03/11/2026 | Press release | Distributed by Public on 03/11/2026 09:39
हाल के वर्षों में प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों में महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं, जिसमें चक्रवात, गर्मी की लहर, भारी वर्षा और बादल गरजने व बिजली कड़कने के साथ तूफ़ान आने जैसी विभिन्न गंभीर मौसमी घटनाओं के पूर्वानुमान की सटीकता में सुधार शामिल है। विवरण निम्नलिखित है:
चक्रवात पूर्वानुमानों में सुधार: 2025 में वार्षिक औसत ट्रैक पूर्वानुमान त्रुटियाँ 24, 48, और 72 घंटे के लिए क्रमशः 80 कि.मी., 120 कि.मी. और 204 कि.मी. रही, जबकि 2020-2024 के डेटा पर आधारित पिछले पांच वर्षों की औसत त्रुटियाँ क्रमशः 72 कि.मी., 111 कि.मी. और 154 कि.मी. थीं। साल 2025 के लिए वार्षिक औसत लैंडफॉल पूर्वानुमान त्रुटियाँ 24, 48, और 72 घंटे की अग्रिम अवधि के लिए क्रमशः 76 कि.मी., 82 कि.मी. और 121 कि.मी. रही, जबकि 2020-2024 के दौरान पिछले पांच वर्षों की औसत त्रुटियाँ क्रमशः 16 कि.मी., 39 कि.मी. और 70 कि.मी. थीं। तीव्रता पूर्वानुमान में वार्षिक औसत पूर्ण त्रुटि (एई) 24, 48, और 72 घंटे की अग्रिम अवधि के लिए क्रमशः 3.1 नॉट्स, 2.7 नॉट्स और 3.9 नॉट्स रही, जबकि 2020-2024 के दौरान पिछले पांच वर्षों की औसत क्रमशः 5.9, 8.3 और 9.8 नॉट्स थी।
मानसूनी वर्षा और भारी वर्षा चेतावनियाँ:भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) मानसूनी वर्षा के लिए एक बेजोड़ पूर्वानुमान रणनीति अपना रहा है। इस रणनीति के अनुसार, यह विभिन्न समय और स्थानिक स्तरों पर पूर्वानुमान और चेतावनियाँ जारी करता है। नाउकास्टिंग (तात्कालिक - 0 से 6 घंटे तक - पूर्वानुमान) - सभी प्रकार की गंभीर मौसमी घटनाओं के लिए सभी जिलों और लगभग 1200 स्टेशनों पर छह घंटे तक। लघु से मध्य अवधि (7 दिन तक) के पूर्वानुमान - शहरों, ब्लॉकों, जिलों और मौसम विज्ञान उपविभागों में वर्षा के लिए। विस्तृत अवधि (4 सप्ताह तक) के पूर्वानुमान - 36 मौसम विज्ञान उपविभागों के लिए। मासिक और मौसमी लंबी अवधि के पूर्वानुमान - पूरे देश और एक समरूप क्षेत्र में वर्षा के लिए।
वर्तमान वर्ष 2025 में दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए उसकी मौसमी लंबी अवधि के पूर्वानुमान का नवीनतम सटीकता आकलन दर्शाता है कि यह अत्यधिक सटीक था और अप्रैल 2025 में जारी पूर्वानुमान के अनुसार, पूरे देश में जून-सितंबर की दक्षिण-पश्चिम मानसूनी वर्षा का पूर्वानुमान लंबी अवधि के औसत (दीर्घकालिक औसत) का 105% था, जबकि पूरे देश की वास्तविक मौसमी वर्षा दीर्घकालिक औसत का 108% थी और यह जारी पूर्वानुमान की सीमा के भीतर था। स्थानिक संभाव्यता पूर्वानुमान भी अधिकांश क्षेत्रों में काफी सटीक रहे। इसी प्रकार, मासिक वर्षा पूर्वानुमान भी प्रेक्षित मानों के काफी निकट रहे और पूर्वानुमान सीमा के भीतर रहे। भारी वर्षा पूर्वानुमान प्रदर्शन के नवीनतम आकलन दर्शाते हैं कि साल 2025 में भारी वर्षा पूर्वानुमान उच्च दक्षता प्रदर्शित करते हैं, जिसमें पता लगाने की संभावना 0.85 थी, जो इसकी समग्र सटीकता को दर्शाता है।
आईएमडी ने साल 2021 से मासिक और मौसमी पूर्वानुमान के लिए मल्टी-मॉडल एन्सेम्बल (एमएमई) दृष्टिकोण पर आधारित एक नई रणनीति अपनाई है। यह रणनीति विभिन्न वैश्विक जलवायु पूर्वानुमान और अनुसंधान केंद्रों के युग्मित वैश्विक जलवायु मॉडल (सीजीसीएम) का उपयोग करती है, जिसमें आईएमडी का मानसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्टिंग सिस्टम (एमएमसीएफएस) भी शामिल है। एमएमई-आधारित दृष्टिकोण को अपनाने के बाद आईएमडी की मौसमी पूर्वानुमान प्रणाली प्रदर्शन में सुधार दिखा रही है। साल 2021 से 2025 की अवधि के लिए पूरे भारत की ग्रीष्मकालीन मानसूनी वर्षा पर आईएमडी के मौसमी पूर्वानुमानों का सत्यापन विवरण नीचे दिया गया है:
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वर्ष |
अखिल भारतीय मानसूनी वर्षा (दीर्घकालिक औसत) |
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वास्तविक (%) |
पूर्वानुमान (%) |
टिप्पणी |
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2021 |
99 |
101 |
सटीक |
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2022 |
106.5 |
103 |
सटीक |
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2023 |
95 |
96 |
सटीक |
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2024 |
108 |
106 |
सटीक |
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2025 |
108 |
106 |
सटीक |
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***मॉडल त्रुटि दीर्घकालिक औसत (एलपीए) का 4%± |
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गर्मी की लहर: वर्ष 2025 के ग्रीष्मकाल (मार्च-जून) के लिए गर्मी की लहर के पूर्वानुमान/चेतावनियों का 1 दिन पहले तक पता लगाने की संभावना 98% रही, जो पता लगाने की उत्कृष्ट क्षमता को दर्शाती है। अग्रिम अवधि बढ़ने के साथ-साथ पूर्वानुमान का कौशल घटता जाता है, जिसमें साल 2025 में 3-दिन पहले के पूर्वानुमान की कुशलता 75% और 5-दिन पहले के पूर्वानुमान की कुशलता 46% रही, जबकि 2022 में यह क्रमशः 68% और 50% थी।
बादल गरजने व बिजली कड़कने के साथ तूफ़ान (थंडरस्टॉर्म):साल 2025 के तूफानी मौसम के लिए 3-घंटे के थंडरस्टॉर्म (टीएस) नाउकास्ट (मार्च-जून) का कौशल महत्वपूर्ण सुधार दिखाता है, जिसमें साल 2025 में पता लगाने की संभावना 0.92 रही, जबकि साल 2022 में यह 0.83 थी। 24-घंटे के थंडरस्टॉर्म पूर्वानुमानों के लिए, साल 2025 में पता लगाने की संभावना 0.89 रही।
आईएमडी द्वारा जारी प्रारंभिक चेतावनियों और सरकार (केंद्र एवं राज्य) द्वारा समय पर किए गए उपायों ने हाल के समय में चक्रवातों के कारण होने वाली जान की हानि को महत्वपूर्ण रूप से कम किया है। हाल ही में, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अन्य केंद्रों के समन्वय से एक एंड-टु-एंड जीआईएस-आधारित निर्णय समर्थन प्रणाली (डीएसएस) विकसित की है, जो पूरे देश में सभी मौसम संबंधी खतरों का समय पर पता लगाने और निगरानी करने के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों के फ्रंट एंड के रूप में कार्य कर रही है।
हालांकि सरकार ने हाल के वर्षों में प्रत्यक्ष सार्वजनिक लाभ का आकलन नहीं किया है, लेकिन प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों में महत्वपूर्ण सुधार, जिसमें गंभीर मौसमी घटनाओं के पूर्वानुमान की सटीकता भी शामिल है, ने मृत्युदर में महत्वपूर्ण कमी लाने में योगदान दिया है। उदाहरण के लिए, साल 1999 के ओडिशा सुपर साइक्लोन में चक्रवातों के कारण लगभग 7000 लोगों की जानें गई थीं, जबकि हाल के वर्षों में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के प्रभाव से पूरे क्षेत्र में यह संख्या 100 से भी कम हो गई है। एक चक्रवात का सटीक पूर्वानुमान मृतकों के परिजनों को किए जाने वाले अनुग्रह भुगतान पर होने वाले खर्च और अन्य विभिन्न क्षेत्रों,जैसे विद्युत, समुद्री, विमानन, रेलवे आदि में बचत के संदर्भ में लगभग 1100 करोड़ रुपये की बचत करता है। इसी प्रकार, हाल के वर्षों में गर्मी की लहर से होने वाले जान के नुकसान में भी कमी आई है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा किए गए हस्तक्षेपों ने किसानों, मछुआरों, जोखिमग्रस्त समुदायों और आम जनता के लिए, विशेष रूप से आपदा-संभावित और जलवायु-संवेदनशील क्षेत्रों में, मापनीय सामाजिक-आर्थिक लाभ में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। प्राप्त लाभ इस प्रकार हैं:
कृषि नियोजन और उत्पादन में सुधार:जिला-स्तरीय और ब्लॉक-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान, कृषि-मौसम संबंधी परामर्श और मौसमी पूर्वानुमान किसानों को बुवाई, सिंचाई, उर्वरक के उपयोग, कटाई और फसल सुरक्षा के संबंध में सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाते हैं। इसके परिणामस्वरूप फसल के नुकसान में कमी, इनपुट लागत का अनुकूलन और उपज में सुधार हुआ है।
जन-जीवन और संपत्ति के नुकसान में कमी:चक्रवात, भारी वर्षा, गर्मी की लहर, शीत लहर, बिजली गिरने और तूफान जैसी घटनाओं से संबंधित प्रारंभिक चेतावनियों ने समय पर निकासी, तैयारी के उपाय और आकस्मिक नियोजन को सक्षम बनाया है। इसके परिणामस्वरूप जन-जीवन और आजीविका को होने वाले नुकसान में पर्याप्त कमी आई है।
मछुआरों की सुरक्षा में वृद्धि:समय पर समुद्री मौसम पूर्वानुमान, चक्रवात चेतावनियाँ और महासागर की स्थिति से संबंधित चेतावनियाँ मछुआरों को प्रतिकूल परिस्थितियों में समुद्र में जाने से बचाती हैं। इसके परिणामस्वरूप जन-जीवन और मछली पकड़ने वाले जहाजों को होने वाले नुकसान और आर्थिक कठिनाइयों की घटनाओं में कमी आई है।
आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों को समर्थन:प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान और रिअॅल-टाइम निगरानी राज्य और जिला प्रशासन को राहत एवं प्रतिक्रिया कार्यों की योजना बनाने में सहायता प्रदान करती है। समय पर कार्रवाई रिकवरी लागत को कम करती है और जोखिमग्रस्त समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
गर्मी की लहर और शीत लहर कार्य योजनाएं:पूर्वानुमान-आधारित निर्देशों ने स्थानीय प्रशासन को हीट एक्शन प्लान लागू करने, काम के घंटे समायोजित करने और पेयजल एवं आश्रय की पहुँच सुनिश्चित करने में सक्षम बनाया है, जिससे बाहरी कामगारों, वृद्ध नागरिकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
जलवायु जोखिम के खिलाफ दीर्घकालिक लचीलापन और अग्रिम कार्रवाई के लिए जलवायु सेवाएँ:जलवायु डेटा सेवाएँ और मौसमी पूर्वानुमान नीति निर्माताओं को जल संसाधन प्रबंधन, फसल बीमा योजना, जलाशय संचालन और अवसंरचना की तैयारियों में सहायता प्रदान करते हैं, जिससे दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक लचीलेपन में योगदान मिलता है।
आपदा से होने वाली मौतों में कमी, फसल हानि में कमी, समुद्री सुरक्षा में सुधार और सामुदायिक एवं प्रशासनिक स्तर पर तैयारियों में हुई वृद्धि में मापनीय लाभ परिलक्षित होते हैं। पूर्वानुमान प्रणालियों के सतत् आधुनिकीकरण और मोबाइल एप्लिकेशन, एसएमएस अलर्ट और राज्य एजेंसियों के समन्वय के माध्यम से प्रसार चैनलों के विस्तार से प्रभावित जनसंख्या तक पहुँच और भी मजबूत होती है।
सरकार देश में मौसम और जलवायु पूर्वानुमान प्रणालियों को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मौसम और जलवायु पूर्वानुमान प्रणालियों में सुधार लाने के लिए समय-समय पर नई तकनीकें और प्रौद्योगिकियाँ कार्यान्वित की गई हैं। हाल ही में, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा एक नई केंद्रीय क्षेत्र योजना, "मिशन मौसम", लॉन्च की गई है, जिसका लक्ष्य भारत को "वैदर-रेडी और क्लाइमेट-स्मार्ट" राष्ट्र बनाना है, जिससे जलवायु परिवर्तन और गंभीर मौसमी घटनाओं के प्रभाव को कम किया जा सके और समुदायों की सहनशीलता को मजबूत किया जा सके। प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के विभिन्न घटकों में हुई कुछ प्रगति नीचे दी गई है:
यह जानकारी आज लोकसभा में पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेन्द्र सिंह द्वारा प्रस्तुत की गई।
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