश्विक क्षमता केंद्र स्थापित करने के लिए भारत को एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में तेजी से पहचान रही हैं। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के बाद यह बदलाव और भी तेज हो गया है, क्योंकि महामारी ने भारत जैसे विश्वसनीय साझेदारों को दूरस्थ कार्य और ऑफशोरिंग की प्रभावशीलता को प्रदर्शित किया है।
श्री गोयल ने कहा कि भारत में युवाओं के बीच अनुसंधान, विकास और नवाचार की संस्कृति तेजी से विकसित हो रही है। उन्होंने बताया कि भारत के मजबूत डिजिटल ढांचे के कारण डिजिटल तकनीक का अंगीकरण और उसके प्रति जागरूकता न केवल महानगरों में बल्कि द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहरों और अंततः गांवों तक भी तेजी से फैल रही है।
भारत के परिवर्तन के पीछे के दीर्घकालिक विजन को रेखांकित करते हुए, श्री गोयल ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई प्रमुख पहलों का उल्लेख किया, जिनमें स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया शामिल हैं। उन्होंने वित्तीय समावेशन, महिला सशक्तिकरण और एकीकृत राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड के निर्माण से संबंधित पहलों का भी जिक्र किया।
श्री गोयल ने कहा कि भारत के नवीकरणीय ऊर्जा सेक्टर ने पिछले एक दशक में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लिए गए दूरदर्शी नीतिगत निर्णयों और महत्वाकांक्षी लक्ष्यों की सहायता से सौर ऊर्जा क्षमता बारह वर्षों से भी कम समय में दो गीगावाट से बढ़कर 150 गीगावाट से अधिक हो गई है।
श्री गोयल ने कहा कि भारत आज वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी दरों पर 24 घंटे स्वच्छ ऊर्जा सहित उच्च गुणवत्ता वाली विद्युत अवसंरचना प्रदान करता है, जो देश को डेटा केंद्रों और उन्नत विनिर्माण के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाता है। उन्होंने कहा कि भारत विश्वसनीय अवसंरचना, तकनीकी प्रतिभा, एक भरोसेमंद डिजिटल इकोसिस्टम और एक विशाल घरेलू बाजार के साथ-साथ 2047 तक जारी कर प्रोत्साहन भी प्रदान करता है।
श्री गोयल ने कहा कि इन कारकों के चलते भारत ऐसे इकोसिस्टम विकसित करने में सक्षम हो रहा है जो डिजाइन, विकास और विनिर्माण को सहयोग प्रदान करते हैं और साथ ही भारत के युवाओं के लिए उच्च वेतन वाले रोजगार भी सृजित करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की महत्वाकांक्षा पूर्व के "असेंबल इन इंडिया" मॉडल से आगे बढ़कर 2047 तक एक समृद्ध और विकसित राष्ट्र का निर्माण करना है।
भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे का उल्लेख करते हुए श्री गोयल ने कहा कि भारत ने सुदूर क्षेत्रों सहित पूरे देश में सबसे तेजी से 5जी रोलआउट हासिल किया है, साथ ही विश्व में सबसे कम डेटा लागत भी प्रदान की है। उन्होंने कहा कि भारत पहले से ही डिजिटल विकास और तकनीकी उन्नति के अगले चरण के लिए तैयारी कर रहा है।
श्री गोयल ने कहा कि भारत में वर्तमान में 2,117 वैश्विक क्षमता केंद्र हैं, जिनमें लगभग 2.35 मिलियन लोग प्रत्यक्ष रूप से कार्यरत हैं और लगभग 98 बिलियन डॉलर का राजस्व उत्पन्न होता है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब कई देश कम विकास दर से जूझ रहे हैं, ये घटनाक्रम भारत की सतत आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
श्री गोयल ने कहा कि भारत ने महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है, लेकिन प्रौद्योगिकी, निवेश, विनिर्माण और नवाचार क्षेत्रों में अमेरिका के साथ निरंतर सुधार और गहन सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले दशकों में दोनों देशों के बीच आर्थिक एकीकरण और भी अधिक बढ़ेगा।
श्री गोयल ने कहा कि सरकार आधुनिक परीक्षण सुविधाएं स्थापित करने में उद्योगों की सहायता करने के लिए तैयार है, जो सर्वोत्तम वैश्विक प्रौद्योगिकियों से सुसज्जित होंगी। उन्होंने उद्योग जगत के हितधारकों से आग्रह किया कि वे भारत के परीक्षण इकोसिस्टम को अंतरराष्ट्रीय मानकों तक विस्तारित करने में सरकार का मार्गदर्शन करें।
मुंबई के एसईईपीजेड में स्थित मेगा कॉमन फैसिलिटी सेंटर का उदाहरण देते हुए श्री गोयल ने कहा कि यह केंद्र सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत स्थापित किया गया था और इसमें आभूषण डिजाइन, निर्माण, प्रोटोटाइपिंग और परीक्षण के लिए विश्व स्तरीय सुविधाएं विद्यमान हैं। उन्होंने बताया कि यह परियोजना, जिसे शुरू में 30,000 वर्ग फुट में बनाने की योजना थी, को 100,000 वर्ग फुट तक विस्तारित किया गया और उद्योग की मजबूत भागीदारी के कारण पहले ही वर्ष में लाभप्रद स्थिति में पहुंच गई।
