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09/17/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/17/2026 08:03

एक्सप्लेनर: रूसी तेल खरीदारों पर 100% टैरिफ लगाने की अमेरिका की क्या चाल, भारत पर कब से और कितना हो सकता है असर

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एक्सप्लेनर: रूसी तेल खरीदारों पर 100% टैरिफ लगाने की अमेरिका की क्या चाल, भारत पर कब से-कितना हो सकता है असर?

Thu, 17 Sep 2026 04:35 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 17 Sep 2026 04:35 PM IST
सार

अमेरिकी संसद में रूसी तेल खरीदारों पर 100% टैरिफ लगाने की शक्ति राष्ट्रपति को देने वाला विधेयक पारित। जानें भारत के निर्यात, ऊर्जा सुरक्षा और पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर क्या पड़ेगा असर।

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अमेरिका की टैरिफ से भारत को निशाना बनाने की कोशिश। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

अमेरिकी संसद के निचले सदन- प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) ने बुधवार को रूस से तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक आयात शुल्क लगाने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी। उच्च सदन- सीनेट में पहले ही पारित हो चुके इस विधेयक को अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भेजा जाएगा, जहां ट्रंप अपनी मर्जी के हिसाब से रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगा सकते हैं। माना जा रहा है कि अगर ट्रंप इस विधेयक पर हस्ताक्षर करते हैं तो चीन और भारत जैसे रूसी तेल के बड़े खरीदारों को अमेरिका के 100 फीसदी आयात शुल्क का सामना करना पड़ेगा। यानी भारत से अमेरिका निर्यात होने वाले अधिकतर उत्पादों पर 100 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लग जाएगा।
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर जिस विधेयक को अमेरिकी संसद ने पारित कर दिया है, उसके प्रावधान क्या हैं? अगर डोनाल्ड ट्रंप इस पर हस्ताक्षर कर देते हैं तो भारत पर इस विधेयक के प्रावधानों का क्या असर होगा? क्या इससे भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है? इसके अलावा केंद्र सरकार ने अमेरिका के इस कदम पर अब तक क्या कहा है? आइये जानते हैं...
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पहले जानें- क्या है अमेरिकी संसद में मंजूर हुआ 100% टैरिफ वाला विधेयक?

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अमेरिका में रूस के तेल पर प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक पारित। - फोटो : अमर उजाला

इस विधेयक के जरिए क्या करना चाहता है अमेरिका?

अमेरिका इस विधेयक के जरिए यूक्रेन युद्ध के बीच रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों पर आर्थिक दबाव बढ़ाना चाहता है। इसका मकसद रूस की ओर से प्रतिबंधों को पार करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले शैडो फ्लीट (गोपनीय टैंकरों के बेड़े) पर लगाम कसना है।
  • यह विधेयक अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100% तक आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का कानूनी अधिकार देता है।
  • विधेयक में एक संशोधन के तहत रूसी ऊर्जा खरीदने वाले 10 देशों को चिह्नित किया गया है। इनमें भारत, चीन, यूएई, तुर्किये, सिंगापुर, स्लोवाकिया, हंगरी, कजाखस्तान, किर्गिस्तान और अजरबैजान शामिल हैं।
  • यह कानून किसी देश पर तुरंत 100% टैरिफ लागू नहीं करता, बल्कि यह राष्ट्रपति को टैरिफ का फैसला करने और जरूरत पड़ने पर छूट देने का अधिकार भी देता है।
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भारत के लिए इस विधेयक को मंजूरी मिलने के क्या मायने होंगे?

1. 100% टैरिफ का जोखिम और निर्यात पर असर
  • यह विधेयक अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से कच्चा तेल खरीदने के एवज में भारत से आने वाले उत्पादों पर 100% तक टैरिफ लगाने का कानूनी अधिकार देता है।
  • विधेयक मंजूर होने पर अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद काफी महंगे हो जाएंगे, जिससे भारतीय निर्यातकों को आर्थिक नुकसान झेला पड़ सकता है।
अदिति नायर ने एक मीडिया संस्थान से बातचीत में बताया विधेयक का संभावित असर। - फोटो : अमर उजाला
2. ऊर्जा सुरक्षा और तेल आयात का संकट
  • भारत अपनी कच्चा तेल जरूरतों का 88% से ज्यादा आयात करता है। वित्त वर्ष 2026 में भारत ने रूस से 40.8 अरब डॉलर का कच्चा तेल खरीदा, जो उसके कुल तेल आयात का लगभग 30.3% था। जुलाई 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर कुल आयात का 51% तक पहुंच गया था।
  • पश्चिम एशिया में तनाव और आपूर्ति रुकावटों के बीच रूसी तेल भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए सबसे मजबूत जरिया रहा है। अगर भारत को रूसी तेल बंद या कम करना पड़ता है, तो उसे अमेरिका, वेनेजुएला जैसे देशों से महंगा तेल खरीदना पड़ेगा, जिससे देश का आयात बिल बढ़ जाएगा।

