09/12/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/11/2026 19:26
डीमैट 2.0: कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में नए युग की शुरुआत, छोटे निवेशकों को फायदा; मिलेगा सुरक्षित निवेश का मौका
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डीमैट 2.0: कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में नए युग की शुरुआत, छोटे निवेशकों को फायदा; मिलेगा सुरक्षित निवेश का मौका?
बोनस डेस्क, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 12 Sep 2026 05:00 AM IST
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शेयर बाजार। - फोटो : अमर उजाला
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भारतीय पूंजी बाजार में एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के दौरान कॉरपोरेट बॉन्ड के टोकनीकरण पर आधारित पायलट प्रोजेक्ट डिमैट 2.0 की सफल लॉन्चिंग की है।
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आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा और सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय की मौजूदगी में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट पारंपरिक बॉन्ड बाजार की पूरी तस्वीर बदलने जा रहा है। अब तक कॉरपोरेट बॉन्ड जारी करने, खरीदने और उसके निपटान में 2 से 3 दिनों का लंबा वक्त लगता था और कई तरह के कागजी व मैन्युअल झंझट होते थे। लेकिन डीमैट 2.0 के आने से इस पूरी व्यवस्था को डिजिटल और बेहद चुस्त बना दिया गया है।
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क्या है डीमैट 2.0 और इसके फायदे
यह एक नया मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर है, जिसे कॉरपोरेट बॉन्ड जारी करने, रखने, ट्रेड करने और उनके निपटान के एक नए तरीके का परीक्षण करने के लिए विकसित किया गया है। अब तक बॉन्ड कागजों या पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में होते थे। डीमैट 2.0 के तहत बॉन्ड को डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी यानी एक सुरक्षित साझा डिजिटल बही-खाते पर एक डिजिटल टोकन के रूप में तैयार किया जाएगा। इस डिजिटल लेजर का मालिकाना हक डिपॉजिटरी के पास होगा। इस साझा लेजर पर बॉन्ड से जुड़ी सभी जानकारियां सभी अधिकृत संस्थानों को एक साथ और तुरंत दिखाई देंगी, जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश खत्म होगी।
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जारीकर्ता को बोली लगाने के दिन ही फंड प्राप्त होगा। अभी तक आमतौर पर बोली के बाद 2-3 दिन लगते थे।
स्वचालन के कारण जारीकर्ता के लिए जारी करने और सर्विसिंग की लागत कम होगी।
शामिल बाजार मध्यस्थों के लिए फाइल शेयरिंग, मिलान और सत्यापन का बोझ कम होगा
तत्काल निपटान के कारण निपटान जोखिम नहीं रहेगा।
सेकेंडरी मार्केट में निवेशकों को तुरंत फंड मिल जाता है, जिसमें पहले 2-3 दिन लगते थे।
जारीकर्ता को बोली लगाने के दिन ही फंड प्राप्त होगा। अभी तक आमतौर पर बोली के बाद 2-3 दिन लगते थे।
स्वचालन के कारण जारीकर्ता के लिए जारी करने और सर्विसिंग की लागत कम होगी।
शामिल बाजार मध्यस्थों के लिए फाइल शेयरिंग, मिलान और सत्यापन का बोझ कम होगा।
तत्काल निपटान के कारण निपटान जोखिम नहीं रहेगा।
सेकेंडरी मार्केट में निवेशकों को तुरंत फंड मिल जाता है, जिसमें पहले 2-3 दिन लगते थे।
तीन कंपनियों ने जारी किए 1,025 करोड़ टोकनयुक्त बॉन्ड
अब तक तीन कंपनियों ने 1,025 करोड़ रुपये के टोकनयुक्त बॉन्ड जारी किए हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की एनबीएफसी आरईसी लि. 7 सितंबर को 18 निवेशकों से 500 करोड़ रुपये जुटाकर पहली जारीकर्ता बनी। एलएंडटी लि. 9 सितंबर को 4 निवेशकों से 500 करोड़ जुटाकर दूसरी जारीकर्ता बनी। निजी एनबीएफसी, आईआईएफएल ने 9 सितंबर, को 1 निवेशक से 25 करोड़ रुपये जुटाए और तीसरा जारीकर्ता बना।
क्या नहीं बदलेगा? : निवेशकों के लिए सुरक्षा उपाय पहले की तरह ही रहेंगे। कानून में बॉन्ड वही साधन रहेगा, कंपनी की चुकती की जिम्मेदारी अपरिवर्तित रहेगी व निवेशकों के अधिकार अपरिवर्तित रहेंगे।
Amar Ujala Ltd published this content on September 12, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 12, 2026 at 01:27 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]