03/13/2026 | Press release | Distributed by Public on 03/13/2026 03:41
राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना के भाग के रूप में, ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना के तीसरे चरण का कार्यान्वयन किया जा रहा है।
न्याय वितरण प्रणाली को सुलभ, किफायती, विश्वसनीय और पारदर्शी बनाने तथा न्यायपालिका के सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) विकास के लिए ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना का कार्यान्वयन किया जा रहा है।
इस परियोजना के अंतर्गत, आधुनिक तकनीकों को एकीकृत करने हेतु "भविष्य की तकनीकी प्रगति" घटक के लिए 53.57 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। न्यायिक क्षेत्र में एआई के उपयोग की संभावनाओं का पता लगाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने एआई समिति का गठन किया है। यह समिति न्यायालयों में एआई के कार्यान्वयन और निगरानी के लिए उत्तरदायी है।
सर्वोच्च न्यायालय आईआईटी, मद्रास के सहयोग से दस्तावेज़ों से जुड़ी कमियों को दूर करने, मेटा डेटा और इसे इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग मॉड्यूल तथा केस मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर, यानी इंटीग्रेटेड केस मैनेजमेंट एंड इंफॉर्मेशन सिस्टम के साथ एकीकृत करने के लिए एआई और एमएल उपकरणों का प्रोटोटाइप परीक्षण कर रहा है। न्यायाधीशों को कानूनी अनुसंधान और दस्तावेज़ विश्लेषण में सहायता प्रदान करने के लिए लीगल रिसर्च एनालिसिस असिस्टेंट एआई उपकरण विकसित किया गया है। न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों को सभी केसों से संबंधित जानकारी और कार्यों के लिए एक प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराकर अदालत के कामकाज को कागज रहित बनाने के लिए एआई आधारित उपकरण डिजिटल कोर्ट्स 2.1 विकसित किया गया है। इस प्लेटफॉर्म पर न्यायाधीशों के लिए आदेशों और निर्णयों को लिखवाने में सहायता के लिए वॉइस-टू-टेक्स्ट (एएसआर-एसएचआरयूटीआई) और अनुवाद (पीएएनआईएनआई) की सुविधाएं उपलब्ध हैं।
लीगल रिसर्च एनालिसिस असिस्टेंट और डिजिटल कोर्ट्स 2.1 सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों और जिला न्यायालयों द्वारा पारित निर्णयों और आदेशों न्यायालयों के डेटा गोपनीयता और नैतिक सुरक्षा उपायों का ध्यान रखते हैं। इसके अतिरिक्त, सर्वोच्च न्यायालय की ई-समिति ने डेटा की गोपनीयता के लिए सुरक्षित कनेक्टिविटी और प्रमाणीकरण तंत्र की सिफारिश करने, ई-कोर्ट परियोजना के तहत डिजिटल बुनियादी ढांचे और सेवा वितरण प्रणालियों का आकलन करने और डेटा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों के साथ उच्च न्यायालय के छह न्यायाधीशों की एक उप-समिति का भी गठन किया है।
एआई आधारित समाधानों का वर्तमान दायरा नियंत्रित प्रायोगिक परियोजनाओं तक ही सीमित है, इसका उद्देश्य एआई का जिम्मेदार, सुरक्षित और व्यावहारिक उपयोग सुनिश्चित करना है। इस संबंध में परिचालन ढांचों का निर्माण और विनियमन संबंधित उच्च न्यायालयों के कार्य नियमों और नीतियों द्वारा निर्देशित किया जाएगा।
विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संसदीय कार्य राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
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