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09/24/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/24/2026 04:54

द बोनस मार्केट अपडेट: बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 1248 अंक टूटा; निफ्टी 23100 के नीचे, क्यों बिगाड़ा खेल

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द बोनस मार्केट अपडेट: बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 1248 अंक टूटा; निफ्टी 23100 के नीचे, क्यों बिगाड़ा खेल?

Thu, 24 Sep 2026 03:53 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Thu, 24 Sep 2026 03:53 PM IST
सार

शेयर बाजार में गुरुवार को भारी गिरावट रही। सेंसेक्स 1,248 अंक टूटकर 73,580 पर और निफ्टी 23,100 के नीचे बंद हुआ। एचडीएफसी लाइफ और बजाज फाइनेंस करीब 6% फिसले। पूरी खबर पढ़ें।

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शेयर बाजार में गिरावट के कारण - फोटो : amarujala.com
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विस्तार

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को बिकवाली का दबाव काफी बढ़ गया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,247.71 अंक यानी 1.66% गिरकर 73,580.54 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 383.71 अंक यानी 1.64% टूटकर 23,063.10 पर आ गया। बाजार में गिरावट की शुरुआत कमजोर रही और पूरे कारोबारी सत्र में बिकवाली का दबाव बना रहा। बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल और व्यापक बाजार में बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई।

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सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी बड़ी गिरावट रही?

गुरुवार के कारोबार में दोनों प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स दिन के अंत में 73,600 के आसपास और निफ्टी 23,100 के नीचे बंद हुआ। एक दिन में सेंसेक्स का करीब 1,248 अंक टूटना बाजार में बिकवाली की तीव्रता को दिखाता है। निफ्टी में भी 384 अंकों से अधिक की गिरावट रही।

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बॉन्ड यील्ड बढ़ने से बाजार पर क्या असर पड़ा?

बाजार में दबाव बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में बॉन्ड यील्ड का 19 साल के ऊंचे स्तर पर पहुंचना शामिल रहा। बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी का असर शेयर बाजार के सेंटीमेंट पर पड़ सकता है, क्योंकि इससे निवेशकों के लिए फिक्स्ड-इनकम एसेट्स का आकर्षण बढ़ सकता है। गुरुवार को यील्ड में उछाल के साथ इक्विटी बाजार में भी जोखिम कम करने की प्रवृत्ति दिखाई दी।

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क्या सिर्फ बड़े शेयरों में ही बिकवाली हुई?

नहीं। गुरुवार को व्यापक बाजार में भी तेज बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 दोनों करीब 1% नीचे रहे। इससे संकेत मिलता है कि दबाव केवल सेंसेक्स और निफ्टी की बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों ने बिकवाली की।

कौन से सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहे?

गुरुवार को सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। खास तौर पर बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में दबाव अधिक रहा। निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज करीब 2% तक टूटे। वित्तीय शेयरों में गिरावट का असर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर भी पड़ा।

एचडीएफसी लाइफ और बजाज फाइनेंस में कितनी गिरावट आई?

बाजार की प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में एचडीएफसी लाइफ और बजाज फाइनेंस शामिल रहे। दोनों शेयरों में करीब 6% तक की गिरावट दर्ज की गई। वित्तीय क्षेत्र में व्यापक बिकवाली के बीच इन शेयरों में गिरावट ने बाजार के कमजोर सेंटीमेंट को और स्पष्ट किया।

गुरुवार की गिरावट से क्या संकेत मिलते हैं?

गुरुवार का कारोबार दिखाता है कि बाजार फिलहाल कई दबावों के बीच है। बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी के साथ मिडकैप, स्मॉलकैप और सेक्टोरल इंडेक्स में एक साथ गिरावट देखने को मिली। दिन के अंत में सेंसेक्स 73,580.54 और निफ्टी 23,063.10 पर बंद हुए। अगले कारोबारी सत्र में निवेशकों की नजर बाजार की दिशा, बॉन्ड यील्ड और वित्तीय शेयरों में बिकवाली के रुख पर रहेगी।

पांच में गिरावट के पांच बड़े कारण क्या?

  • अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में रिकॉर्ड उछाल

वैश्विक बॉन्ड मार्केट में मची बिकवाली के कारण 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 15 बेसिस अंक बढ़कर 19 साल के उच्चतम स्तर 5.11% पर पहुंच गई है। ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे रहने की आशंका से विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों जैसे उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड में लगा रहे हैं।

  • कच्चे तेल की कीमतों में तेजी

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर 102 से106 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई हैं। भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ने, वित्तीय घाटा होने और घरेलू स्तर पर महंगाई बढ़ने की चिंताएं गंभीर हो गई हैं।

  • बैंकिंग और इंश्योरेंस सेक्टर में भारी बिकवाली

घरेलू स्तर पर, भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) द्वारा इंश्योरेंस एजेंटों के कमीशन कैप और डिस्ट्रीब्यूशन पेआउट्स में कटौती के प्रस्ताव ने बाजार में घबराहट पैदा कर दी। इस नियामक बदलाव के कारण वित्तीय और बीमा सेक्टर के हैवीवेट शेयरों, जैसे एक्सिस बैंक और बजाज फाइनेंस में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिसने सूचकांकों को नीचे धकेल दिया।

  • विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार निकासी

अमेरिकी डॉलर की मजबूती और वहां मिल रहे सुरक्षित रिटर्न के आकर्षण के चलते विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा भारतीय इक्विटी बाजार में लगातार बड़ी बिकवाली की जा रही है। घरेलू संस्थागत निवेशकों के सपोर्ट के बावजूद, विदेशी निवेशकों की इस भारी बिकवाली से बाजार में लिक्विडिटी (नकदी) का दबाव बढ़ गया है।

  • महंगा वैल्यूएशन और डेरिवेटिव एक्सपायरी का दबाव

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, भारतीय सूचकांक अपने वैश्विक समकक्षों की तुलना में काफी महंगे वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे थे। किसी नए सकारात्मक ट्रिगर के न होने और आज ही मंथली फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) एक्सपायरी होने के कारण ट्रेडर्स ने आक्रामक रूप से प्रॉफिट बुकिंग (मुनाफावसूली) की, जिससे गिरावट और तेज हो गई।

बाजार की गिरावट पर जानकारों का क्या कहना है?

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के विनोद नायर के मुताबिक, बाजार पर फिलहाल कई वैश्विक चिंताओं का दबाव है। बॉन्ड यील्ड बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से निवेशकों की चिंता बढ़ी है। महंगाई और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता के कारण निवेशक अब ज्यादा सावधानी बरत रहे हैं। घरेलू स्तर पर बीमा और बैंकिंग शेयरों पर भी दबाव है, क्योंकि कमीशन स्ट्रक्चर की नियामकीय समीक्षा से कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका है। ऐसे में बाजार अहम सपोर्ट स्तरों के आसपास है। जब तक कोई सकारात्मक ट्रिगर नहीं आता, निकट अवधि में बाजार का रुख सतर्क रह सकता है और आगे शेयर बाजार की दिशा में कंपनियों की कमाई की ग्रोथ अहम भूमिका निभाएगी।

Amar Ujala Ltd published this content on September 24, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 24, 2026 at 10:55 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]