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07/30/2026 | Press release | Distributed by Public on 07/29/2026 18:56

Explainer: तीन राज्यों में क्यों हो रहे उपचुनाव? कहीं पार्टी अध्यक्ष, कहीं पूर्व गृह मंत्री की प्रतिष्ठा का सवाल

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Explainer: 3 राज्यों में क्यों हो रहे उपचुनाव? कहीं पार्टी अध्यक्ष, कहीं पूर्व गृह मंत्री की प्रतिष्ठा का सवाल

Thu, 30 Jul 2026 06:03 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 30 Jul 2026 06:03 AM IST
सार

आज तीन राज्यों की किन सीटों पर और क्यों उपचुनाव हैं? जिन सीटों पर मतदान है, वहां चुनावी इतिहास क्या रहा है? यहां किन-किन मुद्दों को लेकर राजनीति गर्म है? इसके अलावा चुनाव में कौन से दिग्गजों की किस्मत और रुतबा दांव पर लगा है? आइये जानते हैं...

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तीन सीटों पर उपचुनाव। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात में आज उपचुनाव हैं। तीनों ही राज्य मौजूदा समय में भाजपा शासित हैं और तीनों में ही जिन सीटों पर उपचुनाव होने जा रहा है, उन पर भी भाजपा का ही कब्जा रहा था। ऐसे में अब जहां भाजपा के सामने इन सीटों पर कब्जा बरकरार रखने की चुनौती है। दूसरी तरफ विपक्ष के लिए इन उपचुनावों में हाल ही में केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर उभरे कुछ विवादों का फायदा उठाने का भी मौका है। इन परिस्थितियों के बीच 30 जुलाई को होने वाले यह चुनाव काफी दिलचस्प हो गए हैं।
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर आज तीन राज्यों की किन सीटों पर और क्यों उपचुनाव हैं? जिन सीटों पर मतदान है, वहां चुनावी इतिहास क्या रहा है? यहां किन-किन मुद्दों को लेकर राजनीति गर्म है? इसके अलावा चुनाव में कौन से दिग्गजों की किस्मत और रुतबा दांव पर लगा है? आइये जानते हैं...
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पहले जानें- तीन राज्यों की किन सीटों पर हैं उपचुनाव?

30 जुलाई को तीन राज्यों की जिन सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं, उनमें बिहार की बांकीपुर, मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट शामिल है।
तीन सीटों पर उपचुनाव। - फोटो : अमर उजाला

क्यों हो रहे इन सीटों पर उपचुनाव?

बिहार की बांकीपुर सीट: इस सीट पर उपचुनाव इसलिए हो रहा है, क्योंकि यहां के विधायक नितिन नवीन, जो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, अप्रैल में राज्यसभा के लिए चुने गए थे। इसकी वजह से यह सीट खाली हो गई थी।

मध्य प्रदेश की दतिया सीट: यहां उपचुनाव इसलिए जरूरी हो गया, क्योंकि कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को धोखाधड़ी के एक मामले में दिल्ली की एक अदालत ने तीन साल की जेल की सजा सुनाई थी। इसके बाद अप्रैल में उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई थी।

गुजरात की मंजलपुर सीट: उपचुनाव भाजपा के आठ बार के विधायक और पूर्व मंत्री योगेश पटेल के निधन के कारण हो रहा है। लंबी बीमारी के बाद 2 जून को उनका निधन हो गया था।
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जिन सीटों पर मतदान होने हैं, वहां का चुनावी इतिहास क्या है?

बांकीपुर, बिहार
यह सीट भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ मानी जाती है। यहां से भाजपा के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव में नितिन नवीन ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की उम्मीदवार रेखा गुप्ता के मुकाबले करीब दोगुने वोट मिले थे। उन्होंने राजद प्रत्याशी को 50,000 से भी अधिक वोटों के भारी अंतर से हराया था।

