01/25/2026 | Press release | Distributed by Public on 01/25/2026 00:26
मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार।
साल 2026का यह पहला 'मन की बात' है। कल 26 जनवरी को हम सभी 'गणतंत्र दिवस' का पर्व मनाएंगे। इसी दिन हमारा संविधान लागू हुआ था। 26जनवरी का ये दिन हमें अपने संविधान निर्माताओं को नमन करने का अवसर देता है। आज 25जनवरी का दिन भी बहुत अहम है। आज 'National Voters' Day'है 'मतदाता दिवस' है। मतदाता ही लोकतंत्र की आत्मा होता है।
साथियो,
आमतौर पर जब कोई 18साल का हो जाता है, मतदाता बन जाता है तो उसे जीवन का एक सामान्य पड़ाव समझा जाता है। लेकिन, दरअसल ये अवसर किसी भी भारतीय के जीवन का बहुत बड़ा milestoneहोता है। इसलिए बहुत जरूरी है कि हम देश में वोटर बनने का, मतदाता बनने का, उत्सव मनाएं। जैसे हम जन्मदिन पर शुभकामनाएं देते हैं और उसे celebrate करते हैं, ठीक वैसे ही, जब भी कोई युवा पहली बार मतदाता बने तो पूरा मोहल्ला, गाँव या फिर शहर एकजुट होकर उसका अभिनंदन करे और मिठाइयाँ बांटी जाएं। इससे लोगों में voting के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। इसके साथ ही यह भावना और सशक्त होगी कि एक वोटर होना कितना मायने रखता है।
साथियो,
देश में जो भी लोग चुनावी प्रक्रिया से जुड़े रहते हैं, जो हमारे लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखने के लिए जमीनी स्तर पर काम करते हैं, मैं उन सभी की बहुत सराहना करना चाहूँगा। आज 'मतदाता दिवस' पर मैं अपने युवा साथियों से फिर आग्रह करूंगा कि वे 18साल का होने पर voter के रूप में खुद को जरूर register करें। संविधान ने हर नागरिक से जिस कर्त्तव्य भावना के पालन की अपेक्षा रखी है इससे वो अपेक्षा भी पूरी होगी और भारत का लोकतंत्र भी मजबूत होगा।
मेरे प्यारे देशवासियो,
इन दिनों मैं social media पर एक interesting trend देख रहा हूँ। लोग साल 2016 की अपनी यादों को फिर से ताजा कर रहे हैं। उसी भावना के साथ, आज मैं भी आपके साथ अपनी एक memory को share करना चाहता हूँ। दस साल पहले, जनवरी 2016में हमने एक ambitious journey की शुरुआत की थी। तब हमें इस बात का एहसास था कि भले ही ये एक छोटा क्यों ना हो ये, लेकिन ये युवा-पीढ़ी के लिए, देश के future के लिये, काफी अहम है। तब कुछ लोग ये समझ ही नहीं पाए थे कि ये आखिर है क्या ? साथियो, मैं जिस journey की बात कर रहा हूँ, वह है start-up India की journey। इस अद्भुत journey के heroesहमारे युवा साथी हैं। अपने comfort zone से बाहर निकलकर उन्होंने जो innovation किए, वो इतिहास में दर्ज हो रहे हैं।
साथियो,
भारत में आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा start-ups ecosystem बन चुका है। ये start-ups लीक से हट के हैं। आज, वे, ऐसे sectors में काम कर रहे हैं, जिनके बारे में 10साल पहले तक कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। AI, Space, Nuclear Energy,Semi Conductors, Mobility, Green Hydrogen, Biotechnology आप नाम लीजिए और कोई न कोई भारतीय Start-upउस sectorमें काम करते हुए दिख जाएगा। मैं अपने उन सभी युवा-साथियों को salute करता हूँ जो किसी-न-किसी Start-up से जुड़े हैं या फिर अपना Start-up शुरू करना चाहते हैं|
साथियो,
