Amar Ujala Ltd

08/13/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/12/2026 22:18

कावेरी विवाद पर कर्नाटक बंद: कन्नड़ संगठनों का राज्यव्यापी प्रदर्शन, तमिलनाडु से बस सेवा जारी

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कावेरी विवाद पर कर्नाटक बंद: कन्नड़ संगठनों का राज्यव्यापी प्रदर्शन, तमिलनाडु से बस सेवा जारी

Thu, 13 Aug 2026 09:34 AM IST
निर्मल कांत एएनआई, बंगलूरू
एएनआई, बंगलूरू Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 13 Aug 2026 09:34 AM IST
सार

कावेरी जल विवाद को लेकर कर्नाटक में कन्नड़ संगठनों ने राज्यव्यापी बंद बुलाया है। कोप्पल में कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया है, वहीं बंगलूरू में सुरक्षा बढ़ा दी गई। उधर, तमिलनाडु से सरकारी बसों का कर्नाटक में प्रवेश जारी है। पढ़िए रिपोर्ट-

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कर्नाटक में राज्यव्यापी बंद - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एक्स/डीसीपी व्हाइटफील्ड
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विस्तार

दक्षिण भारत के दो राज्यों कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी के पानी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कर्नाटक में कन्नड़ संगठनों ने राज्यव्यापी बंद बुलाया है। राज्य के कोप्पल में कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। वहीं, तमिलनाडु से चलने वाली सरकारी बसें होसुर शहर के रास्ते कर्नाटक में प्रवेश कर रही हैं।
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कावेरी जल विवाद को लेकर कर्नाटक ओक्कुटा संगठन के प्रदेश अध्यक्ष वटाल नागराज के नेतृत्व में कई कन्नड़ समर्थक संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं। कोप्पल में प्रदर्शन कर रहे लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। कर्नाटक में बंद के चलते बंगलूरू समेत कई जगहों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। बंगलूरू पुलिस ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है, ताकि बंद के दौरान किसी तरह की अप्रिय घटना न हो।
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वहीं, तमिलनाडु में स्थिति अलग है। मेकेदातु बांध के मुद्दे पर कन्नड़ संगठनों के एक दिन के बंद के बावजूद तमिलनाडु की सरकारी बसें होसुर के रास्ते कर्नाटक के लिए चल रही हैं।
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क्या है कावेरी जल विवाद?
कावेरी नदी कर्नाटक से निकलकर तमिलनाडु होते हुए बंगाल की खाड़ी में मिलती है। दोनों राज्यों के बीच दशकों से इस बात को लेकर विवाद रहा है कि नदी का पानी किस अनुपात में बांटा जाए। इस विवाद के समाधान के लिए कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया गया था और बाद में कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण बनाया गया, जो जरूरत के अनुसार पानी छोड़ने के निर्देश देता है। हालांकि, कम बारिश या जलाशयों में पानी कम होने की स्थिति में यह मुद्दा अक्सर फिर से विवाद का कारण बन जाता है।

अब तमिलनाडु के सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले से यह मामला एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। अदालत के अगले कदम और दोनों राज्यों के रुख पर पूरे विवाद की दिशा निर्भर करेगी।

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने क्या कहा ?
पिछले हफ्ते कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस मुद्दे पर एक सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता की थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि सरकार और वह खुद कावेरी मामले में राज्य के लोगों और किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।

उन्होंने कहा था कि हर परिस्थिति में राज्य के हितों की सुरक्षा की जाएगी। डीके शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक अभी भी सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहा है। राज्य में अनुमानित बारिश का केवल करीब 30-35 फीसदी ही बारिश हुई है। उन्होंने किसानों से अपील की थी कि जब तक सरकार दिशा-निर्देश जारी नहीं करती, तब तक वे धैर्य बनाए रखें।

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मुख्यमंत्री ने कहा था कि कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने राज्य को 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया है। उन्होंने बताया कि कबिनी जलाशय में 24 हजार क्यूसेक पानी आ रहा है, जबकि कृष्णा राजा सागर (केआरएस) जलाशय में 22 हजार क्यूसेक पानी की आवक हो रही है। उन्होंने कहा कि कल दोपहर बांध की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जलाशय से पानी छोड़ा गया।

डीके शिवकुमार ने कहा कि सभी दलों ने सरकार के इस फैसले का सर्वसम्मति से समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जब भाजपा नेताओं ने केआरएस बांध का दौरा किया तो उन्होंने भी स्थिति को समझा। मुख्यमंत्री ने कहा था कि वह सभी कन्नड़ संगठनों से बात करेंगे। उन्होंने संगठनों से बंद का आयोजन न करने की अपील की थी।
Amar Ujala Ltd published this content on August 13, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on August 13, 2026 at 04:18 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]