Ministry of Heavy Industries of the Republic of India

03/25/2026 | Press release | Distributed by Public on 03/25/2026 03:30

संसद प्रश्न: भूकंप की संवेदनशीलता और जोखिम को कम करने के लिए उठाए गए कदम

पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय

संसद प्रश्न: भूकंप की संवेदनशीलता और जोखिम को कम करने के लिए उठाए गए कदम

प्रविष्टि तिथि: 25 MAR 2026 12:52PM by PIB Delhi

सरकार ने भविष्‍य में आने वाले भूकंपों को समझने के लिए देश में कई वैज्ञानिक अध्ययन किए हैं। ये अध्ययन मुख्य रूप से पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा अपने संबद्ध कार्यालय, राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के माध्यम से, अन्य वैज्ञानिक संस्थानों और शैक्षणिक संगठनों के सहयोग से किए जाते हैं।

वर्तमान में इन अध्ययनों में 169भूकंपीय वेधशालाओं वाले राष्ट्रीय भूकंपीय नेटवर्क (एनएसएन) के माध्यम से भूकंपीय गतिविधि की निरंतर निगरानी, ​​भूकंप स्रोत मापदंडों का विश्लेषण, भूकंपीय जोखिम आकलन और प्रमुख शहरों में सूक्ष्म क्षेत्रीकरण अध्ययन शामिल हैं। सरकार ने भूपर्पटी विरूपण, फॉल्ट मैपिंग, पुराभूकंप विज्ञान और भूकंप पूर्वसूचक अध्ययनों से संबंधित अनुसंधान परियोजनाओं को भी समर्थन दिया है।

सरकार ने भूकंप संबंधी अध्ययनों के लिए बजट में प्रावधान किए हैं। इन अध्ययनों को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की विभिन्न केंद्रीय क्षेत्र योजनाओं के तहत सहायता प्रदान की जाती है, जिनमें भूकंप विज्ञान और भूविज्ञान जैसे व्यापक कार्यक्रम और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की पृथ्वी योजना शामिल हैं। भूकंपीय नेटवर्क को मजबूत करने, अनुसंधान परियोजनाओं, सूक्ष्म क्षेत्रीकरण अध्ययनों और क्षमता निर्माण के लिए धनराशि आवंटित की जाती है।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन केंद्र (एनसीएस) ने भूकंप के जोखिम और संवेदनशीलता को कम करने के लिए सरकार की पहलों के तहत, राष्ट्रीय भूकंपीय नेटवर्क को मजबूत करने के लिए कदम उठाए हैं। इसके विस्तार और आधुनिकीकरण से हितधारकों और आम जनता तक भूकंप संबंधी जानकारी का प्रसार बेहतर होता है, जिससे भूकंप आपदा और जोखिम आकलन प्रतिक्रिया में सुधार होता है। इसके अलावा, एनसीएस ने भूकंप जोखिम आकलन और शमन योजना के लिए उच्च भूकंपीय क्षेत्रों में स्थित लक्षित शहरों का भूकंपीय जोखिम सूक्ष्म-क्षेत्रीकरण भी शुरू किया है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम) और राज्य सरकारों द्वारा क्षमता विकास, जन जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

पृथ्वी विज्ञान और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 25 मार्च 2026 को लोकसभा में यह जानकारी दी।

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पीके/केसी/जेके/वाईबी


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