Amar Ujala Ltd

08/07/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/07/2026 08:14

LPG Import: अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता बना, जानिए देश की ऊर्जा सुरक्षा पर क्या बोले मंत्री

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LPG Import: अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता बना, जानिए देश की ऊर्जा सुरक्षा पर क्या बोले मंत्री

Fri, 07 Aug 2026 07:16 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 07 Aug 2026 07:16 PM IST
सार

दुनिया में जारी ऊर्जा संकट और भौगोलिक अस्थिरताओं के बीच अमेरिका एलपीजी के मामले में भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया है। भारत के एलपीजी आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी बढ़कर 67 प्रतिशत हो गई है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस पर अपनी राय रखी है। उन्होंने क्या कहा है, आइए जानते हैं विस्तार से।

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हरदीप सिंह पुरी - फोटो : amarujala.com
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विस्तार

वैश्विक ऊर्जा संकट और भौगोलिक अस्थिरताओं के बीच भारत के ऊर्जा आयात पैटर्न में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव आया है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, अब अमेरिका भारत के कुल एलपीजी आयात में लगभग 67 फीसदी हिस्सेदारी के साथ देश का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। यह आंकड़ा इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि चालू वर्ष की शुरुआत में सरकार ने अपनी कुल एलपीजी आवश्यकता का केवल 10 फीसदी हिस्सा ही अमेरिका से आयात करने की योजना बनाई थी। यह तीव्र बदलाव न केवल भारत की रणनीतिक सूझबूझ को दिखाता है, बल्कि वैश्विक झटकों से घरेलू अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने की भारत की बढ़ती क्षमता को भी रेखांकित करता है।

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एलपीजी आयात के मामले में अमेरिका का दबदबा अचानक कैसे बढ़ा?

इस वर्ष की शुरुआत में जब सरकार ने अमेरिका से अपनी एलपीजी आवश्यकता का 10 प्रतिशत आयात करने का स्वतंत्र फैसला लिया था, तब इसका हॉर्मुज जलडमरूमध्य के घटनाक्रमों से कोई सीधा संबंध नहीं था। उस समय नीति विश्लेषकों ने इस बात पर सवाल भी उठाए थे कि जब भारत के पास भौगोलिक रूप से अधिक नजदीक एलपीजी आपूर्तिकर्ता देश मौजूद हैं, तो इतनी दूर से आयात करने की क्या आवश्यकता है। लेकिन वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया वह स्वतंत्र फैसला आज बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ है। आज अमेरिका से होने वाला आयात देश की कुल आयातित एलपीजी जरूरतों का 67 फीसदी हिस्सा बन चुका है, जिसने भारतीय रसोई गैस आपूर्ति शृंखला को अत्यधिक लचीला और सुरक्षित बना दिया है।

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ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भारत की नई रणनीति क्या है?

भारत ने अब अपनी ऊर्जा सुरक्षा को केवल पारंपरिक हाइड्रोकार्बन (ईंधन) तक सीमित रखने के दशकों पुराने नजरिये को बदल दिया है। सरकार ने इस दिशा में एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया है, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

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  • आपूर्ति का विविवधीकरण: किसी एक भौगोलिक क्षेत्र पर निर्भर न रहकर विभिन्न विश्वसनीय वैश्विक भागीदारों के साथ मजबूत गठजोड़ बनाना।
  • मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर: घरेलू स्तर पर ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति के लिए टिकाऊ और लचीले बुनियादी ढांचे का निर्माण।
  • मजबूत रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार: वर्तमान में देश की पेट्रोलियम होल्डिंग क्षमता 74 दिनों से अधिक की हो चुकी है।
  • वैकल्पिक ईंधन और तकनीकी नवाचार: देश में वैकल्पिक ईंधनों और नई तकनीकों को प्राथमिकता दी जा रही है।

इस नीति का मुख्य लक्ष्य भारतीय नागरिकों को वैश्विक बाजार के बाहरी झटकों और कीमतों के उतार-चढ़ाव से पूरी तरह सुरक्षित रखना है।

वैश्विक संकटों के बीच भारतीय बाजारों पर क्या असर हुआ?

भारत इस समय दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता, तीसरा सबसे बड़ा आयातक और चौथा सबसे बड़ा रिफाइनिंग राष्ट्र है। इसके बावजूद भारत अपनी घरेलू मांग को संकटमुक्त रखने में पूरी तरह सफल रहा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण तब देखने को मिला जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बड़ा संकट खड़ा हुआ था। उस समय भी देश भर में मौजूद लगभग 1,07,000 रिटेल आउटलेट्स (पेट्रोल-डीजल पंप, सीएनजी स्टेशन और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन) में से एक भी आउटलेट खाली (ड्राई) नहीं हुआ था। यह नीतिगत स्तर पर भारत की तीन प्रमुख प्राथमिकताओं- सुलभता, वहनीयता और निरंतरता के सफल क्रियान्वयन को दर्शाता है।

रिफाइनिंग क्षमता और भावी मांग को लेकर क्या हैं संकेत?

वैश्विक स्तर पर जहां यूरोप जैसे विकसित देश प्रतिदिन अपनी लगभग 2,00,000 बैरल रिफाइनिंग क्षमता खो रहे हैं और कई छोटी रिफाइनरियां बंद हो रही हैं, वहीं भारत अपनी रिफाइनिंग क्षमता का लगातार विस्तार कर रहा है। तुलनात्मक रूप से देखें तो अमेरिका ने पिछले 50 वर्षों में एक भी नई ग्रीनफील्ड रिफाइनरी का निर्माण नहीं किया है। अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2030 से लेकर 2050 तक वैश्विक तेल मांग में होने वाली कुल बढ़ोतरी का लगभग 30 फीसदी हिस्सा अकेले भारत से आने की उम्मीद है। ऐसे में अमेरिकी एलपीजी का यह बड़ा योगदान भारतीय अर्थव्यवस्था को नई गति देने में मील का पत्थर साबित होगा।

अमेरिका से एलपीजी आयात में आया यह अप्रत्याशित उछाल और भारत की विस्तारित रिफाइनिंग क्षमता देश की आर्थिक और ऊर्जा नीति की बड़ी जीत है। भौगोलिक विविधता और रणनीतिक भंडारण के दम पर भारत ने खुद को वैश्विक आपूर्ति बाधाओं से सुरक्षित कर लिया है। आने वाले दशकों में ऊर्जा की बढ़ती मांग को संभालने के लिए भारत की यह तैयारी दुनिया के लिए एक नया मॉडल पेश करती है।

Amar Ujala Ltd published this content on August 07, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on August 07, 2026 at 14:14 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]