08/11/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/11/2026 10:02
उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (एमडीओएनईआर) के सहयोग से रसायन और संबद्ध उत्पाद निर्यात संवर्धन परिषद (केमेक्सिल) ने अगरवुड तेल के क्षेत्र में भारत की संभावनाओं और निर्यात पर एक उद्योग शिखर सम्मेलन आज नई दिल्ली में आयोजित किया। इस शिखर सम्मेलन ने फ्रेग्रन्स, एसेंशियल-ऑयल, परफ्यूमरी, अगरबत्ती, प्रसंस्करण और निर्यात उद्योग के प्रतिनिधियों, वैज्ञानिक संस्थानों, नीति-निर्माताओं और नियामक एजेंसियों को एक मंच प्रदान किया, ताकि भारतीय अगरवुड (विशेष रूप से उत्तर-पूर्वी क्षेत्र से) के व्यावसायिक अवसरों और निर्यात पर चर्चा की जा सके।
इस शिखर सम्मेलन में उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार, एमडीओएनईआर के सचिव श्री कतिकिथला श्रीनिवास, एमडीओएनईआर के संयुक्त सचिव श्री अंगशुमन डे, एमएसएमई मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुश्री मर्सी एपाओ, केमेक्सिल के अध्यक्ष श्री सतीश वाघ और उद्योग जगत के अन्य विशेषज्ञ व प्रमुख शामिल हुए।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के "यही समय है, सही समय है" के दृष्टिकोण के अनुरूप उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने उद्योग जगत के प्रमुखों और विशेषज्ञों से आगे आने और अगरवुड क्षेत्र में निवेश करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि उद्योग जगत को आगे आना चाहिए, निवेश करना चाहिए, अत्याधुनिक एक्सट्रैक्शन और डिस्टिलेशन तकनीक को अपनाना चाहिए। साथ ही विश्वस्तरीय ब्रांड बनाने चाहिए और वैश्विक स्तर पर व्यापारिक साझेदारियां करनी चाहिए।
श्री मजूमदार ने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण की सराहना की, जिसमें "वोकल फॉर लोकल" से "लोकल टू ग्लोबल" पर जोर दिया गया है।
उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय के सचिव श्री के. श्रीनिवास ने अपने संबोधन में भारतीय अगरवुड और ऊद तेल के निर्यात, वैश्विक बाज़ार के रुझानों व गुणवत्ता मानकों को बेहतर बनाने के साझा उद्देश्य के लिए सभी हितधारकों के एकजुट होने की सराहना की। उन्होंने आगे कहा कि उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय भारतीय अगरवुड तेल उद्योग की क्षमता, इसकी स्थिरता और वैश्विक पहुंच को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस कार्यक्रम के दौरान, उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री अंगशुमन डे ने उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय के माननीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया का संदेश पढ़कर सुनाया, जिसमें अगरवुड क्षेत्र के विकास के लिए उनके दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला गया।
अपने संदेश में, श्री सिंधिया ने उद्योग भागीदारों से पांच विशिष्ट अनुरोध किए। पहला, एफपीओ और क्लस्टर-आधारित संगठनों के साथ दीर्घकालिक बाजार संपर्क बनाएं, ताकि उत्पादकों को सुनिश्चित मांग का भरोसा मिल सके। दूसरा, वहीं निवेश करें जहां संसाधन उपलब्ध हों। उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में प्रोसेसिंग और डिस्टिलेशन की अधिक क्षमता यह सुनिश्चित करेगी कि किसानों और समुदायों को अधिक लाभ और अवसर मिलें। तीसरा, गुणवत्ता, पैदावार और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बेहतर बनाने के लिए एडवांस्ड एक्सट्रैक्शन, डिस्टिलेशन और वैज्ञानिक खेती के क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी साझेदारी को मजबूत करें। चौथा, मानकों, प्रमाणन, ट्रैसेबिलिटी और ओरिजिन ब्रांडिंग के माध्यम से भारतीय अगरवुड के लिए एक मजबूत पहचान बनाएं, जिससे उत्पादकों को इस असाधारण संसाधन का उचित मूल्य मिल सके। पांचवां, भारतीय ऊद में निवेश करें। हमारा अगरवुड उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की विरासत, ज्ञान को संजोए हुए है और आजीविका से जुड़ा हुआ है।
मंत्री महोदय ने यह भी कहा कि हमारा उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए। उत्तर-पूर्वी क्षेत्र को वैश्विक लक्ज़री बाज़ारों के लिए केवल कच्चे माल का आपूर्तिकर्ता ही नहीं बने रहना चाहिए, बल्कि इसे भारतीय अगरवुड का उद्गम, मानक, विज्ञान और ब्रांड बनना चाहिए।
उन्होंने सभी उद्योग और संस्थागत भागीदारों से उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में एक मजबूत, टिकाऊ और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी अगरवुड इकोसिस्टम बनाने के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया, जिससे उत्पादकों को अधिक लाभ मिले, साथ ही भारतीय ऊद की सुगंध दुनिया भर के बाजारों तक पहुंचे और यह सुनिश्चित हो कि "खुशबू भी हमारी हो, और नाम भी हमारा।"