आज 'मन की बात' के माध्यम से मैं देशवासियों, विशेषकर industryऔर Start-up से जुड़े युवाओं से एक आग्रह जरूर करना चाहता हूँ। भारत की economy तेजी से आगे बढ़ रही है। भारत पर दुनिया की नजरें हैं। ऐसे समय में हम सब पर एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी है। वो जिम्मेदारी है - qualityपर जोर देने की। होती है, चलती है, चल जाएगा, यह युग चला गया। आइए इस वर्ष हम पूरी ताकत से quality को प्राथमिकता दें। हम सबका एक ही मंत्र हो quality, qualityऔर सिर्फ quality. कल से आज बेहतर quality. हम जो भी manufacture कर रहे हैं, उसकी qualityको बेहतर बनाने का संकल्प लें। चाहे हमारे textiles हों, technology हो या फिर electronics even packaging, Indian product का मतलब ही बन जाए - Top quality.आइए, excellence को हम अपना bench mark बनाएं। हम संकल्प लें quality में ना कोई कमी होगी, ना quality से कोई समझौता होगा और मैंने तो लाल किले से कहा था 'Zero defect - Zero effect'.ऐसा करके ही हम विकसित भारत की यात्रा को तेजी से आगे ले जा पाएंगे।
मेरे प्यारे देशवासियो,
हमारे देश के लोग बहुत innovative हैं। समस्याओं का समाधान ढूँढना हमारे देशवासियों के स्वभाव में है। कुछ लोग ये काम start-ups के जरिये करते हैं, तो कुछ लोग समाज की सामूहिक शक्ति से रास्ता निकालने का प्रयास करते हैं। ऐसा ही एक प्रयास उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में सामने आया है। यहाँ से होकर गुजरने वाली तमसा नदी को लोगों ने नया जीवन दिया है। तमसा केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की सजीव धारा है। अयोध्या से निकलकर गंगा में समाहित होने वाली यह नदी कभी इस क्षेत्र के लोगों के जन-जीवन की धुरी हुआ करती थी, लेकिन प्रदूषण की वजह से इसकी अविरल धारा में रुकावट आने लगी थी। गाद, कूड़ा-कचरा और गंदगी ने इस नदी के प्रवाह को रोक दिया था। इसके बाद यहाँ के लोगों ने इसे एक नया जीवन देने का अभियान शुरू किया। नदी की सफाई की गई और उसके किनारों पर छायादार, फलदार पेड़ लगाए गए। स्थानीय लोग कर्तव्य भावना से इस काम में जुटे और सबके प्रयास से नदी का पुनरुद्धार हो गया।
साथियो,
जन-भागीदारी का ऐसा ही प्रयास आंध्र-प्रदेश के अनंतपुर में भी देखने को मिला है। यह वह क्षेत्र है जो सूखे की गम्भीर समस्या से जूझता रहा है। यहाँ की मिट्टी, लाल और बलुई है। यही वजह है कि लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ता है। यहां के कई क्षेत्रों में लंबे समय तक बारिश नहीं होती है। कई बार तो लोग अनंतपुर की तुलना रेगिस्तान में सूखे की स्थिति से भी कर देते हैं।
साथियो,
इस समस्या के समाधान के लिये स्थानीय लोगों ने जलाशयों को साफ करने का संकल्प लिया। फिर प्रशासन के सहयोग से यहाँ 'अनंत नीरू संरक्षणम प्रोजेक्ट' इसकी शुरुआत हुई। इस प्रयास के तहत 10से अधिक जलाशयों को जीवन दान मिला है। उन जलाशयों में अब पानी भरने लगा है। इसके साथ ही 7000 से अधिक पेड़ भी लगाए गए हैं। यानि अनंतपुर में जल संरक्षण के साथ-साथ green cover भी बढ़ा है। यहाँ बच्चे अब तैराकी का आनंद भी ले सकते हैं। एक प्रकार से कहें तो यहाँ का पूरा ecosystem फिर से निखर उठा है।
साथियो,
आजमगढ़ हो, अनंतपुर हो, या फिर देश की कोई और जगह, ये देखकर खुशी होती है कि लोग एकजुट होकर कर्तव्य भाव से बड़े संकल्प सिद्ध कर रहे हैं। जन-भागीदारी और सामूहिकता की यही भावना हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत है।
