08/13/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/13/2026 05:33
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लॉगिन करेंभारतीय कॉरपोरेट जगत के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित समूह टाटा संस में नए शीर्ष नेतृत्व की तलाश का बिगुल बज चुका है। टाटा संस के वर्तमान चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल अगले साल फरवरी 2027 में समाप्त होने जा रहा है। उनकी ओर से आगे कार्यकाल न संभालने के फैसले का एलान करने के बाद, अब समूह के सबसे बड़े शेयरधारक टाटा ट्रस्ट्स ने उनका उत्तराधिकारी चुनने के लिए एक औपचारिक चयन समिति बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस फैसले के साथ ही पिछले कई महीनों से चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को लेकर बनी अनिश्चितता की स्थिति पूरी तरह से समाप्त हो गई है।
टाटा ट्रस्ट्स ने एक बयान जारी कर बताया है कि टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड के अध्यक्ष एन चंद्रशेखरन ने पुनर्नियुक्ति से इन्कार कर दिया है। उनका वर्तमान कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त हो रहा है। चंद्रशेखरन ने नामित निदेशकों को ईमेल के जरिये यह निर्णय बताया। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) ने उनके इस निर्णय का सम्मान किया है। ट्रस्ट ने पिछले एक दशक में टाटा संस और टाटा समूह के प्रति उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने समूह में महत्वपूर्ण परिवर्तन, विकास और रूपांतरण में अमूल्य योगदान दिया। ट्रस्ट ने उनके नेतृत्व के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के न्यासियों ने एक प्रस्ताव पारित किया है। इसके तहत नए अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए चयन समिति बनेगी। यह समिति टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के अनुसार काम करेगी।
ट्रस्ट ने यथाशीघ्र चयन समिति के गठन की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। टाटा संस को इस प्रक्रिया में पूर्ण समर्थन दिया जाएगा। इसका उद्देश्य सुचारु, समयबद्ध और व्यवस्थित नेतृत्व परिवर्तन सुनिश्चित करना है। यह परिवर्तन टाटा संस और टाटा समूह के मूल्यों के अनुरूप होगा। साथ ही, यह समूह के दीर्घकालिक हितों को भी ध्यान में रखेगा।
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे बोर्डरूम के भीतर हुआ एक बड़ा असंतोष मुख्य वजह बनकर उभरा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से चंद्रशेखरन के कार्यकाल को और पांच वर्षों के लिए बढ़ाने की सिफारिश की थी। इसके बाद टाटा संस की नामांकन और पारिश्रमिक समिति (एनआरसी) और निदेशक मंडल ने भी इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया था। लेकिन जब इस प्रस्ताव को 24 फरवरी को टाटा संस बोर्ड के सामने रखा गया, तो एक निदेशक (बोर्ड सदस्य) ने इसका समर्थन नहीं किया। सर्वसम्मति न होने के कारण चंद्रशेखरन ने इस फैसले को टालने का निर्णय लिया। छह महीने बीतने के बाद भी जब इस पर कोई आम सहमति नहीं बन पाई, तो उन्होंने बोर्ड को सूचित कर दिया कि वे दोबारा नियुक्ति के लिए खुद को पेश नहीं करेंगे और बोर्ड जल्द ही उत्तराधिकार की प्रक्रिया शुरू करे।
एन चंद्रशेखरन का नेतृत्व टाटा समूह के इतिहास में बड़े बदलाव और शानदार वित्तीय प्रगति का काल रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में टाटा समूह का कुल राजस्व 13.3 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। उनके कार्यकाल के दौरान न केवल समूह के मुनाफे में बड़ी वृद्धि हुई, बल्कि इसकी बाजार हिस्सेदारी में भी भारी उछाल आया है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने समूह में उनके इस ऐतिहासिक योगदान को स्वीकार करते हुए कहा है, "हम समूह में इस बड़े बदलाव, विकास और कायाकल्प के दौर में उनके अथाह योगदान के लिए उन्हें धन्यवाद देते हैं"। ट्रस्ट ने नेतृत्व परिवर्तन के इस दौर में टाटा संस को सुचारू और व्यवस्थित संक्रमण सुनिश्चित करने के लिए अपना पूरा समर्थन देने का वादा किया है।
टाटा समूह इस समय अपने इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण संक्रमण के दौर से गुजर रहा है। जो भी नया चेयरमैन कमान संभालेगा, उसे उन विशाल परियोजनाओं और निवेशों को आगे बढ़ाना होगा जो चंद्रशेखरन के समय शुरू हुए थे। नए नेतृत्व के सामने निम्नलिखित प्रमुख कार्य और चुनौतियां होंगी:
एन चंद्रशेखरन 20 फरवरी 2027 तक टाटा संस के चेयरमैन पद पर बने रहेंगे। इस बीच, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट द्वारा चयन समिति का गठन करना नए उत्तराधिकारी को खोजने की दिशा में पहला ठोस कदम है। यह चयन समिति अगले कुछ महीनों में टाटा समूह के मूल्यों और दीर्घकालिक हितों के अनुरूप नए वैश्विक नेता की खोज को अंतिम रूप देगी, ताकि फरवरी 2027 में होने वाला नेतृत्व परिवर्तन बिना किसी व्यवधान के पूरा हो सके।