भारत के 96 प्रतिशत से अधिक अगरवुड के पेड़ उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में पाए जाते हैं-
अगरवुड, एक्विलारिया प्रजाति की एक बहुत कीमती, खुशबूदार और रालयुक्त लकड़ी है। इसे मुख्य रूप से अगरवुड चिप्स और अगर ऑयल में प्रोसेस किया जाता है, जिनका उपयोग परफ्यूम, अगरबत्ती और अन्य प्रीमियम उत्पाद बनाने में होता है। भारत में अनुमानित 139.89 मिलियन अगरवुड के पेड़ हैं, जिनमें से लगभग 96.6 प्रतिशत पेड़ उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में हैं। अकेले असम में लगभग 114.3 मिलियन पेड़ हैं, इसके बाद त्रिपुरा में लगभग 15.15 मिलियन पेड़ हैं। साथ ही मणिपुर, नागालैंड, मेघालय और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में भी ये संसाधन उपलब्ध हैं। वैश्विक स्तर पर, खाड़ी देशों के बाज़ारों में अगरवुड की काफी मांग है, जबकि यूरोप, अमेरिका और पूर्वी एशिया में भी प्रीमियम फ्रेग्रन्स और अन्य उच्च-मूल्य वाले उत्पादों में इसका उपयोग बढ़ रहा है।
इस क्षेत्र पर बढ़ती नीतिगत प्राथमिकता, केंद्रीय बजट 2026-27 में अगर के पेड़ों को बढ़ावा देने के लिए मिली मान्यता और जून 2026 में आयोजित 73वें एनईसी पूर्ण सत्र में लक्षित निर्यात संवर्धन पर दिए गए जोर से स्पष्ट होती है।
उत्तर-पूर्वी क्षेत्र से अगरवुड के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए रोडमैप जारी
इस शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण उत्तर-पूर्वी क्षेत्र से अगरवुड के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए रोडमैप जारी करना था। यह रोडमैप निर्यात को सुविधाजनक बनाने, बाजार संबंधों को मजबूत करने और अगरवुड तथा इसके उत्पादों के नियमित, अनुपालन-युक्त और उच्च-मूल्य वाले व्यापार को बढ़ावा देने के लिए संबंधित सरकारी एजेंसियों, पूर्वोत्तर राज्यों, निर्यात संवर्धन परिषदों और अन्य हितधारकों को शामिल करते हुए समन्वित कार्यकलापों के लिए एक केंद्रित रूपरेखा प्रदान करता है।
उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय, उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में अगरवुड क्षेत्र के विकास के लिए संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों, पूर्वोत्तर राज्यों की सरकारों, वैज्ञानिक संस्थानों और निर्यात-संवर्धन एजेंसियों को एक साथ लाने में समन्वय और सहयोग की भूमिका निभा रहा है। मंत्रालय ने नवंबर 2023 में एक अंतर-मंत्रालयी कार्य बल का गठन किया, जिसकी सिफारिशों को उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में अगरवुड को बढ़ावा देने के लिए एक विस्तृत रोडमैप में बदला गया। इसके बाद, फरवरी 2025 में एक अगरवुड संचालन समूह का गठन किया गया, ताकि नियामक सुविधा, संसाधन विकास, प्रौद्योगिकी, अवसंरचना और बाजार तक पहुंच के मामलों में समन्वित कार्यकलापों के लिए एक स्थायी तंत्र सुनिश्चित किया जा सके।
अनुमोदित रोडमैप और पूर्वोत्तर राज्यों की सरकारों व तकनीकी संस्थानों (आईसीएफआरई-आरएफआरआईI, एफएफडीसी, एनआईपीईआर, एनईएसएसी) के बीच तालमेल से कई अहम कदम उठाए गए हैं। इनमें अगरवुड के निर्यात कोटा को बढ़ाना, 'सर्टिफिकेट ऑफ़ ओरिजिन' का डिजिटलीकरण, खास अगरवुड उत्पादों को व्यक्तिगत रूप से ले जाने की सुविधा, असम और त्रिपुरा में रिसोर्स मैपिंग, प्रमाणित इनोक्युलम सप्लायर्स को सूचीबद्ध करना, और अगरवुड तेल के लिए जीआई पंजीकरण व मानक विकसित करना शामिल है। साथ ही, उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय ने पीएम डिवाइन के तहत असम और त्रिपुरा में अगरवुड क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट और एनईसी की योजनाओं के तहत अगरतला में अगरवुड इंटरनेशनल ट्रेड एंड रिसर्च सेंटर के माध्यम से मूल्यवर्धन और मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया है।
मई 2026 में अगरवुड एक्सपोर्ट प्रमोशन सेल का गठन किया गया। इसमें वाणिज्य मंत्रालय के संबंधित विभाग और नामित निर्यात संवर्धन परिषदों- केमेक्सिल और शेफेक्सिल - को शामिल किया गया, ताकि निर्यात को बढ़ावा देने, निर्यातकों की मदद करने और बाजार के विकास पर केंद्रित कार्यकलाप किए जा सके।
इस शिखर सम्मेलन और निर्यात संवर्धन रोडमैप जारी करने का उद्देश्य इस क्षेत्र को समन्वित सरकारी सुविधा से लेकर उत्तर-पूर्वी क्षेत्र से अगरवुड निर्यात संवर्धन के लिए निरंतर उद्योग-आधारित बाजार विकास की दिशा में अगले चरण में ले जाना है।
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