मेरे प्यारे देशवासियो,
हमारे देश में भजन और कीर्तन सदियों से हमारी संस्कृति की आत्मा रहे हैं। हमने मंदिरों में भजन सुने हैं, कथा सुनते वक्त सुने हैं और हर दौर ने भक्ति को अपने समय के हिसाब से जिया है। आज की पीढ़ी भी कुछ नए कमाल कर रही है। आज के युवाओं ने भक्ति को अपने अनुभव और अपनी जीवन-शैली में ढाल दिया है। इसी सोच से एक नया सांस्कृतिक चलन उभरकर सामने आया है। आपने social media पर ऐसे video जरूर देखे होंगे। देश के अलग-अलग शहरों में बड़ी संख्या में युवा इकट्ठा हो रहे हैं। मंच सजा होता है, रोशनी होती है, संगीत होता है, पूरा ताम-झाम होता है और माहौल किसी concert से जरा भी कम नहीं होता है। ऐसा ही लग रहा है कि जैसे कोई बहुत बड़ा concert हो रहा है, लेकिन वहाँ जो गाया जा रहा होता है वो पूरी तन्मयता के साथ, पूरी लगन के साथ, पूरी लय के साथ भजन की गूंज। इस चलन को आज 'भजन clubbing'कहा जा रहा है और यह खासतौर पर Genz के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह देखकर अच्छा लगता है कि इन आयोजनों में भजन की गरिमा और शुचिता का पूरा ध्यान रखा जाता है। भक्ति को हल्केपन में नहीं लिया जाता। ना शब्दों की मर्यादा टूटती है और ना ही भाव की। मंच आधुनिक हो सकता है, संगीत की प्रस्तुति अलग हो सकती है, लेकिन मूल भावना वही रहती है। अध्यात्म का एक निरंतर प्रवाह वहाँ अनुभव होता है।
मेरे प्यारे देशवासियो,
आज हमारी संस्कृति और त्योहार दुनिया भर में अपनी पहचान बना रहे हैं। दुनिया के हर कोने में भारत के त्योहार बड़े उत्साह और उल्लास के साथ मनाए जाते हैं। हर तरह की cultural vibrancy को बनाए रखने में हमारे भारतवंशी भाई-बहनों का अहम योगदान है। वो जहां भी है वहाँ अपनी संस्कृति की मूल भावना को संरक्षित कर और उसे आगे बढ़ा रहे हैं। इसको लेकर मलेशिया में भी हमारा भारतीय समुदाय बहुत सराहनीय कार्य कर रहा है। आपको यह जानकर सुखद आश्चर्य होगा कि मलेशिया में 500से ज्यादा तमिल स्कूल हैं। इनमें तमिल भाषा की पढ़ाई के साथ ही अन्य विषयों को भी तमिल में पढ़ाया जाता है। इसके अलावा यहां तेलुगु और पंजाबी सहित अन्य भारतीय भाषाओं पर भी बहुत focus रहता है।
साथियो,
भारत और मलेशिया के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने में एक society की बड़ी भूमिका है। इसका नाम है 'Malaysia India Heritage Society'। अलग-अलग कार्यक्रमों के साथ ही, यह संस्था एक heritage walk का भी आयोजन करती है। इसमें दोनों देशों को आपस में जोड़ने वाले सांस्कृतिक स्थलों को cover किया जाता है। पिछले महीने मलेशिया में 'लाल पाड़ साड़ी' iconic walk इसका आयोजन किया गया। इस साड़ी का बंगाल की हमारी संस्कृति से विशेष नाता रहा है। इस कार्यक्रम में सबसे अधिक संख्या में इस साड़ी को पहनने का record बना, जिसे Malaysian Book of Records में दर्ज किया गया। इस मौके पर ओडिसी dance और baul music ने तो लोगों का दिल जीत लिया। मैं कह सकता हूँ -
साया बरबांगा/ देंगान डीयास्पोरा इंडिया/दि मलेशिया //
मेरेका मम्बावा/इंडिया दान मलेशिया/सेमाकिन रापा //
(हिन्दी अनुवाद - मुझे मलेशिया में भारतीय प्रवासियों पर गर्व है, भारत और मलेशिया को वो और करीब ला रहे हैं।)
मलेशिया के हमारे भारतवंशियों को मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
