Prime Minister’s Office of India

06/16/2026 | Press release | Distributed by Public on 06/16/2026 21:23

प्रधानमंत्री ने फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन में 'नई साझेदारियां बनाने और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को फिर से कायम करने' पर आयोजित सत्र को संबोधित किया

प्रधानमंत्री कार्यालय

प्रधानमंत्री ने फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन में "नई साझेदारियां बनाने और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को फिर से कायम करने" पर आयोजित सत्र को संबोधित किया

प्रविष्टि तिथि: 16 JUN 2026 10:07PM by PIB Delhi

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज फ्रांस के एवियन में जी7 शिखर सम्मेलन में 'नई साझेदारियां बनाना और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को फिर से कायम करना' विषय पर आयोजित आउटरीच सत्र को संबोधित किया।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आज की आपस में जुड़ी हुई दुनिया में, जहां ऊर्जा, भोजन, स्वास्थ्य, साइबर और आर्थिक सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हैं, मानवता की प्रगति और समृद्धि के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां बनाना जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि अनिश्चितता से भरी इस दुनिया में, व्यापार और तकनीक का इस्तेमाल संकीर्ण हितों के लिए किया जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भरोसे की कमी पैदा हो रही है। कोविड महामारी से मिले सबक का उल्लेख करते हुए, उन्होंने देशों से वैश्विक साझेदारियों में भरोसा और पारदर्शिता बढ़ाने पर ध्यान देने का आह्वान किया।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति भारत के नजरिए के बारे में बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने हमेशा "मानवता सबसे पहले" के सिद्धांत का पालन किया है। यह सोच भारत की सभी कोशिशों के केंद्र में रही है, चाहे वह इंटरनेशनल सोलर अलायंस, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्लोबल बायो-फ्यूल अलायंस, मिशन लाइफ या 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत काम करना हो। उन्होंने आगे कहा कि इसी समावेशी नजरिए की वजह से, चाहे वह श्रीलंका में चक्रवात हो, अफ़गानिस्तान में भूकंप, मोजाम्बिक में बाढ़ या जमैका में तूफान हो, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में प्राकृतिक आपदाओं के समय भारत सबसे पहले मदद के लिए आगे आया है।

भारत की समावेशी और टिकाऊ विकास यात्रा के बारे में बात करते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि "सर्व जन हिताय, सर्व जन सुखाय" (सभी का कल्याण और खुशी) के मंत्र ने वित्तीय समावेशन, स्वास्थ्य सुरक्षा, डिजिटल पहचान, तकनीक के जरिए लोगों के सशक्तिकरण और महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास को बढ़ावा देने में सराहनीय परिणाम दिए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को 'दाता-प्राप्तकर्ता' (डोनर-रिसीपेंट) वाली सोच से आगे बढ़कर एकजुटता और समान हिस्सेदारी की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान न करना अंतरराष्ट्रीय एकजुटता बनाने में सबसे बड़ी बाधा है और इसे प्राथमिकता के आधार पर हल करने की जरूरत है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों में बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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पीके/केसी/एमपी


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