Amar Ujala Ltd

08/25/2026 | Press release | Distributed by Public on 08/24/2026 18:59

Explainer: अयोध्या में मछली भोज पर बवाल, पहले कब सियासी हथियार बना मांसाहार, देश में नॉन-वेजिटेरियन कितने

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Explainer: अयोध्या में मछली भोज पर बवाल, पहले कब सियासी हथियार बना मांसाहार, देश में नॉन-वेजिटेरियन कितने?

Tue, 25 Aug 2026 06:12 AM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Tue, 25 Aug 2026 06:12 AM IST
सार

अयोध्या में कथित मछली भोज ने एक बार फिर राजनीति में खान-पान और धार्मिक भावनाओं को लेकर बहस छेड़ दी है। इससे पहले भी नेताओं के मांसाहारी भोजन से जुड़े मामले राजनीतिक विवाद का कारण बन चुके हैं। इस पूरे विवाद में एक ओर धार्मिक भावनाओं का सवाल उठ रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे समुदाय की परंपरा और खान-पान की पसंद से जोड़कर देखा जा रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं।

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क्यों हो रहा विवाद? - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

अयोध्या में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के स्वागत कार्यक्रम में कथित मछली भोज को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सावन और एकादशी के दिन हुए इस आयोजन पर संत समाज ने आपत्ति जताई है, जबकि अजय राय ने इसे निषाद समाज की परंपरा से जोड़कर सफाई दी है। ये पहला मौका नहीं है जब सियासी मछली पकाई जा रही है। पहले भी खान-पान को राजनीतिक बहस का मुद्दा बनाया जा चुका है।

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ऐसे में समझते हैं कि अयोध्या में क्या हुआ? इससे पहले ऐसे विवाद कब-कब हुए? पहले कौन से नेता इस तरह के विवाद के चलते चर्चा में आ चुके हैं? भारत में मांसाहार को लेकर आंकड़े क्या कहते हैं?
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अयोध्या में मछली भोज पर विवाद

अयोध्या में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के स्वागत को लेकर आयोजित एक कार्यक्रम के बाद मछली भोज को लेकर विवाद खड़ा हो गया। कार्यक्रम अयोध्या के तारुन क्षेत्र स्थित एक लॉन में आयोजित किया गया था। इसी कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें मछली परोसे जाने की तैयारी दिखाई देने का दावा किया गया। कार्यक्रम में दो कुंतल से अधिक मछली होने की बात भी कही जा रही है। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

विवाद इसलिए बढ़ा क्योंकि यह आयोजन सावन और एकादशी के दिन होने की बात कही गई। इसके बाद कुछ संतों ने इसे धार्मिक भावनाओं और सनातन परंपराओं से जोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा और सार्वजनिक माफी की मांग की।

हनुमानगढ़ी के पुजारी रमेश दास ने कहा कि कांग्रेस नेता एक तरफ अयोध्या आकर भगवान श्रीराम और संतों का आशीर्वाद लेने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ उसी दौरान ऐसा आयोजन किया जाता है, जिससे सनातन समाज की भावनाएं आहत होती हैं। उन्होंने कांग्रेस से स्पष्टीकरण और अजय राय से माफी की मांग की।

इस बीच उत्तर प्रदेश के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर सावन के महीने में मछली की दावत होती है, तो यह हद से ज्यादा है। अगर मछली में प्याज और लहसुन डाला गया है तो वह नॉन-वेज है, लेकिन बिना प्याज-लहसुन के बनाई गई मछली को वेज माना जा सकता है। कांग्रेस से पूछा जाना चाहिए कि मछली को प्याज-लहसुन डालकर बनाया गया था या उसके बिना।

अजय राय ने क्या सफाई दी?

