02/06/2026 | Press release | Distributed by Public on 02/06/2026 00:02
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए एक प्रार्थना का संदर्भ दिया, जो राष्ट्र की स्वास्थ्य, दीर्घायु और सेवा के प्रति समर्पण की सामूहिक आकांक्षा को दर्शाती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत की उस भावना को दर्शाता करता है, जिसमें धरती के प्रति आदर, लोक कल्याण के प्रति समर्पण और सेवा का भाव राष्ट्रीय विकास के मूल स्तंभ बने हुए हैं।
प्रधानमंत्री ने प्राचीन संस्कृत श्लोक का हवाला देते हुए लिखा:
"उपस्थास्ते अनमीवा अयक्ष्मा अस्मभ्यं सन्तु पृथिवि प्रसूताः।
दीर्घं न आयुः प्रतिबुध्यमाना वयं तुभ्यं बलिहृतः स्याम॥"
उपस्थास्ते अनमीवा अयक्ष्मा अस्मभ्यं सन्तु पृथिवि प्रसूताः।
दीर्घं न आयुः प्रतिबुध्यमाना वयं तुभ्यं बलिहृतः स्याम॥ pic.twitter.com/VBPacr8tbj
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