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09/30/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/30/2026 05:32

टाटा विवाद अब चैरिटी कमिश्नर के पास: श्रीनिवासन ने क्यों उठाई ट्रस्ट की जांच की मांग? नोएल की भूमिका पर सवाल

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टाटा विवाद अब चैरिटी कमिश्नर के पास: श्रीनिवासन ने क्यों उठाई ट्रस्ट की जांच की मांग? नोएल की भूमिका पर सवाल

Wed, 30 Sep 2026 04:41 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 30 Sep 2026 04:41 PM IST
सार

टाटा संस का बोर्डरूम विवाद अब चैरिटी कमिश्नर तक पहुंच गया है। ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन ने सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के कामकाज और नोएल टाटा की नियुक्तियों की जांच की मांग की है। जानिए क्या है पूरा विवाद और इसके कानूनी व टैक्स जोखिम। पूरी खबर पढ़ें।

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टाटा ट्रस्ट में वेणुश्रीनिवासन को क्या दिक्कत? - फोटो : amarujala.com
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विस्तार

देश के सबसे बड़े औद्योगिक घरानों में से एक टाटा समूह में जारी बोर्डरूम विवाद अब एक नया और गंभीर मोड़ ले चुका है। टाटा संस में लगभग 66 प्रतिशत नियंत्रण रखने वाली प्रमुख चैरिटेबल संस्था 'सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट' (एसडीटीटी) के कामकाज और प्रशासन को लेकर ट्रस्टी व टाटा संस के नॉमिनी डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन ने महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर का दरवाजा खटखटाया है।

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श्रीनिवासन ने एक शिकायती पत्र भेजकर ट्रस्ट के शासन, नोएल एन. टाटा को आजीवन ट्रस्टी बनाए रखने, उनके बेटे नेविल टाटा की नियुक्ति और टाटा संस के बोर्ड में एक स्वतंत्र निदेशक के रूप में उनकी अपनी भूमिका को सीमित करने की कोशिशों की नियामक जांच की मांग की है। इस कदम से टाटा संस के नेतृत्व, प्रस्तावित शेयर बाजार लिस्टिंग और कंपनी पर टाटा ट्रस्ट्स के अधिकार को लेकर जारी अंदरूनी कलह और अधिक जटिल हो गई है।
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वेणु श्रीनिवासन ने चैरिटी कमिश्नर के समक्ष क्या मुख्य आरोप लगाए हैं?

वेणु श्रीनिवासन ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि 16 सितंबर को सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) द्वारा सर्कुलर रिजॉल्यूशन नंबर 107 जारी किया गया था, जिसका उद्देश्य उन्हें टाटा संस की प्रस्तावित लिस्टिंग पर चर्चा या मतदान करने से रोकना था। श्रीनिवासन के अनुसार, यह प्रयास उनकी स्वतंत्र राय और वोट देने के अधिकार को दबाने और कुछ ही ट्रस्टियों के हाथों में निर्णय लेने की शक्ति को केंद्रित करने की कोशिश थी।

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इसके अगले ही दिन, 17 सितंबर को आयोजित टाटा संस के बोर्ड की बैठक में श्रीनिवासन ने चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को तीसरे पांच साल के कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्त करने और लिस्टिंग प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि नोएल टाटा ने इन दोनों ही प्रस्तावों का कड़ा विरोध किया। इसके बावजूद, कास्टिंग वोट के जरिए दोनों प्रस्ताव पास हो गए, जिसके बाद टाटा ट्रस्ट्स ने बोर्ड के फैसलों की वैधता पर सवाल उठाए थे।

चैरिटेबल ट्रस्ट के हस्तक्षेप से क्या कानूनी और टैक्स जोखिम पैदा हो रहे हैं?

वेणु श्रीनिवासन ने चेतावनी दी है कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) और टाटा ट्रस्ट्स का टाटा संस के व्यावसायिक व रणनीतिक मामलों में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप लगातार बढ़ रहा है।

  • व्यावसायिक गतिविधियों में भागीदारी: श्रीनिवासन ने बताया कि 11 मार्च 1932 को गठित एसडीटीटी एक सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट है, जिसका उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य और जन कल्याण को बढ़ावा देना है। इसे किसी व्यावसायिक उद्यम की तरह काम करने या व्यावसायिक गतिविधियों में सीधे शामिल होने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
  • टैक्स छूट रद्द होने का खतरा: आयकर अधिनियम, 2025 के तहत गैर-लाभकारी संगठनों द्वारा व्यावसायिक गतिविधियां चलाना एक गंभीर उल्लंघन माना जाता है। यदि ट्रस्ट का पंजीकरण रद्द होता है, तो उसकी टैक्स छूट समाप्त हो सकती है।
  • धारा 352 का वित्तीय जोखिम: पंजीकरण रद्द होने की स्थिति में धारा 352 के तहत ट्रस्ट की परिसंपत्तियों के बाजार मूल्य पर अधिकतम सीमांत दर से टैक्स लग सकता है, जिससे ट्रस्ट के धर्मार्थ कोष को भारी वित्तीय नुकसान हो सकता है।

एसडीटीटी के बोर्ड में इस समय कौन-कौन शामिल हैं?

1 सितंबर 2025 से लागू महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट (MPT Act), 1950 में हुए संशोधनों का हवाला देते हुए श्रीनिवासन ने ट्रस्ट के प्रशासन की तत्काल जांच की मांग की है।

वर्तमान ट्रस्टी: वर्तमान में एसडीटीटी के ट्रस्टियों में नोएल एन. टाटा (फरवरी 2022 से आजीवन ट्रस्टी), वेणु श्रीनिवासन (कार्यकाल 12 नवंबर 2028 तक), विजय सिंह (13 जुलाई 2027 तक), डारियस खंबाटा (9 नवंबर 2026 तक), नेविल एन. टाटा (12 नवंबर 2028 तक) और भास्कर भट (12 नवंबर 2028 तक) शामिल हैं।

श्रीनिवासन की ओर से मांगी गई राहत: श्रीनिवासन ने चैरिटी कमिश्नर से मांग की है कि नोएल एन. टाटा को टाटा संस के किसी भी आम सम्मेलन या मतदान से जुड़े फैसलों से अलग रहने का निर्देश दिया जाए। साथ ही, जांच लंबित रहने तक एसडीटीटी के बोर्ड के पुनर्गठन को फ्रीज करने और ट्रस्टियों के निलंबन या हटाने जैसी सख्त कार्रवाई करने की अपील की गई है।

इस विवाद का टाटा समूह के भविष्य पर क्या असर पड़ सकता है?

यह विवाद बेहद संवेदनशील इसलिए है क्योंकि वेणु श्रीनिवासन दोनों संस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं- वह टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टी भी हैं और टाटा संस के बोर्ड में ट्रस्ट्स के नामांकित निदेशक भी हैं। ट्रस्ट्स के भीतर बढ़ती आंतरिक कलह अब सीधे तौर पर होल्डिंग कंपनी के व्यावसायिक निर्णयों, शापूरजी पालोनजी ग्रुप की हिस्सेदारी के मुद्दों और शेयर बाजार में संभावित लिस्टिंग को प्रभावित कर रही है। यदि चैरिटी कमिश्नर इस मामले में औपचारिक जांच शुरू करते हैं, तो टाटा समूह के 90 साल से अधिक पुराने चैरिटेबल मॉडल के गवर्नेंस ढांचे की गहन समीक्षा होना तय है।

Amar Ujala Ltd published this content on September 30, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 30, 2026 at 11:33 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]