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07/23/2026 | Press release | Distributed by Public on 07/23/2026 15:58

35 साल बाद फूटा आस पहाड़ का झरना: 18 दिन बाद लौटे मानसून ने मचाई हलचल, एक दिन में हुई झमाझम बारिश; तस्वीरें

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35 साल बाद फूटा आस पहाड़ का झरना: 18 दिन बाद लौटे मानसून ने मचाई हलचल, एक दिन में हुई झमाझम बारिश; तस्वीरें

Thu, 23 Jul 2026 06:31 PM IST
भीलवाड़ा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भीलवाड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भीलवाड़ा Published by: भीलवाड़ा ब्यूरो Updated Thu, 23 Jul 2026 06:31 PM IST
सार

Monsoon In Bhilwara: 18 दिन बाद भीलवाड़ा में मानसून ने जोरदार वापसी की। बदनोर में 9 इंच और आसींद में 6 इंच बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ। झमाझम बारिश से बाजार और पुल जलमग्न हो गए हैं, जबकि किसानों में अच्छी फसल की उम्मीद जागी।

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कहीं आफत, कहीं राहत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

भीलवाड़ा जिले में पूरे 18 दिन की लंबी बेरुखी के बाद मानसून ने ऐसी दमदार वापसी की कि सूखी धरती ने राहत की सांस ली, लेकिन कई इलाकों में जनजीवन भी पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। बुधवार को आसींद और बदनोर क्षेत्र में आसमान से मानो पानी नहीं, आफत बरसी। एक ही दिन में बदनोर में करीब 9 इंच और आसींद में 6 इंच बारिश दर्ज की गई। इस अभूतपूर्व वर्षा ने जहां नदियों-नालों को उफान पर ला दिया, वहीं करीब 35 वर्षों बाद आस पहाड़ का ऐतिहासिक प्राकृतिक झरना पूरे वेग के साथ बह निकला। इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा।
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बारिश का सबसे अद्भुत नजारा बदनोर क्षेत्र के प्रसिद्ध आस पहाड़ पर देखने को मिला। वर्षों से शांत पड़ा प्राकृतिक झरना जब गर्जना करता हुआ बह निकला तो पूरा क्षेत्र रोमांचित हो उठा। पहाड़ों से दूधिया धाराओं के रूप में गिरता पानी और उसकी गूंज ने ऐसा मनोहारी दृश्य प्रस्तुत किया कि हर कोई इस अनूठे नजारे को अपने मोबाइल कैमरे में कैद करने को उत्सुक नजर आया।
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आस पहाड़ी धूणी आश्रम के महंत महेंद्र पुरी महाराज ने बताया कि वे पिछले 10 वर्षों से आश्रम में निवास कर रहे हैं, लेकिन पहली बार उन्होंने इस झरने को इतने तेज वेग से बहते देखा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 35 साल बाद यह झरना अपने पूरे शबाब पर नजर आया है। बुजुर्गों के अनुसार, पहले कभी-कभार इतनी बारिश होती थी कि यह झरना जीवंत हो उठता था, लेकिन पिछले कई दशकों से ऐसा दृश्य देखने को नहीं मिला था।

मानसून की वापसी ने बदला मौसम का मिजाज
लगातार 18 दिनों तक बारिश का इंतजार कर रहे लोगों के लिए यह बरसात राहत लेकर आई। भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों को जहां मौसम ने राहत दी, वहीं खेतों में भी नई जान आ गई। लंबे इंतजार के बाद हुई झमाझम बारिश से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। खरीफ फसलों के लिए यह बारिश किसी संजीवनी से कम नहीं मानी जा रही है। खेतों में पर्याप्त नमी आने से सोयाबीन, मक्का, उड़द और अन्य फसलों की अच्छी पैदावार की उम्मीद बढ़ गई है।

नेखाड़ी नदी उफान पर, पुल डूबा, आवागमन ठप
बारिश का सबसे अधिक असर आसींद क्षेत्र में देखने को मिला। लगातार मूसलाधार वर्षा के कारण क्षेत्र से गुजरने वाली नेखाड़ी नदी उफान पर आ गई। बाजुंदा रोड पर स्थित नदी का पुल करीब एक फीट पानी में डूब गया, जिससे इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई। पुल पर तेज बहाव होने के कारण प्रशासन ने लोगों से नदी पार नहीं करने की अपील की। कई वाहन दोनों ओर घंटों तक फंसे रहे और लोगों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ा। प्रशासन और पुलिस की टीम पूरे दिन हालात पर नजर बनाए रही।