विवाद के बीच अजय राय ने कहा कि उन्होंने अयोध्या में हनुमानगढ़ी और राम मंदिर में दर्शन-पूजन किया था। इसके बाद वह निषाद समाज की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। उनका कहना है कि मछली पकड़ना, बेचना और खाना निषाद समाज की पारंपरिक आजीविका का हिस्सा रहा है। राय ने कहा कि निषाद समाज का जीवन नदियों से जुड़ा रहा है और कांग्रेस के शासन में इस समुदाय को सम्मान मिला। उनके मुताबिक, नदियों और तालाबों की जमीन पट्टे पर देने जैसी व्यवस्थाएं भी की जाती थीं।

अजय राय ने अपने ऊपर लगे आरोपों को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनकी मछली खाते हुए एक भी तस्वीर सामने आ जाए तो वह कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भाजपा ऐसी तस्वीर नहीं दिखा पाती है तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस्तीफा देना चाहिए।

योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस नेताओं पर कथित दोहरे आचरण का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लोग विरासत और धार्मिक आस्था के नाम पर दिखावा करते हैं। योगी आदित्यनाथ ने अजय राय का नाम लेते हुए कहा कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अयोध्या में हनुमानगढ़ी में दर्शन करने के बाद मछली की दावत में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि मंदिर में राम-राम बोलना और बजरंग बली के सामने दंडवत होने के बाद इस तरह का आचरण शर्मनाक है।

कब-कब हुआ विवाद? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

पहले कब इस तरह के मामले पर विवाद हुआ?

मछली और नॉनवेज को लेकर राजनीतिक विवाद पहले भी कई बार सामने आ चुके हैं। सितंबर 2023 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लालू प्रसाद यादव के साथ चंपारण मटन पकाने का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था। वीडियो में लालू यादव राहुल गांधी को मटन बनाने की विधि बताते नजर आए थे। खाना बनाने के साथ दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मुद्दों पर भी बातचीत हुई थी।

वीडियो सामने आने के बाद भाजपा ने राहुल गांधी पर निशाना साधा। भाजपा ने उनके जनेऊधारी ब्राह्मण और शिव भक्त होने का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि सावन के दौरान मटन से जुड़ा वीडियो क्यों साझा किया गया। भाजपा ने इसे हिंदू भावनाओं से जोड़कर हमला किया था।

तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी के वीडियो पर मचा था बवाल

2024 में बिहार चुनाव की तैयारियों के बीच तेजस्वी यादव और विकासशील इंसान पार्टी यानी वीआईपी के प्रमुख मुकेश सहनी का मछली खाते हुए वीडियो भी सामने आया था। तेजस्वी यादव ने 9 अप्रैल को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर यह वीडियो पोस्ट किया था।

वीडियो में दोनों नेता हेलिकॉप्टर के अंदर लंच करते नजर आए। मुकेश सहनी ने बताया कि वह चेचरा मछली और रोटी खा रहे थे। साथ में मिर्च और प्याज भी था। तेजस्वी यादव ने कहा था कि दोनों ने दिनभर चुनाव प्रचार किया था और लंच के लिए सिर्फ 10 से 15 मिनट मिले थे। उन्होंने बताया कि खाना मुकेश सहनी लेकर आए थे। इस वीडियो को लेकर भाजपा ने तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी पर निशाना साधा।

पीएम मोदी ने की थी टिप्पणी

उस समय राहुल गांधी और लालू प्रसाद यादव का मटन पकाने वाला वीडियो और तेजस्वी यादव का मछली खाते हुए वीडियो चर्चा में था। चुनावी रैली के दौरान पीएम मोदी ने बिना नाम लिए कहा था कि कुछ विपक्षी नेता सावन के दौरान मटन पकाने का वीडियो बनाकर और उसे सोशल मीडिया पर जारी करके देश के लोगों की भावनाओं को आहत करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे वीडियो के जरिए लोगों को चिढ़ाया जा रहा है और वोट बैंक की राजनीति की जा रही है।

पीएम मोदी ने यह भी कहा था कि देश में हर व्यक्ति को अपनी पसंद का खाना खाने की आजादी है और कानून किसी को शाकाहारी या मांसाहारी भोजन खाने से नहीं रोकता। उन्होंने कहा कि उनका सवाल खाने को लेकर नहीं, बल्कि धार्मिक अवसरों के दौरान ऐसे वीडियो सार्वजनिक करने की मंशा को लेकर है।

पश्चिम बंगाल चुनाव में भी मछली बनी मुद्दा

पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान भाजपा सांसद रवि किशन का मछली को लेकर दिया गया बयान भी चर्चा में रहा था। वह कहते सुने गए कि बिहार, उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों से बड़ी मात्रा में मछली लाकर बंगाल के कुएं, पोखर और तालाबों में डाली जाएगी। उन्होंने चार मई के बाद चार गुना ज्यादा मछली खाने की बात भी कही थी।

