09/23/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/23/2026 17:42
दो दशक से झारखंड सरकार और एनआईए के इनामी बृजेश गंझू को उत्तर प्रदेश में शरण देने वालों को भी एटीएस ने रडार पर लिया है। झारखंड के दो सफेदपोश, कारोबारियों का भी साथ समय-समय पर बृजेश गंझू को मिलता था। झारखंड, बिहार, बंगाल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कई लोगों को चिह्नित किया गया है। झारखंड सरकार की सख्ती बढ़ी तो वह उत्तर प्रदेश के चंदौली, मिर्जापुर, सोनभद्र और सोनभद्र-एमपी के बॉर्डर के जिलों को ठिकाना बना रखा था। चंदौली-सोनभद्र में वह सुरक्षित ठौर ढूंढ़ रहा था।
up encounter - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
एटीएस के अनुसार, उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करने वाले नक्सली और उन्हें शरण देने वाले रडार पर हैं। झारखंड के दो सफेदपोश बृजेश गंझू के मददगार थे। उत्तर प्रदेश, बिहार-झारखंड, बंगाल, एमपी और छत्तीसगढ़ में उसका नेटवर्क था। आम्रपाली, मगध और चंद्रगुप्त नामक कोल खनन परियोजनाओं के अधिकारियों को डरा धमकाकर अपने लोगों को जबरन नौकरी पर रखवाता था। महिलाओं की सबसे अधिक नौकरी इसने कोल परियोजनाओं में लगवाई थी।
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पत्नी ऊषा देवी और उसकी बहन, बहनोई और साले के नाम पर बृजेश गंझू ने अकूत संपत्तियां बनाई हैं। मुठभेड़ में मारे गए बृजेश ने दो शादी की थी, जिसमें दूसरी पत्नी ऊषा देवी है। पूरे कारोबार को ऊषा ही संचालित करती है और कोल इंडिया में नौकरी भी करती थी। जबकि असलहों, लेवी वसूली से लेकर मादक पदार्थों की तस्करी में टीएसपीसी सुप्रीमो बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता खुद सक्रिय था।
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बृजेश के पांच हाथ, जिस पर था उसके बहुत भरोसा
पलामू के मनातू क्षेत्र का रहने वाला शशिकांत गंझू पहले टीएसपीसी का जोनल कमांडर था। उस पर 10 लाख रुपये का इनाम है। हाल ही में जेल से बाहर आए टीएसपीसी के सक्रिय सदस्य नथुनी सिंह भी बृजेश गंझू के लगातार संपर्क में रहा है। टीएसपीसी में एरिया कमेटी का सदस्य और बृजेश का सबसे भरोसेमंद आक्रमण गंझू है। यह जेल में बंद है।
रामनगर में मुठभेड़ के बाद मौके पर मौजूद पुलिस व यूपी एटीएस के जवान। - फोटो : अमर उजाला
बृजेश के लिए आक्रमण गंझू लेवी (रंगदारी) का पैसा संभालता था। आक्रमण रंगदारी का पैसा और शशिकांत असलहों की तस्करी का हिसाब किताब देखता था। टीएसपीसी का कमांडर 5 लाख इनामी मुखदेव यादव मुठभेड़ में मारा गया था। बृजेश गंझू के साथ लंबे समय तक जुड़ा रहा। रांची, पलामू, चतरा, लातेहार में खासा प्रभाव रखने वाले दो सफेदपोश भी बृजेश गंझू के मददगार रहे हैं। कोयलांचल से लेवी वसूली बृजेश गंझू के आय का स्रोत था। उसके मारे जाने के बाद कोयलांचल में ट्रांसपोर्टर, कोयला कारोबारियों ने राहत की सांस ली है।