मेरे प्यारे देशवासियो,
हम भारत के किसी भी हिस्से में चले जाएँ, वहाँ हमें कुछ-न-कुछ असाधारण, अभूतपूर्व होते हुए जरूर दिख जाता है। कई बार Media की चकाचौंध में ये बातें जगह नहीं बना पातीं। लेकिन इनसे पता चलता है कि हमारे समाज की असली शक्ति क्या है ? इनसे हमारे उन Value Systems की भी झलक मिलती है, जिनमें एकजुटता की भावना सर्वोपरि है। गुजरात में बेचराजी के चंदनकी गाँव की परंपरा अपने आप में अनूठी है। अगर मैं आपसे कहूँ कि यहां के लोग, विशेषकर बुजुर्ग, अपने घरों में खाना नहीं बनाते तो आपको हैरत होगी। इसकी वजह गाँव का शानदार Community kitchen। इस Community kitchen में एक साथ पूरे गाँव का सबका खाना बनता है और लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं। बीते 15 वर्षों से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है। इतना ही नहीं, यदि कोई व्यक्ति बीमार है तो उसके लिए Tiffin Service भी उपलब्ध है, यानि home delivery का भी पूरा इंतजाम है। गाँव का यह सामूहिक भोजन लोगों को आनंद से भर देता है। ये पहल न केवल लोगों को आपस में जोड़ती है, बल्कि इससे पारिवारिक भावना को भी बढ़ावा मिलता है।
साथियो,
भारत की परिवार व्यवस्था - Family Systemहमारी परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। दुनिया के कई देशों में इसे बहुत कौतूहल के साथ देखा जाता है। कई देशों में ऐसे family system को लेकर बहुत सम्मान का भाव है। कुछ ही दिन पहले ही मेरे Brother U.A.E. के राष्ट्रपति महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान भारत आए थे। उन्होंने मुझे बताया कि U.A.E. साल 2026को year of family के रूप में मना रहा है। मकसद ये कि वहाँ के लोगों के बीच सौहार्द और सामुदायिक भावना और मजबूत हो, वाकई ये बहुत ही सराहनीय पहल है।
साथियो,
जब परिवार और समाज की ताकत मिलती है, तो हम बड़ी-से-बड़ी चुनौतियों को परास्त कर सकते हैं। मुझे अनंतनाग के शेखगुन्ड गाँव के बारे में जानकारी मिली है। यहां drugs,तंबाकू, सिगरेट और शराब से जुड़ी चुनौतियाँ काफी बढ़ गई थी। इन सबको देखकर यहां के मीर जाफ़र जी इतना परेशान हुए कि उन्होंने इस समस्या को दूर करने की ठान ली। उन्होंने गाँव के युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी को एकजुट किया। उनकी इस पहल का असर कुछ ऐसा रहा कि वहाँ की दुकानों ने तंबाकू उत्पादों को बेचना ही बंद कर दिया। इस प्रयास से Drugsके खतरों को लेकर भी लोगों में जागरूकता बढ़ी है।
साथियो,
हमारे देश में ऐसी अनेक संस्थाएं भी हैं, जो वर्षों से निस्वार्थ भाव से समाज सेवा में जुटी हैं। जैसे एक संस्था है पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर के फरीदपुर में। इसका नाम है 'विवेकानंद लोक शिक्षा निकेतन'। ये संस्था पिछले चार दशक से बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल में जुटी है। गुरुकुल पद्धति की शिक्षा और teachersकी trainingके साथ ही यह संस्था समाज कल्याण के कई नेक कार्यों में जुटी है। मेरी कामना है कि निस्वार्थ सेवा का यह भाव देशवासियों के बीच निरंतर और अधिक सशक्त होता रहे।
मेरे प्यारे देशवासियो,