दतिया, मध्य प्रदेश
पिछले चार विधानसभा चुनावों के नतीजों पर नजर डालें तो 2008 से 2018 तक भाजपा ने लगातार तीन बार जीत दर्ज की। हालांकि, हर चुनाव के साथ कांग्रेस का वोट प्रतिशत बढ़ता गया। 2018 में मुकाबला बेहद कांटे का रहा और 2023 में कांग्रेस ने भाजपा का 15 साल पुराना विजय अभियान रोक दिया। 2023 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस ने बाजी मारी थी। कांग्रेस के उम्मीदवार राजेंद्र भारती ने भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को 7,500 से अधिक मतों से हराया था। यही वजह है कि इस बार उपचुनाव में भी दोनों दलों के बीच कड़ी टक्कर की संभावना जताई जा रही है।
मंजलपुर, गुजरात
2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई इस सीट पर हमेशा से भाजपा का दबदबा रहा है। वडोदरा जिले के अंतर्गत आने वाली इस सीट पर भाजपा के दिवंगत नेता योगेश पटेल ने 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में यहां से लगातार जीत दर्ज की थी। इससे पहले वे 1990 से 2007 के बीच अविभाजित रावपुरा विधानसभा सीट से पांच बार जीते थे, और इस तरह उन्होंने गुजरात विधानसभा में 36 वर्षों के दौरान लगातार आठ बार जीत हासिल करने का रिकॉर्ड बनाया था।

2022 के विधानसभा चुनाव में उनकी जीत का अंतर कितना बड़ा था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि क्षेत्र में हुए कुल मतदान का तीन-चौथाई (75%) उनके पक्ष में पड़ा था। वहीं, बाकी एक-चौथाई वोट प्रतिशत कांग्रेस-आप और नोटा के बीच विभाजित हुआ था। उनकी जीत का अंतर ही एक लाख वोटों से अधिक था।

तीन राज्य की इन तीन सीटों पर उपचुनाव में इस बार कौन प्रत्याशी?

1. बांकीपुर, बिहार
2. दतिया, मध्य प्रदेश
3. मंजलपुर, गुजरात



* स्क्रूटनी के दौरान 'राइट टू रिकॉल पार्टी' के प्रत्याशी और दो निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज हो गए हैं, इसलिए इस सीट पर अब भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला रह गया है।

अब जानें- किस सीट पर क्या हैं इस बार मुद्दे?

1. बांकीपुर, बिहार

बांकीपुर उपचुनाव में इस बार मुख्य तौर पर छात्रों से जुड़े मुद्दे, शिक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था छाए हुए हैं।

नीट पेपर लीक और छात्र प्रदर्शन: पटना में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद नीट पेपर लीक विवाद इस उपचुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर को उम्मीद है कि नीट परीक्षा के पेपर लीक के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों, जिसके कारण केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा, से उन्हें इस चुनाव में राजनीतिक फायदा मिलेगा। प्रशांत किशोर लंबे समय से बिहार की शिक्षा प्रणाली में बदलाव की जरूरत पर जोर दे रहे हैं और इसे उन्होंने अपने चुनाव प्रचार का अहम हिस्सा बनाया है।

युवाओं के प्रदर्शन में सख्ती: दूसरी तरफ राजद नेता तेजस्वी यादव ने छात्र प्रदर्शनों के निर्मम दमन को लेकर केंद्र और राज्य की एनडीए सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने सीवान में पुलिस की तरफ से एके-47 के इस्तेमाल की घटना की न्यायिक जांच की मांग की है। विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों और अपने बड़े भाई तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी का भी उन्होंने कड़ा विरोध किया है। राजद ने वादा किया है कि सत्ता में आने पर वह गिरफ्तार छात्रों को 'जेपी सेनानियों' की तर्ज पर पेंशन देंगे।
तीन सीटों पर उपचुनाव। - फोटो : अमर उजाला
भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था: तेजस्वी यादव ने भाजपा पर भ्रष्टाचार और राम मंदिर चंदा चोरी के गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के कामकाज और राज्य की कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।

सरकार के खिलाफ असंतोष: प्रशांत किशोर लगातार मतदाताओं से अपील कर रहे हैं कि वे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जिन्हें नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद भाजपा आलाकमान ने मुख्यमंत्री के रूप में चुना था, के प्रति अपना असंतोष वोट के जरिए जाहिर करें।

भाजपा के तर्क-बचाव: इन मुद्दों के बीच बढ़ते चुनावी दबाव और छात्रों के गुस्से को देखते हुए, चुनाव से ठीक पहले बिहार सरकार ने नीट प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी मामले वापस लेने और जेल में बंद लोगों को रिहा करने का एलान भी किया। वहीं दूसरी तरफ भाजपा अपने मजबूत गढ़ और पिछले रिकॉर्ड पर भरोसा जता रही है, और उनका दावा है कि बांकीपुर की जनता का समर्थन हमेशा की तरह उनके साथ बना रहेगा।

2. दतिया, मध्य प्रदेश

दतिया विधानसभा उपचुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस ने अलग-अलग मुद्दों पर अपना चुनाव प्रचार केंद्रित किया है...