रवि किशन ने टीएमसी पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया था। इस बयान पर विपक्ष ने भाजपा पर निशाना साधा। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा था कि चुनाव जीतने के लिए भाजपाई किसी भी हद तक जा सकते हैं। वहीं टीएमसी ने इसे बंगाली संस्कृति और खान-पान की आदतों का उपहास उड़ाने वाला बयान बताया था।

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मछली उत्पादन के आंकड़े - फोटो : Amar Ujala

भारत में कितने लोग मांसाहारी हैं?

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण यानी NFHS-5 के 2019-21 के आंकड़ों के मुताबिक, 15 से 49 वर्ष की उम्र के 83.4 फीसदी पुरुष और 70.6 फीसदी महिलाएं मांसाहारी थीं। इसमें रोजाना, सप्ताह में या कभी-कभार मांसाहार करने वाले लोग शामिल हैं।

NFHS-4 यानी 2015-16 में 78.4 फीसदी पुरुष और 70 फीसदी महिलाएं मछली, चिकन या मांस खाने की बात कहती थीं। यानी पुरुषों में मांसाहार करने वालों की हिस्सेदारी करीब पांच प्रतिशत अंक बढ़ी, जबकि महिलाओं में बढ़ोतरी बहुत मामूली रही।

सप्ताह में कम से कम एक बार मांसाहार करने वालों की संख्या

NFHS-5 के मुताबिक, 57.3 फीसदी पुरुष और 45.1 फीसदी महिलाएं कम से कम सप्ताह में एक बार मछली, चिकन या मांस खाती थीं। NFHS-4 में यह आंकड़ा पुरुषों के लिए 48.9 फीसदी और महिलाओं के लिए 42.8 फीसदी था। यानी कम से कम सप्ताह में एक बार मांसाहार करने वाले पुरुषों की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।

क्या कहते हैं आंकड़े? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

कहां मांसाहारी सबसे ज्यादा?

15 से 49 वर्ष के पुरुषों में सप्ताह में कम से कम एक बार मछली, चिकन या मांस खाने वालों की हिस्सेदारी लक्षद्वीप में सबसे ज्यादा 98.4 फीसदी थी। इसके बाद अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 96.1 फीसदी, गोवा में 93.8 फीसदी, केरल में 90.1 फीसदी और पुडुचेरी में 89.9 फीसदी पुरुष सप्ताह में कम से कम एक बार मछली, चिकन या मांस खाते थे। वहीं, यह हिस्सेदारी राजस्थान में सबसे कम 14.1 फीसदी थी। इसके बाद हरियाणा में 14.9 फीसदी, पंजाब में 18.9 फीसदी, गुजरात में 20.6 फीसदी और हिमाचल प्रदेश में 22.6 फीसदी थी।

क्या कहते हैं आंकड़े? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

किन राज्यों में सबसे ज्यादा मांसाहारी?

  • सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, नागालैंड में करीब 99.8 फीसदी आबादी मांसाहारी भोजन करती है। यहां पोर्क, स्मोक्ड मीट और मछली से बने व्यंजन लोकप्रिय हैं।
  • केरल में करीब 99.1 फीसदी आबादी के मांसाहारी भोजन करने की बात दी गई है। यहां मालाबार फिश करी, बिरयानी और समुद्री भोजन लोकप्रिय हैं।
  • आंध्र प्रदेश में करीब 98.25 फीसदी आबादी मांसाहारी भोजन करती है। यहां चिकन करी और समुद्री भोजन आम हैं।
  • तमिलनाडु में करीब 97.65 फीसदी आबादी के मांसाहारी भोजन करने का आंकड़ा दिया गया है। यहां मटन मसाला, पंडी करी और मांस से बने दूसरे व्यंजन लोकप्रिय हैं।
Amar Ujala Ltd published this content on August 25, 2026, and is solely responsible for the information contained herein. Distributed via Public Technologies (PUBT), unedited and unaltered, on August 25, 2026 at 00:59 UTC. If you believe the information included in the content is inaccurate or outdated and requires editing or removal, please contact us at [email protected]