Ministry of Heavy Industries of the Republic of India

02/04/2026 | Press release | Distributed by Public on 02/04/2026 05:34

मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को मजबूत करना

पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय

मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को मजबूत करना


मौसम पूर्वानुमान में हासिल मुख्य सुधार

प्रविष्टि तिथि: 04 FEB 2026 3:27PM by PIB Delhi

पिछले 10 वर्षों के दौरान भारतीय क्षेत्र में सभी प्रकार की गंभीर मौसम घटनाओं के लिए 1-दिन से 5- दिन के पूर्वानुमान लीड समय पर आने से औसत कौशल में 30-40% की समग्र वृद्धि हासिल हुई है।

उदाहरण के लिए कर्नाटक राज्य के लिए भारी वर्षा घटनाओं पर विचार करें, जहां राज्य को प्रभावित करने वाली जो गंभीर मौसम घटनाएँ हैं, इनमें 2025 सहित नवीनतम 5-वर्षीय भारी वर्षा चेतावनी का कौशल संभावना का पता मौसम उप-विभागवार नीचे दिया गया है।

इसी प्रकार, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक के लिए, 2021 से 2025 के दौरान पहले दिन से अगले 5वें लीड पीरियड पर क्रमशः 58% से 70%, 51% से 65%, 45% से 67%, 39% से 63%, और 39% से 63% का तुलनात्मक सुधार दर्ज हुआ।

तटीय कर्नाटक में 2021 से 2025 के दौरान इसमें पहले दिन से पांचवे दिन के लीड पीरियड के दौरान उसमें 80% से 92%, 75% से 89%, 77% से 87%, 68% से 80% और 72% से 79% का तुलनात्मक सुधार दर्ज हुआ।

समग्र रूप से, कर्नाटक राज्य के लिए भारी वर्षा के दिन-1 से दिन-5 पूर्वानुमानों में 2020-2025 के दौरान 15-25% का सुधार देखा गया है।

जलवायु सेवाओं के संबंध में, 2021 से, भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) तापमान और वर्षा के मासिक तथा मौसमी पूर्वानुमान तैयार करने के लिए मल्टी-मॉडल एन्सेम्बल (एमएमई)-आधारित पूर्वानुमान रणनीति का उपयोग कर रहा है।

देश पर मानसून पूर्वानुमान की सटीकता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिसमें 2021-2024 की अवधि के दौरान अखिल भारतीय पूर्वानुमान में औसत निरपेक्ष त्रुटि लॉन्ग पीरियड एवरेज (एलपीए) का 2.28% रहा, जो पूर्ववर्ती चार वर्षों (2017-2020) के दौरान 7.5% की तुलना में कम है।

आईएमडी प्रारंभिक चेतावनी प्रसार के लिए सभी नवीनतम तकनीकों और प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर रहा है। वर्तमान में, मोबाइल-आधारित अलर्ट सिस्टम SACHET के माध्यम से CAP-आधारित अलर्ट जारी करने के लिए कार्यरत है।

ये सभी पूर्वानुमान और चेतावनियाँ राज्य आपातकालीन संचालन केंद्रों/एसडीएमए के साथ साझा की जाती हैं ताकि वे CAP के माध्यम से आम जनता तक आगे प्रसारित करें। इसी प्रकार, यह सोशल मीडिया, वेबसाइट्स, व्हाट्सएप समूहों, मोबाइल ऐप्स, एपीआई आदि के माध्यम से साझा किया जाता है।

भारत सरकार ने हाल ही में ग्राम पंचायत स्तरीय मौसम पूर्वानुमान (जीपीएलडब्ल्यूएफ) पहल शुरू की है। आईएमडी ने पंचायती राज मंत्रालय (एमओपीआर) के साथ सहयोग में 24 अक्टूबर 2024 को भारत की लगभग सभी ग्राम पंचायतों के लिए जीपीएलडब्ल्यूएफ शुरू किया। ये पूर्वानुमान ई-ग्रामस्वराज (https://egramswaraj.gov.in/), मेरी पंचायत ऐप, एमओपीआर का ई-मानचित्र तथा आईएमडी का मौसमग्राम पर उपलब्ध हैं।

किसानों, मछुआरों और संवेदनशील समुदायों को लाभ

सरकार की पहल और विशिष्ट हस्तक्षेप के कारण, कर्नाटक में कुल 3,63,806 किसान व्हाट्सएप समूहों से सीधे जुड़े हुए हैं और वे पूर्वानुमान एवं चेतावनियाँ सीधे प्राप्त कर रहे हैं। मछुआरों और संवेदनशील समुदायों, जिसमें तटीय मछली पकड़ने वाले समुदाय शामिल हैं, के लिए चेतावनियाँ भी दक्षिण कन्नड़ सहित सभी 3 तटीय जिलों के लिए जिला कलेक्टर समूह और एसडीएम समूह के माध्यम से व्हाट्सएप पर प्रसारित की जा रही हैं।

डॉप्लर मौसम रडार कवरेज का विस्तार, शहरी जलवायु प्लेटफॉर्म और हीट एक्शन प्लान

वर्तमान में, देश भर में 47 डब्ल्यूडब्ल्यूआर कार्यरत हैं, जिसमें मंगलौर, शक्तिनगर में 26-11-2025 से कार्यरत सी-बैंड डॉप्लर मौसम रडार शामिल है, जिसमें देश के कुल क्षेत्र का 87% रडार कवरेज के अंतर्गत आता है।

हीट एक्शन प्लान भी कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र (केएसएनडीएमसी) के साथ सहयोग कर अपनाया गया है। इसके अतिरिक्त, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) ने मिशन मौसम शुरू किया है, जिसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम घटनाओं के प्रभावों को कम करने के लक्ष्य से भारत को "मौसम-तैयार और जलवायु-स्मार्ट" राष्ट्र बनाना है ।

आगामी रोडमैप

बेंगलुरु मौसम केंद्र उपयोगकर्ता समुदायों तथा केएसएनडीएमसी से निरंतर फीडबैक प्राप्त कर रहा है ताकि मौसम और जलवायु सलाह को प्रदेश के अंतिम छोर तक डिलीवरी को मजबूत किया जा सके। इस संबंध में, कर्नाटक भर के किसानों को मौसम और जलवायु सलाह की समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए कृषि-मौसम फील्ड इकाइयों (एएमएफयू) के अतिरिक्त जीपीएस कृषि प्रबंधन संस्थान और एमसी बेंगलुरु के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया गया है।

यह जानकारी 4 फरवरी 2026 को लोकसभा में पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा प्रस्तुत की गई।

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पीके /केसी / एमएम


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