कांग्रेस के मुख्य चुनावी मुद्दे
  • कांग्रेस ने फसलों के नुकसान और खाद-उर्वरक की कथित कमी को लेकर किसानों की नाराजगी को अपना एक बड़ा चुनावी हथियार बनाया है। हाल ही में किसानों के भोपाल कूच ने भी कांग्रेस के इन आरोपों को बल दिया।
  • कांग्रेस का आरोप है कि राज्य में 27 फीसदी आरक्षण लागू न किए जाने की वजह से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय में आक्रोश है। कांग्रेस इस मुद्दे को लगातार उठा रही है। कांग्रेस नेता स्थानीय आदिवासी समुदायों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुलझाने का आश्वासन दे रहे हैं।
  • कांग्रेस ने भाजपा पर जनसमर्थन न होने के कारण चुनाव में धनबल और सरकारी मशीनरी के गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस का दावा है कि मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए क्षेत्र में लगभग 50 करोड़ रुपये लाए गए हैं।
  • इसके अलावा कांग्रेस ने दतिया उपचुनाव की घोषणा से पहले सीएम मोहन यादव के जमीन खरीद के मामले को जोर-शोर से उठाया। हालांकि, चुनाव के दौरान इस मुद्दे पर पार्टी अधिकतर चुप ही रही है।
भाजपा के चुनावी मुद्दे
  • भाजपा का सबसे मुख्य चुनावी मुद्दा विकास है। भाजपा नेताओं ने डबल-इंजन सरकार की नीतियों, सुशासन और जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दिया है।
  • सीएम मोहन यादव ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने को लेकर कांग्रेस की चुप्पी पर जमकर हमला बोला। साथ ही सभी समुदायों के लिए एक कानून लाने को उपलब्धि बताया है।
  • अपनी सरकार के विकास कार्यों को गिनाने के साथ-साथ, भाजपा ने कांग्रेस पर कई गुटों में बंटे होने और क्षेत्र में विभाजनकारी राजनीति करने का भी आरोप लगाया है।


3. मंजलपुर, गुजरात

गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में मुख्य तौर पर स्थानीय नागरिक समस्याएं और दिवंगत विधायक की विरासत प्रमुख चुनावी मुद्दे बने हुए हैं।

कांग्रेस के मुख्य चुनावी मुद्दे
  • कांग्रेस नेता अमित चावड़ा ने वडोदरा में भाजपा की ट्रिपल-इंजन सरकार पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं का आरोप लगाया है।
  • मानसून के दौरान शहर में जलभराव, खस्ताहाल सड़कें और खराब बुनियादी ढांचे को कांग्रेस ने बड़ा मुद्दा बनाया है। उनका दावा है कि सरकार की लापरवाही के कारण बाढ़ में लोगों को करोड़ों रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है।
  • कांग्रेस प्रत्याशी भीखाभाई रबारी अपने पिछले कार्यकाल (विधायक, मंत्री और पार्षद के रूप में) में किए गए विकास कार्यों और अपनी साफ-सुथरी छवि के आधार पर वोट मांग रहे हैं। कांग्रेस इस उपचुनाव को 2027 के विधानसभा चुनावों के 'रिहर्सल' के रूप में देख रही है।
भाजपा के मुख्य चुनावी मुद्दे
  • भाजपा इस चुनाव को मंजलपुर के आठ बार के दिवंगत विधायक योगेश पटेल की विरासत को आगे बढ़ाने के रूप में पेश कर रही है। भाजपा नेताओं का मुख्य आह्वान इस चुनाव को ऐतिहासिक मतों से जीतकर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देना है।
  • वडोदरा की सांस्कृतिक पहचान और महाशिवरात्रि की शिवजी की सवारी परंपरा भी इस उपचुनाव में भाजपा की ओर से मुद्दे के तौर पर उठाई गई। इस परंपरा को दिवंगत योगेश पटेल का संरक्षण हासिल था। पार्टी इस परंपरा को बनाए रखने पर जोर दे रही है।
  • पार्टी ने स्थानीय गुटबाजी को दरकिनार करते हुए एक बाहरी लेकिन साफ-सुथरी छवि वाले अनुभवी नेता सतीश पटेल को मैदान में उतारा है। भाजपा उनके प्रशासनिक और संगठनात्मक कौशल के जरिए चुनाव जीतने की रणनीति पर काम कर रही है।
Amar Ujala Ltd published this content on July 30, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on July 30, 2026 at 00:57 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]