'मन की बात' में हम निरंतर स्वच्छता के विषय को उठाते रहे हैं। मुझे ये देखकर गर्व होता है हमारे युवा अपने आसपास की स्वच्छता को लेकर बहुत सजग हैं। अरुणाचल प्रदेश में हुए एक ऐसे ही अनूठे प्रयास के बारे में मुझे जानकारी मिली है। अरुणाचल वो धरती है जहां देश में सबसे पहले सूर्य की किरणें पहुँचती है। यहां लोग 'जय हिन्द' कहकर एक-दूसरे का अभिवादन करते हैं। यहां ईटानगर में युवाओं का समूह उन हिस्सों की सफाई के लिए एकजुट हुआ, जिन पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत थी। इन युवाओं ने अलग-अलग शहरों में सार्वजनिक स्थलों की साफ-सफाई को अपना missionबना लिया। इसके बाद ईटानगर, नाहरलागुन, दोईमुख, सेप्पा, पालिन और पासीघाट वहाँ भी ये अभियान चलाया गया। ये युवा अब तक करीब 11लाख किलो से अधिक कचरे की सफाई कर चुके हैं। सोचिए दोस्तो, नौजवानों ने मिलकर के 11लाख किलो कूड़ा-कचरा हटाया।
साथियो,
एक और उदाहरण असम का है। असम के नागांव में वहाँ की पुरानी गलियों से लोग भावनात्मक रूप से जुड़े हैं यहां कुछ लोगों ने अपनी गलियों को मिलकर साफ करने का संकल्प लिया। धीरे-धीरे उनके साथ और लोग जुडते गए। इस तरह एक ऐसी टीम तैयार हो गई, जिसने गलियों से बहुत सारा कचरा हटा दिया। साथियो, ऐसा ही एक प्रयास बेंगलुरु में हो रहा है। बेंगलुरु में sofa waste एक बड़ी समस्या बनकर सामने आया है इसलिए कुछ professionals एकजुट होकर इस issueको अपने तरीके से solveकर रहे हैं।
साथियो,
आज कई शहरों में ऐसी टीमें हैं, जो landfill wasteकी recyclingमें जुटी हैं। चेन्नई में ऐसी ही एक teamने बहुत बेहतरीन काम किया है। ऐसे उदाहरणों से पता चलता है कि स्वच्छता से जुड़ा हर प्रयास कितना अहम है। हमें स्वच्छता के लिए व्यक्तिगत तौर पर या फिर टीम के तौर पर अपने प्रयास बढ़ाने होंगे, तभी हमारे शहर और बेहतर बनेंगे।
मेरे प्यारे देशवासियो,
जब पर्यावरण सरंक्षण की बात होती है, तो अक्सर हमारे मन में बड़ी योजनाएं, बड़े अभियान और बड़े-बड़े संगठन की बातें आती हैं। लेकिन कई बार बदलाव की शुरुआत बहुत साधारण तरीके से होती है। एक व्यक्ति से, एक इलाके से, एक कदम से और लगातार की गई छोटी-छोटी कोशिशों से भी बड़े बदलाव आते हैं। पश्चिम बंगाल के कूच बिहार के रहने वाले बेनॉय दास जी का प्रयास इसी का उदाहरण है । पिछले कई वर्षों से उन्होंने अपने जिले को हरा-भरा बनाने का काम अकेले दम पर किया है । बेनॉय दास जी ने हजारों पेड़ लगाए हैं । कई बार पौधे खरीदने से लेकर उन्हें लगाने और देख-भाल करने का सारा खर्च खुद ने उठाया है । जहां जरूरत पड़ी, वहाँ स्थानीय लोगों, छात्रों और नगर निकायों के साथ मिलकर काम किया । उनके प्रयासों से सड़कों के किनारे हरियाली और बढ़ गई है ।
साथियो,
मध्य प्रदेश में पन्ना जिले के जगदीश प्रसाद अहिरवार जी, उनका प्रयास भी बहुत ही सराहनीय है । वो जंगल में beat-guardके रूप में अपनी सेवाएं देते हैं । एक बार गश्त के दौरान उन्होंने महसूस किया कि जंगल में मौजूद कई औषधीय पौधों की जानकारी कहीं भी व्यवस्थित रूप से दर्ज नहीं है । जगदीश जी, ये जानकारी अगली पीढ़ी तक पँहुचाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने, औषधीय पौधों की पहचान करना और उनका record बनाना शुरू किया । उन्होंने सवा-सौ से ज्यादा औषधीय पौधों की पहचान की । हर पौधे की तस्वीर, नाम, उपयोग और मिलने के स्थान की जानकारी जुटाई । उनकी जुटाई गई जानकारी को वन विभाग ने संकलित किया और किताब के रूप में प्रकाशित भी किया। इस किताब में दी गई जानकारी अब researcher,छात्रों और वन अधिकारियों के बहुत काम आ रही है।
