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09/25/2026 | Press release | Distributed by Public on 09/24/2026 14:38

भविष्य की जंग में कौन बचेगा?: फ्रंट से रियर तक खत्म हुआ सेफ जोन, सीडीएस बोले- दुश्मन मिनटों में कर देगा ढेर

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भविष्य की जंग में कौन बचेगा?: फ्रंट से रियर तक खत्म हुआ सेफ जोन, सीडीएस बोले- दुश्मन मिनटों में कर देगा ढेर

Fri, 25 Sep 2026 01:57 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Fri, 25 Sep 2026 01:57 AM IST
सार

सीडीएस जनरल एन एस राजा सुब्रमणि के मुताबिक, भविष्य के युद्ध में कोई इलाका पूरी तरह सुरक्षित नहीं रहेगा। ड्रोन, AI, डेटा और नेटवर्क युद्ध का स्वरूप बदल रहे हैं, इसलिए भारत को एक साथ कई मोर्चों और कई क्षेत्रों में संघर्ष की तैयारी करनी होगी।

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सीडीएस एन एस राजा सुब्रमणि - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एन एस राजा सुब्रमणि ने गुरुवार को कहा कि किसी भी संघर्ष की स्थिति में अब कोई जगह सुरक्षित नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि भारत एक समय में सिर्फ एक युद्ध की तैयारी नहीं कर सकता, क्योंकि भविष्य के युद्ध एक साथ कई मोर्चों पर और जमीन, समुद्र, हवा, अंतरिक्ष, साइबर, इलेक्ट्रॉनिक व सूचना जैसे कई क्षेत्रों में लड़े जाएंगे।

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युद्ध का मैदान अब सीमा तक सीमित नहीं
दिल्ली में एक रक्षा सम्मेलन में जनरल सुब्रमणि ने कहा कि आज का युद्धक्षेत्र पहले के मुकाबले ज्यादा पारदर्शी, जुड़ा हुआ और कई स्तरों पर चुनौतीपूर्ण हो गया है। लगातार निगरानी के कारण छिपना मुश्किल हो रहा है। उनका कहना था कि अगर किसी लक्ष्य का पता चल गया तो उसे निशाना बनाने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। अब आगे के मोर्चे और पीछे के सुरक्षित इलाकों का पुराना फर्क भी खत्म हो रहा है। युद्ध सीमा से आगे बढ़कर देश के भीतर तक असर डाल सकता है और इसमें केवल सैनिक ही नहीं, पूरा देश प्रभावित होता है।
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ड्रोन ने बदली युद्ध की तस्वीर
CDS ने रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि ड्रोन के इस्तेमाल ने पारंपरिक युद्ध की तस्वीर बदल दी है। अब किसी लक्ष्य का पता लगाने और उस पर हमला करने के बीच का समय लगातार घट रहा है। सेंसर लक्ष्य को देखता है, एल्गोरिदम उसकी पहचान करता है, नेटवर्क जानकारी पहुंचाता है और जमीन या हवा में मौजूद सैनिक कुछ ही मिनटों या सेकंडों में कार्रवाई कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अब कोई सुरक्षित रियर नहीं है और संघर्ष की स्थिति में कहीं भी पूरी तरह सुरक्षित जगह नहीं मानी जा सकती।
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सस्ते हथियार से महंगे लक्ष्य पर नजर
जनरल सुब्रमणि ने कहा कि युद्ध की अर्थव्यवस्था भी बदल रही है। अपेक्षाकृत सस्ता ड्रोन किसी बेहद महंगे और महत्वपूर्ण लक्ष्य का पता लगा सकता है। इसलिए भारत सिर्फ एक तरह के युद्ध की तैयारी नहीं कर सकता। भविष्य में कई मोर्चे एक साथ सक्रिय हो सकते हैं और ऐसे हालात में जो पक्ष तेजी से सीखकर अपनी रणनीति और तकनीक को बदल पाएगा, उसके पास मुकाबले में बढ़त बनाने की क्षमता होगी।

'BUILD' से बताया भविष्य की तैयारी का तरीका
CDS ने अपने विजन को 'BUILD' के पांच सूत्रों में बताया। इसमें 'B' का मतलब Battlefield यानी बदलते युद्धक्षेत्र से, 'U' का मतलब युद्ध की बदलती अर्थव्यवस्था को समझने से, 'I' का मतलब तकनीक, डेटा और उद्योग के एकीकरण से, 'L' का मतलब Learning and Adaptation यानी तेजी से सीखने और बदलने से और 'D' का मतलब Delivery at Scale यानी बड़े पैमाने पर तेजी से उत्पादन और आपूर्ति करने की क्षमता से है। उन्होंने कहा कि यही भारत की रक्षा तैयारियों को भविष्य के युद्धक्षेत्र से जोड़ने वाली कड़ी है।

समुद्र, साइबर और अंतरिक्ष पर भी नजर
जनरल सुब्रमणि ने भारतीय सशस्त्र बलों के लिए मानवरहित तकनीक पर भी जोर दिया। उन्होंने Unmanned Surface Vessels और Unmanned Underwater Vessels पर ध्यान बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत के सामने महाद्वीपीय और समुद्री सुरक्षा के साथ-साथ अंतरिक्ष, साइबर, इलेक्ट्रॉनिक और सूचना युद्ध की चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा कि 21वीं सदी में राष्ट्रीय सुरक्षा का दायरा बढ़ गया है और सीमाएं तय होने के बावजूद खतरों की सीमाएं लगातार बदल रही हैं।

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हथियार कितना आधुनिक है से ज्यादा जरूरी है कितनी जल्दी बनता है
CDS ने कहा कि भविष्य में रक्षा उद्योग का आकलन सिर्फ इस बात से नहीं होगा कि वह कितने अत्याधुनिक हथियार बना सकता है। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि वह उन्हें कितनी तेजी से और कम लागत में बना सकता है, मौजूदा प्रणालियों में कितनी जल्दी बदलाव कर सकता है और लंबे समय तक उनकी आपूर्ति बनाए रख सकता है। उन्होंने कहा कि नेटवर्क को आपस में जुड़ना होगा, डेटा तेजी से पहुंचना होगा और सिस्टम को एक-दूसरे के साथ काम करना होगा। कमांडरों तक सिर्फ सूचना पहुंचाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही जानकारी सही व्यक्ति तक सही समय पर पहुंचनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को AI के प्रदर्शन से आगे बढ़कर उसे वास्तविक युद्धक क्षमता में बदलने की जरूरत है।
Amar Ujala Ltd published this content on September 25, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on September 24, 2026 at 20:39 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]