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08/21/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/21/2026 09:27

'शरीर में 200 छर्रे, गंवाई आंख की रोशनी': पीड़ित साहिल की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज; FIR में क्या-क्या

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'शरीर में 200 छर्रे, गंवाई आंख की रोशनी': पीड़ित साहिल की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज; FIR में क्या-क्या?

Fri, 21 Aug 2026 08:32 PM IST
राहुल कुमार आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Fri, 21 Aug 2026 08:32 PM IST
सार

जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से युवक के घायल होने के मामले में दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन चलाने के मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ पहली प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर ली है।

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राहुल गांधी और पीड़ित साहिल - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संसद मार्ग थाने के बाहर करीब आठ घंटे तक धरने पर बैठने के बाद दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्र साहिल लोचब की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। एफआईआर दर्ज होने के बाद साहिल लोचब ने राहुल गांधी का आभार जताते हुए कहा कि पिछले एक महीने से उनकी टीम लगातार उनके संपर्क में थी और राहुल गांधी स्वयं भी उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेते रहे।
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एफआईआर में क्या-क्या?
एफआईआर में साहिल लोचब ने आरोप लगाया है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक निकाले जा रहे छात्र मार्च के दौरान उन पर धातु के पैलेट दागे गए, जिससे उनकी दाहिनी आंख की रोशनी चली गई और शरीर के कई हिस्सों में सैकड़ों छर्रे लगे।
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शिकायत के अनुसार, 20 वर्षीय साहिल लोचब दिल्ली के नजफगढ़ स्थित अग्रवाल कॉलोनी के निवासी हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) के छात्र हैं। उन्होंने शिकायत में कहा है कि उनके पिता दिव्यांग हैं और वह परिवार के सबसे बड़े बेटे हैं। उन्होंने यह भी लिखा है कि उनके खिलाफ कभी कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ।
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कहां-कहां लगे पैलेट?
एफआईआर के मुताबिक, 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा 2025 तथा नीट पेपर लीक के विरोध में छात्र प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान संसद की ओर मार्च निकाला जा रहा था। साहिल का कहना है कि लाठीचार्ज और भगदड़ के बीच वह पालिका, कनॉट प्लेस क्षेत्र तक पहुंच गए थे और उनके हाथ में तिरंगा झंडा था।

शिकायत में कहा गया है कि उसी दौरान आंसू गैस और लाठीचार्ज हुआ। इसी बीच उनका चेहरा दूसरी दिशा में था, तभी उन्हें दाहिनी छाती, बाजू और आंख पर तेज धमाके जैसा महसूस हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि पीछे मुड़कर देखने पर उन्होंने नीली वर्दी पहने एक व्यक्ति को बड़ी बंदूक के साथ देखा, जिसने उन पर धातु के पैलेट चलाए। साहिल के अनुसार, उन पर पांच से छह बार पैलेट दागे गए, जिसके बाद उनकी आंख, चेहरा, हाथ और छाती से खून बहने लगा और दाहिनी आंख से दिखाई देना बंद हो गया।

एफआईआर में कहा गया है कि घायल होने के बाद उन्हें पहले लेडी हार्डिंग अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी पहली एमएलसी बनाई गई। इसके बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल और फिर एम्स रेफर किया गया। 21 जुलाई की रात उन्हें एम्स आरपीसी आई सेंटर भेजा गया और बाद में एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती किया गया। शिकायत के अनुसार, 22 जुलाई की रात उनकी आंख का पहला ऑपरेशन हुआ।

शरीर में 200 से अधिक धातु के छर्रे
साहिल ने शिकायत में दावा किया है कि डॉक्टरों ने एमएलसी में साफ लिखा है कि उनकी आंख में चोट पैलेट से लगी है और आंख की रोशनी लौटने की संभावना एक प्रतिशत से भी कम है। उन्होंने कहा कि एम्स में हुए सीटी स्कैन में उनके शरीर में 200 से अधिक धातु के छर्रे पाए गए, जो आंख, गर्दन, छाती में दिल के पास, जबड़े और बाजू सहित कई हिस्सों में मौजूद हैं। शिकायत के मुताबिक, कुछ छर्रे आंख की नस के पास हैं जिन्हें निकाला नहीं जा सकता और दो छर्रे जीवनभर आंख के अंदर रहेंगे।

गंवानी पड़ी आंख
एफआईआर के अनुसार, 25 जुलाई को दोबारा जांच में दाहिनी आंख में कोई दृष्टि नहीं पाई गई। 31 जुलाई को आरपीसी आई सेंटर की ओपीडी में जांच के बाद 1 अगस्त को दूसरी सर्जरी की गई, लेकिन आंख की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। शिकायत में कहा गया है कि डॉक्टरों ने बाद की चिकित्सकीय पर्चियों में भी चोटों को धातु के छरों से लगी चोट बताया है।

साहिल लोचब ने शिकायत में कहा है कि वह एक छात्र के तौर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल हुए थे, लेकिन इसके बदले उन्हें अपनी आंख गंवानी पड़ी और शरीर में सैकड़ों छर्रे लगे। उन्होंने लिखा है कि जिस दिल्ली पुलिस में भर्ती होने की तैयारी कर रहे थे, अब वह नौकरी भी नहीं मिल सकेगी और उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो गई है। उन्होंने आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि उनके परिवार के लिए लंबा इलाज कराना मुश्किल है।

शिकायत में साहिल ने दिल्ली पुलिस से मांग की है कि 20 जुलाई की घटना से जुड़े जंतर-मंतर, संसद मार्ग, कनॉट प्लेस, पटेल चौक, राजीव चौक, मेट्रो स्टेशन, ट्रैफिक पुलिस और ड्रोन के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित किए जाएं। साथ ही ऑपरेशन के दौरान शरीर से निकाले गए धातु के छरों को जांच के लिए भेजा जाए तथा लेडी हार्डिंग अस्पताल, सफदरजंग अस्पताल, एम्स आरपीसी आई सेंटर और एम्स ट्रॉमा सेंटर से उनकी एमएलसी और इलाज से जुड़े सभी रिकॉर्ड मंगाए जाएं। उन्होंने अपने इलाज और मुआवजे पर भी विचार करने तथा जांच में पूरा सहयोग देने की बात कही है।
Amar Ujala Ltd published this content on August 21, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on August 21, 2026 at 15:27 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]