मुख्य बाजार बना तालाब, दुकानों और घरों में घुसा पानी
आसींद कस्बे में भारी बारिश ने नगर की व्यवस्थाओं की भी पोल खोल दी। मुख्य बाजार में तीन से चार फीट तक पानी भर जाने से पूरा बाजार तालाब में तब्दील हो गया। जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश का पानी दुकानों और मकानों में घुस गया। व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। कई दुकानों में रखा सामान भीग गया, जबकि ग्राहकों की आवाजाही पूरी तरह ठप रही। बाजार में घंटों तक जलभराव की स्थिति बनी रही। स्थानीय लोगों ने नगर की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए स्थायी समाधान की मांग की।

35 से 40 बच्चों से भरी स्कूल बस गड्ढे में फंसी, ग्रामीणों ने बचाई जान
बारिश के बीच आसींद-बाजुंदा मार्ग पर हाथीभाटा और केसरपुर के बीच एक बड़ा हादसा टल गया। सड़क पर बने गहरे गड्ढे में एक निजी स्कूल की बस फंस गई। बस में लगभग 35 से 40 छात्र-छात्राएं सवार थे। बस के अचानक धंसने से बच्चों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और बिना समय गंवाए ट्रैक्टर की मदद से बस को बाहर निकाला। ग्रामीणों की सूझबूझ और तत्परता के चलते सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद अभिभावकों और ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी गई। उनका कहना है कि बारिश के दौरान इस सड़क की हालत हर साल बदतर हो जाती है, लेकिन जिम्मेदार विभाग केवल आश्वासन देकर अपनी जिम्मेदारी से बच निकलता है।
दो साल पहले भी हो चुका है हादसा
ग्रामीणों ने बताया कि इसी स्थान पर करीब दो वर्ष पहले भी सड़क धंसने से हादसा हुआ था, जिसमें कई लोग घायल हो गए थे। इसके बावजूद सड़क की स्थायी मरम्मत नहीं कराई गई। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सड़क का पुनर्निर्माण नहीं कराया गया तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।

झरने की गूंज सुनने उमड़ रही भीड़
आस पहाड़ का झरना इन दिनों क्षेत्र का सबसे बड़ा आकर्षण बन गया है। झरने की तेज गर्जना दूर-दूर तक सुनाई दे रही है। प्राकृतिक सौंदर्य का यह अद्भुत दृश्य देखने के लिए आसपास के गांवों के अलावा भीलवाड़ा, शाहपुरा, बदनोर और अन्य क्षेत्रों से भी लोग बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। युवा सेल्फी और वीडियो बनाने में व्यस्त नजर आ रहे हैं, जबकि परिवार अपने बच्चों के साथ इस दुर्लभ नजारे का आनंद ले रहे हैं। हालांकि बढ़ती भीड़ को देखते हुए स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।



खुश किसान, सतर्क प्रशासन
बारिश ने जहां आमजन की मुश्किलें बढ़ाई हैं, वहीं किसानों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है। सूखे की चिंता में डूबे किसानों को अब अच्छी फसल की उम्मीद दिखाई देने लगी है। खेतों में नमी बढ़ने से कृषि कार्यों में तेजी आएगी और फसलों की बढ़वार को भी फायदा मिलेगा। इधर प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी-नालों, पुल-पुलियों और जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें तथा मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें। साथ ही पर्यटन स्थल बन चुके आस पहाड़ झरने पर भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

18 दिन की खामोशी के बाद लौटे मानसून ने भीलवाड़ा जिले को एक साथ राहत, रोमांच और चुनौती-तीनों का एहसास करा दिया। एक ओर 35 वर्षों बाद जीवंत हुआ आस पहाड़ का झरना प्रकृति के अनुपम सौंदर्य का प्रतीक बन गया है, तो दूसरी ओर जलभराव, डूबे पुल और जर्जर सड़कों ने विकास की वास्तविक तस्वीर भी सामने रख दी है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि बारिश के बाद प्रशासन राहत और सुधार के मोर्चे पर कितनी तेजी से काम करता है।
Amar Ujala Ltd published this content on July 23, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on July 23, 2026 at 21:59 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]