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09/30/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/29/2026 23:11

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: बंद निगमों के कर्मचारियों को मिलेगा एक-एक लाख मुआवजा, तीन महीने में भुगतान के निर्देश

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सुप्रीम कोर्ट का आदेश: बंद निगमों के कर्मचारियों को मिलेगा एक-एक लाख मुआवजा, तीन महीने में भुगतान के निर्देश

Wed, 30 Sep 2026 09:55 AM IST
हिमांशु सिंह बघेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना/रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना/रांची Published by: हिमांशु सिंह बघेल Updated Wed, 30 Sep 2026 09:55 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार और झारखंड से जुड़े बंद राज्य निगमों के कर्मचारियों और कामगारों के बकाये के मामले में महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। संबंधित दैनिक वेतनभोगियों को एकमुश्त एक-एक लाख रुपये का मुआवजा देने और बकाये पर निर्धारित दर से ब्याज का भुगतान करने को कहा गया है।

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सांकेतिक फोटो - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार और झारखंड सरकार को राज्य के स्वामित्व वाले पांच बंद हो चुके निगमों के संबंधित दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों और मजदूरों को एकमुश्त एक-एक लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने दोनों राज्यों को ब्याज सहित संपूर्ण भुगतान तीन महीने के भीतर करने का आदेश दिया है। इस आदेश से 600 से अधिक कर्मचारियों और कामगारों को प्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलने की बात सामने आई है। संबंधित मामला बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 लागू होने के बाद राज्य के स्वामित्व वाले पांच बंद पड़े निगमों के कर्मचारियों की देनदारियों और सेवा संबंधी बकाये के बंटवारे से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक रिकॉर्ड में यह मामला बिहार राज्य अर्ध सरकारी अराजपति कर्मचारी महासंघ बनाम बिहार राज्य, W.P.(C) No. 932/2022 के रूप में दर्ज है।
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ईपीएफ बकाये पर 12 फीसदी और अन्य बकाये पर 6 फीसदी ब्याज
सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने विलंब से दिए जाने वाले कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के बकाये पर 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से साधारण ब्याज देने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, देरी से भुगतान किए गए वेतन, मजदूरी और अन्य मौद्रिक बकाये पर छह प्रतिशत वार्षिक की दर से साधारण ब्याज देय होगा। ब्याज की गणना राशि देय होने की तिथि से लेकर वास्तविक भुगतान किए जाने की तारीख तक की जाएगी। यह धनराशि संबंधित कर्मचारियों या उनके वैध कानूनी उत्तराधिकारियों को प्रदान की जाएगी।
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चार हफ्ते में कर्मचारियों की जानकारी सार्वजनिक करने का आदेश
प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए शीर्ष अदालत ने बिहार और झारखंड सरकार को चार हफ्ते के भीतर सभी संबंधित कर्मियों और कामगारों की अद्यतन जानकारी सार्वजनिक करने का आदेश दिया है। यह विवरण दोनों राज्यों के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग तथा संबंधित प्रशासनिक विभागों की आधिकारिक वेबसाइटों पर प्रकाशित करना होगा।
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दैनिक वेतनभोगियों को एक लाख रुपये की अतिरिक्त राहत
शीर्ष अदालत का प्रमुख आदेश बिहार स्टेट कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन के 598 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों और कामगारों से संबंधित है। इन कर्मियों के बकाये की गणना वर्ष 1992 से लेकर संबंधित कर्मचारी की सेवानिवृत्ति, मृत्यु या सेवा की औपचारिक समाप्ति की तारीख तक 42.50 रुपये प्रतिदिन की दर से की गई थी। इस पुरानी निर्धारित दर के आधार पर पूर्व में 467 दैनिक वेतनभोगियों को कुल 14.21 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।

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सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान कहा कि कई दशकों तक 42.50 रुपये प्रतिदिन की एक ही दर से बकाये की गणना करना उचित नहीं ठहराया जा सकता। इस स्थिति को देखते हुए अदालत ने प्रत्येक संबंधित दैनिक वेतनभोगी को एक लाख रुपये का अतिरिक्त एकमुश्त मुआवजा देने का निर्देश दिया। 598 कर्मचारियों पर यह व्यवस्था लागू होने से कुल 5.98 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान होगा।

विवाद से जुड़े पांच बंद निगम

यह विवाद मुख्य रूप से पांच राज्य-स्वामित्व वाले निगमों से संबंधित है। इनमें-
  • बिहार राज्य निर्माण निगम लिमिटेड
  • बिहार राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड
  • बिहार राज्य इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम लिमिटेड
  • बिहार राज्य वन विकास निगम लिमिटेड
  • बिहार राज्य पंचायती राज वित्तीय निगम लिमिटेड शामिल हैं।

झारखंड में भी लंबित हैं कर्मचारियों के मामले
दूसरी ओर, झारखंड उच्च न्यायालय में बीएसआईडीसी कामगार यूनियन सहित अन्य याचिकाओं पर लंबे समय से सुनवाई चल रही है। सर्वोच्च न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के कारण उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका पर अगली सुनवाई के लिए पांच नवंबर की तारीख तय की है। बीएसआईडीसी के पांच बंद कारखानों के करीब 600 कर्मचारियों का मामला भी लंबित है। इसमें झारखंड क्षेत्र में स्थित ईईएफ इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट फैक्टरी, हाइटेंशन इंसुलेटर फैक्टरी और स्वर्णरेखा घड़ी कारखाने के कर्मचारियों के मामले भी शामिल हैं। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का प्रभाव इन लंबित मामलों पर भी पड़ने की बात कही गई है।
Amar Ujala Ltd published this content on September 30, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 30, 2026 at 05:11 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]