साथियो,
पर्यावरण संरक्षण की यही भावना आज बड़े स्तर पर भी दिखाई दे रही है। इसी सोच के साथ देशभर में 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान से आज करोड़ों लोग जुड़ चुके हैं। अब तक देश में 200करोड़ से ज्यादा पेड़ लगाए भी जा चुके हैं। ये बताता है कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर अब लोग ज्यादा जागरूक हैं, और किसी-ना-किसी रूप में अपना योगदान देना चाहते हैं।
मेरे प्यारे देशवासियो,
मैं आप सभी की एक और बात के लिए बहुत सराहना करना चाहता हूँ - वजह है milletsयानि श्रीअन्न। मुझे ये देखकर खुशी है कि श्रीअन्न के प्रति देश के लोगों का लगाव निरंतर बढ़ रहा है। वैसे तो हमने 2023को millet yearघोषित किया था। लेकिन आज तीन साल बाद भी इसको लेकर देश और दुनिया में जो passionऔर commitment है, वो बहुत उत्साहित करने वाला है।
साथियो,
तमिलनाडु के कल्ल-कुरिची जिले में महिला किसानों का एक समूह प्रेरणा स्त्रोत बन गया है। यहाँ के 'Periyapalayam millet' FPC से लगभग 800महिला किसान जुड़ी हैं। Millets की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए इन महिलाओं ने Millet Processing Unit की स्थापना की। अब वो millets से बने उत्पादों को सीधे बाजार तक पहुंचा रही है ।
साथियो,
राजस्थान के रामसर में भी किसान श्रीअन्न को लेकर innovationकर रहे हैं। यहाँ के Ramsar Organic Farmer Producer Company से 900से अधिक किसान जुड़े हैं। ये किसान मुख्य रूप से बाजरे की खेती करते हैं। यहाँ बाजरे को process करके ready to eat लड्डू तैयार किया जाता है। इसकी बाजार में बड़ी मांग है। इतना ही नहीं साथियों, मुझे तो ये जानकर खुशी होती है, आजकल कई मंदिर ऐसे हैं, जो अपने प्रसाद में सिर्फ millets का उपयोग करते हैं। मैं उन मंदिर के सभी व्यवस्थापकों का हृदय से अभिनंदन करता हूं, उनकी इस पहल के लिए।
साथियो,
Millets श्रीअन्न से अन्नदाताओं की कमाई बढ़ने के साथ ही लोगों की health में भी सुधार की guarantee बनता जा रहा है। Millets पोषण से भरपूर होते हैं, super-food होते हैं। हमारे देश में सर्दियों का मौसम तो खानपान के लिए बहुत ही अच्छा माना जाता है। ऐसे में इन दिनों हमें श्रीअन्न का सेवन जरूर करना चाहिए।
मेरे प्यारे देशवासियो,
'मन की बात' में हमें एक बार फिर कई अलग-अलग विषयों पर चर्चा करने का अवसर मिला। यह कार्यक्रम हम सभी को अपने देश की उपलब्धियों को महसूस करने और celebrate करने का अवसर देता है। फरवरी में ऐसा ही एक और अवसर आ रहा है। अगले महीने India AI Impact Summit होने जा रही है। इस Summit में दुनियाभर से, विशेषकर Technology के क्षेत्र से जुड़े Expert भारत आएंगे। यह सम्मेलन AI की दुनिया में भारत की प्रगति और उपलब्धियों को भी सामने लाएगा। मैं इसमें शामिल होने वाले हर किसी का हृदय से अभिनंदन करता हूं। अगले महीने 'मन की बात' में India AI Impact Summit पर हम जरूर बात करेंगे। देशवासियों की कुछ अन्य उपलब्धियों की भी चर्चा करेंगे । तब तक के लिए मुझे 'मन की बात' में विदा दीजिए। कल के गणतंत्र दिवस के लिए एक बार फिर आप सभी को मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।
धन्यवाद।
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MJPS/VJ/VK