श्री गोयल ने कहा कि हाल की बजट घोषणाएं, सेमीकॉन मिशन 2 और महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई पहलें उद्योग और उन्नत विनिर्माण की सहायता करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। उन्होंने लघु एवं मध्यम उद्यमों और बड़ी कंपनियों दोनों से भविष्य में विकास के लिए इन अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया।
सरकार को एक संवेदनशील और अनुकूलनशील प्रशासन बताते हुए श्री गोयल ने कहा कि सरकार में कोई संवादहीनता नहीं है और सभी मंत्रालय एक टीम के रूप में मिलकर काम करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार व्यवसायों और उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं के आधार पर नीतिगत बदलावों और नए दृष्टिकोणों के लिए हमेशा तत्पर है।
श्री गोयल ने बड़ी कंपनियों से भी अपील की कि वे भुगतान प्रक्रिया को तेज करके एमएसएमई की सहायता करें। एमएसएमई आपूर्तिकर्ताओं के लिए वर्तमान 45-दिन की भुगतान प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि कंपनियां एमएसएमई के नकदी प्रवाह को बेहतर बनाने, आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने और प्रौद्योगिकी एवं गुणवत्ता संवर्धन में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए वस्तुओं की मंजूरी के सात दिनों के भीतर भुगतान करने पर विचार कर सकती हैं।
बुनियादी ढांचे के विकास पर श्री गोयल ने कहा कि रोजगार, आय, औद्योगिक विकास और कर राजस्व पर इसके गुणक प्रभाव के कारण बुनियादी ढांचा भारत की विकास रणनीति का केंद्रीय हिस्सा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि विमानन से लेकर डिजिटल सेवाओं तक के सेक्टर बुनियादी ढांचे के त्वरित विस्तार से सीधे लाभान्वित होते हैं।
श्री गोयल ने पीएम गति शक्ति को वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा विकसित एक क्रांतिकारी पहल बताया, जिसका उद्देश्य देश भर में बेहतर और अधिक कुशल अवसंरचना योजना निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि यह प्लेटफॉर्म नियोजन और कार्यान्वयन को बेहतर बनाने के लिए लगभग 1,800 स्तरों के भू-स्थानिक और अवसंरचना संबंधी डेटा को एकीकृत करता है।
श्री गोयल ने कहा कि पीएम गति शक्ति पहल सबसे कुशल मार्गों की पहचान करके, विलंब को कम करके, भूमि अधिग्रहण में सुधार करके और अंतिम-मील कनेक्टिविटी को मजबूत करके राजमार्गों, रेलवे लाइनों, बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे की बेहतर योजना बनाने में सहायक है। उन्होंने कहा कि यह पहल बुनियादी ढांचे की लागत को कम करने और परिचालन दक्षता में सुधार करने में मदद करती है।
जेएनपीटी जैसे प्रमुख बंदरगाहों के आसपास पहले विद्यमान लॉजिस्टिक्स संबंधी बाधाओं का उल्लेख करते हुए, श्री गोयल ने कहा कि पीएम गति शक्ति ने समन्वित और प्रौद्योगिकी-संचालित निर्णय लेने में सक्षम बनाकर भारत में बुनियादी ढांचे की योजना और कार्यान्वयन को मौलिक रूप से बदल दिया है।
विकसित भारत 2047 के विजन की चर्चा करते हुए, श्री गोयल ने कहा कि सरकार सफल व्यवसायों की तरह ही स्पष्ट रूप से परिभाषित लक्ष्यों और दीर्घकालिक योजना के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य 2047 तक 20,000 डॉलर की अनुमानित प्रति व्यक्ति आय और लगभग 1.6 बिलियन की आबादी वाला एक विकसित राष्ट्र बनना है।
श्री गोयल ने कहा कि वित्तीय समावेशन, आवास, जल उपलब्धता, जीवन सुगमता और व्यापार सुगमता से संबंधित सरकारी पहलों को सटीक और मापनीय लक्ष्यों के साथ लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रगति की निरंतर समीक्षा करती है और सुधारात्मक योजना एवं नीतिगत कार्रवाई के माध्यम से कमियों को दूर करती है।
श्री गोयल ने व्यवसायों और निवेशकों से वर्तमान से आगे देखने और भारत तथा उसके लोगों की क्षमता, प्रतिभा, आकांक्षाओं और गतिशीलता को पहचानने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जो लोग भारत की विकास गाथा पर विश्वास करते हैं, वे देश के दीर्घकालिक आर्थिक रूपांतरण से लाभान्वित होते रहेंगे।
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