3. द्विपक्षीय व्यापार वार्ता में दबाव बनाने का हथियार
  • यह विधेयक खुद से 100% टैरिफ लागू नहीं करता, बल्कि यह राष्ट्रपति को यह तय करने और जरूरत पड़ने पर छूट देने का मनमर्जी का अधिकार देता है।
  • अमेरिका इस कानून का इस्तेमाल भारत पर दबाव बनाने और द्विपक्षीय व्यापार समझौते को थोपने या रियायतें हासिल करने के लिए औजार के तौर पर कर सकता है।

ये भी पढ़ें: रूस पर शिकंजा कसने वाला बिल अमेरिकी संसद से पास: भारत-चीन पर 100% तक टैरिफ का खतरा; क्या है मामला?
अमेरिकी टैरिफ की आशंकाओं पर जीटीआरआई संस्थापक अजय श्रीवास्तव। - फोटो : अमर उजाला
जीटीआरआई के अजय श्रीवास्तवर के मुताबिक, "भारत 1.4 अरब लोगों के लिए किफायती ऊर्जा सुरक्षित करने के लिए रूसी तेल खरीदता है, न कि युद्ध का वित्तपोषण करने के लिए। इन खरीदारियों ने वैश्विक आपूर्ति और कीमतों को स्थिर करने में मदद की है। हालांकि, वॉशिंगटन अब 100% तक टैरिफ लगाने की धमकी देगा और फिर अगर भारत रूसी तेल की खरीदारी कम करता है और असमान व्यापार समझौते के तहत रियायतें स्वीकार करता है, तो अमेरिका इसके बाद अपने उत्पादों पर कम दर रखने का भी दबाव बनाएगा। भारत को अस्थायी टैरिफ राहत के लिए अपनी ऊर्जा सुरक्षा का सौदा नहीं करना चाहिए।"


क्या भारत में बढ़ जाएंगी पेट्रोल-डीजल की कीमतें?

अमेरिकी कानून पारित होने या रूसी तेल पर प्रतिबंध लगने से भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तुरंत या किसी निश्चित दर से बढ़ोतरी नहीं होगी। हालांकि, लंबी अवधि में खुदरा कीमतों पर असर हो सकता है। इसकी तीन अहम वजहें हैं...
वजह-1: अगर अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़े पैमाने पर रूसी तेल की खरीद बंद हो जाती है तो दुनिया भर में कच्चे तेल की कुल आपूर्ति घट जाएगी। आपूर्ति तंग होने से वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड के दाम उछल सकते हैं, जिससे भारत का कुल तेल आयात बिल बढ़ेगा।

वजह-2: इतना ही नहीं भारत को रूसी तेल के विकल्प के लिए अमेरिका, अफ्रीका और पश्चिम एशिया पर निर्भरता और बढ़ानी होगी, जहां पहले ही युद्ध की वजह से तेल की सप्लाई ठप है। ऐसे में भारत को तेल के लिए अतिरिक्त कीमत चुकानी पड़ सकती है।

वजह-3: नए आपूर्तिकर्ताओं से तेल मंगाने पर लॉजिस्टिक्स, माल भाड़ा, बीमा और डॉलर के मुकाबले रुपये का घटता एक्सचेंज रेट भी रिफाइनरियों की तेल-गैस खरीद लागत को बढ़ा सकता है।
हालांकि, अगर सरकार चाहे तो उपभोक्ताओं को कुछ समय के लिए पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों से बचा भी सकती है। दरअसल, खुदरा दरें केवल कच्चे तेल की लागत से तय नहीं होतीं, बल्कि इनमें केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी), राज्यों का वैल्यू ऐडेड टैक्स (वैट), डीलर कमीशन और रिफाइनरी मार्जिन शामिल होते हैं।
  • अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं, तो भारत सरकार उत्पाद शुल्क में कटौती करके या सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां अपने मार्जिन में समायोजन करके उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले बोझ को रोक सकती हैं।
  • उदाहरण के लिए, मार्च 2026 में जब वैश्विक क्रूड 70 डॉलर से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया था, तब सरकार ने उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती कर खुदरा कीमतों को स्थिर रखा था।
रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक का क्या होगा असर। - फोटो : अमर उजाला
Amar Ujala Ltd published this content on September 17, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 17, 2026 at 14:03 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]