06/09/2026 | Press release | Distributed by Public on 06/09/2026 05:42
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (आईएनएसए) ने ब्रिक्स विज्ञान अकादमी फोरम 2026 की पहली बैठक का आयोजन किया। "सतत विकास के लिए एआई का उपयोग और वैश्विक दक्षिण सहयोग को मजबूत करना" विषय पर वर्चुअल रूप से आयोजित इस फोरम में 10 देशों - ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, रूस, दक्षिण अफ्रीका, बेलारूस, नाइजीरिया और वियतनाम - की विज्ञान अकादमियों ने जिम्मेदार और न्यायसंगत एआई विकास पर एक साझा घोषणा को आगे बढ़ाने के लिए भाग लिया।
इस बैठक का संचालन शुरू से अंत तक भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के उपाध्यक्ष (अंतर्राष्ट्रीय) प्रोफेसर देबाशीष मित्रा ने किया जिन्होंने प्रतिभागी अकादमियों के बीच सुनियोजित संवाद का मार्गदर्शन किया। अपने स्वागत भाषण में प्रोफेसर मित्रा ने उल्लेख किया कि यह मंच भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के अंतर्गत "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण" विषय पर आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने इस वैज्ञानिक एजेंडा को आगे बढ़ाने में भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया।
मुख्य परिणामों का संक्षिप्त विवरण
भारत ब्रिक्स विज्ञान सहयोग का नेतृत्व कर रहा है
भारत 2026 में 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' विषय के अंतर्गत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। इस भूमिका में, भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी ब्रिक्स देशों और साझेदार देशों के बीच वैज्ञानिक सहयोग का नेतृत्व कर रहा है। यह मंच जुलाई में आईआईटी हैदराबाद में आयोजित होने वाली ब्रिक्स विज्ञान अकादमियों की पूर्ण बैठक 2026 के लिए तैयारी मंच के रूप में कार्य करता है।
"यह मंच संवाद से आगे बढ़कर विकास करने का प्रयास करता है। वैश्विक दक्षिण में समावेशी और सतत विकास के लिए एआई को एक व्यावहारिक साधन बनना चाहिए।" - प्रो. शेखर सी. मांडे, अध्यक्ष, आईएनएसए
घोषणापत्र का मसौदा: एआई की खाई को पाटना
आईआईटी दिल्ली के लोक नीति संकाय के संस्थापक प्रमुख प्रोफेसर अंबुज सागर ने घोषणापत्र का मसौदा प्रस्तुत किया, जिसमें एआई क्षमता के असमान वितरण और विकसित एवं विकासशील देशों के बीच बढ़ते डिजिटल विभाजन से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रकाश डाला गया। इस घोषणापत्र का उद्देश्य वैज्ञानिक खोजों को गति देने के लिए एआई का उपयोग करना है, जिसमें सामग्री विज्ञान, औषधि विकास, जलवायु मॉडलिंग और इंजीनियरिंग शामिल हैं, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि इसका लाभ वैश्विक दक्षिण के देशों तक समान रूप से पहुंचे।
मंच का लक्ष्य
सहभागी अकादमियों ने घोषणा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए लक्षित सिफारिशें प्रस्तुत कीं:
ब्रिक्स एआई सहयोग के लिए अभिसारी प्राथमिकताएं
विचार-विमर्श के आधार पर, भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के उपाध्यक्ष (विज्ञान नीति) प्रो. अनुराग अग्रवाल ने आम सहमति के कुछ प्रमुख विषयों की पहचान की: साझा कंप्यूटिंग अवसंरचना; खुले डेटा इकोसिस्टम; प्रौद्योगिकी संप्रभुता; ऊर्जा-कुशल डेटा केंद्र; मानव संसाधन विकास; और बहुभाषी एआई संसाधन। बड़े भाषा मॉडल के अलावा, प्रतिभागियों ने उन क्षेत्रों में छोटे, कार्य-उन्मुख औद्योगिक मॉडलों के रणनीतिक महत्व पर भी प्रकाश डाला, जहां त्रुटियों के गंभीर परिणाम होते हैं।
"एआई के क्षेत्र में दक्षिण-दक्षिण ब्रिक्स सहयोग कहीं अधिक न्यायसंगत तरीके से बदलाव ला सकता है, जिससे वास्तव में सतत विकास संभव हो सकेगा।" - प्रो. अनुराग अग्रवाल, उपाध्यक्ष (विज्ञान नीति), आईएसए
बैठक में इस बात की पुष्टि की गई कि मानविकी और सामाजिक विज्ञान एआई विकास के अभिन्न अंग होने चाहिए, और विश्वसनीय एआई प्रणालियों के लिए शासन ढांचे, नैतिक मानक और मजबूत डेटा-साझाकरण तंत्र अपरिहार्य हैं।
अगला कदम
आज की बैठक में दिए गए सुझावों को संशोधित घोषणापत्र में शामिल किया जाएगा। भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के कार्यकारी निदेशक डॉ. ब्रजेश पांडे ने घोषणा की कि ब्रिक्स देशों और सहयोगी देशों के प्रतिनिधिमंडल 22-23 जुलाई 2026 को आईआईटी हैदराबाद में दूसरी बैठक के लिए व्यक्तिगत रूप से एकत्रित होंगे, जहां घोषणापत्र को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।
सीएसआईआर के वैज्ञानिक और तकनीकी सूचना नीति अनुसंधान संस्थान, सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर ने भी विचार-विमर्श में भाग लिया और योगदान दिया।
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पीके/केसी/एचएन/एनजे