Amar Ujala Ltd

10/17/2026 | Press release | Distributed by Public on 10/17/2026 12:04

महाराष्ट्र: मनोज जरांगे के आंदोलन वाले गांव की बदलेगी तस्वीर, पंकजा मुंडे ने लिया गोद; अधिकारियों से क्या कहा

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महाराष्ट्र: मनोज जरांगे के आंदोलन वाले गांव की बदलेगी तस्वीर, पंकजा मुंडे ने लिया गोद; अधिकारियों से क्या कहा?

Sat, 17 Oct 2026 11:17 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sat, 17 Oct 2026 11:17 PM IST
सार

महाराष्ट्र की मंत्री पंकजा मुंडे ने सूखे से प्रभावित जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव को गोद लिया है। यह गांव मनोज जरांगे पाटिल के मराठा आरक्षण आंदोलन के कारण चर्चा में रहा है। जिले के 154 गांव सूखे की चपेट में हैं। किसानों को फसल बीमा का लाभ, पानी की बेहतर आपूर्ति और परामर्श कार्यक्रम देने के निर्देश दिए गए हैं। क्या इन कदमों से गांव और किसानों को राहत मिलेगी? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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सूखे से जूझ रहे अंतरवाली सराटी गांव को मंत्री पंकजा मुंडे ने लिया गोद - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

महाराष्ट्र में सूखे की मार झेल रहे गांवों की मदद के लिए सरकार ने कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में राज्य की मंत्री पंकजा मुंडे ने जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव को गोद लिया है। यह गांव मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल के अनशन और विरोध प्रदर्शनों के कारण चर्चा में रहा है। अब गांव के विकास, बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने और किसानों को राहत देने पर जोर दिया जाएगा।
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अंतरवाली सराटी गांव जालना जिले की अंबड तहसील में स्थित है। यहां सूखे की स्थिति को देखते हुए पंकजा मुंडे ने सरकार के 'गांव गोद लेने के अभियान' के तहत इसे चुना है। जिले में कुल 154 गांव सूखे की चपेट में हैं। शुक्रवार को जिला संरक्षक मंत्री पंकजा मुंडे की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में सूखे से निपटने और सरकारी योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने पर चर्चा हुई। उन्होंने अधिकारियों को किसानों को राहत देने और गांवों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
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पंकजा मुंडे ने अंतरवाली सराटी गांव को क्यों चुना?
अंतरवाली सराटी गांव मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल के अनशन और विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा है। अब सूखे की समस्या के बीच यह गांव विकास योजनाओं के कारण चर्चा में है। पंकजा मुंडे ने इसे गोद लेकर यहां बुनियादी सुविधाएं बेहतर बनाने और किसानों की मदद करने पर जोर दिया है। अधिकारियों को अगले महीने गांव का दौरा करने और विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में गांव के लिए किसी विशेष बजट या विकास कार्यों की निश्चित समयसीमा का उल्लेख नहीं है।
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जालना जिले में सूखे की स्थिति कितनी गंभीर है?
जालना जिले के कुल 154 गांव सूखे से प्रभावित हैं। ऐसी स्थिति में किसानों की फसल, पानी की उपलब्धता और रोजमर्रा की जरूरतें अहम हो जाती हैं। पंकजा मुंडे ने अधिकारियों से कहा कि सरकारी योजनाओं को सही तरीके से लागू किया जाए, ताकि जरूरतमंद लोगों को समय पर लाभ मिल सके। समीक्षा बैठक में सूखे के प्रभाव को कम करने के उपायों पर चर्चा हुई। गांवों में पानी की उपलब्धता और किसानों को राहत पहुंचाने के लिए प्रशासन की भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया है।

किसानों को फसल बीमा का पूरा लाभ दिलाने के लिए क्या निर्देश दिए गए?
पंकजा मुंडे ने अधिकारियों को फसल बीमा के दावों में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को बीमा योजना का अधिकतम लाभ मिलना चाहिए। सूखे की स्थिति में फसल को नुकसान होने पर बीमा से मिलने वाली सहायता किसानों के लिए अहम हो सकती है। इसी वजह से दावों की जांच और प्रक्रिया में पारदर्शिता रखने पर जोर दिया गया। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसानों के दावों का निपटारा सही जानकारी के आधार पर हो और सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचे।

पानी बचाने और टैंकरों से आपूर्ति की निगरानी के लिए क्या कदम उठेंगे?
पंकजा मुंडे ने पानी के संरक्षण को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। उन्होंने पीने के पानी की आपूर्ति को सबसे पहले सुनिश्चित करने और टैंकरों से पानी बांटने की निगरानी जीपीएस तकनीक से करने को कहा। इसके अलावा नदियों और नालों को गहरा करने के काम करने पर जोर दिया। उन्होंने सरकार के पानी के इस्तेमाल में 10 प्रतिशत कटौती के आदेशों को प्रभावी तरीके से लागू करने की बात कही। साथ ही पीने योग्य पानी का इस्तेमाल निर्माण कार्यों में नहीं करने देने का निर्देश दिया। इन कदमों का उद्देश्य सीमित जल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना है।

सूखे से परेशान किसानों का तनाव कम करने के लिए क्या योजना है?
पंकजा मुंडे ने सूखे से प्रभावित किसानों के मानसिक तनाव को कम करने पर भी ध्यान देने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को गांव स्तर पर परामर्श और संवाद कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि किसानों का मनोबल बढ़ाया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने लोगों से सूखे के दौरान सामूहिक विवाह आयोजित करने की अपील की। इसका उद्देश्य कठिन परिस्थितियों में सामाजिक सहयोग को बढ़ावा देना और परिवारों पर पड़ने वाले खर्च का बोझ कम करने में मदद करना है। अब इन निर्देशों को जमीन पर लागू करना प्रशासन के सामने अहम जिम्मेदारी होगी।
Amar Ujala Ltd published this content on October 17, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on October 17, 2026 at 18:04 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]