01/21/2026 | Press release | Distributed by Public on 01/21/2026 06:29
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने 20 जनवरी 2026 को दावोस में विश्व आर्थिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) में "एआई पावर प्ले, नो रेफरीज" शीर्षक वाली एक पैनल चर्चा के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रति भारत के दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें व्यापक स्तर पर एआई के प्रसार, आर्थिक व्यवहार्यता और तकनीकी-कानूनी शासन पर जोर दिया गया।
श्री वैष्णव ने वैश्विक एआई गठबंधनों और भू-राजनीति से संबंधित एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि भारत स्पष्ट रूप से एआई विकसित देशों के पहले समूह में आता है। उन्होंने बताया कि एआई ढांचे में पांच स्तर होते हैं - एप्लिकेशन, मॉडल, चिप, अवसंरचना और ऊर्जा; और भारत इन सभी पांचों क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। उन्होंने कहा, " एप्लिकेशन स्तर पर, भारत संभवतः विश्व को सेवाएं प्रदान करने वाला सबसे बड़ा देश होगा।" उन्होंने कहा कि एआई में निवेश पर लाभ (आरओआई) उद्यम स्तर पर तैनाती और उत्पादकता में वृद्धि से प्राप्त होता है, न कि केवल बहुत बड़े मॉडल बनाने से। उन्होंने कहा कि लगभग 95 प्रतिशत एआई उपयोग मामलों को 20-50 बिलियन पैरामीटर रेंज के मॉडलों से हल किया जा सकता है, जिनमें से कई मॉडल भारत के पास पहले से ही विद्यमान हैं और विभिन्न क्षेत्रों में तैनात किए जा रहे हैं।
There are five layers in the #AI architecture: the application layer, model layer, chip layer, infrastructure layer, and energy layer. India is working on all five layers and making good progress in each of them. On the application layer, India will probably be the supplier of… pic.twitter.com/BXg5rhnwBM
- PIB India (@PIB_India) January 21, 2026श्री वैष्णव ने भू-राजनीति में एआई की भूमिका की चर्चा करते हुए भू-राजनीतिक शक्ति को बहुत बड़े एआई मॉडल के स्वामित्व के साथ बराबर मानने के प्रति सावधान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मॉडल बंद किए जा सकते हैं और यहां तक कि इनके डेवलपर के लिए आर्थिक संकट भी पैदा कर सकते हैं। उन्होंने कहा, "जिसे मैं पांचवीं औद्योगिक क्रांति कहता हूं, उसकी अर्थव्यवस्था निवेश पर लाभ (आरओआई) - अधिकतम संभव रिटर्न पाने के लिए निम्नतम लागत समाधान लागू करने - से आएगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रभावी एआई तैनाती तेजी से सीपीयू, छोटे मॉडल और उभरते कस्टम सिलिकॉन पर निर्भर करने लगी है, जिससे किसी एक देश पर निर्भरता कम होती है और केवल परिमाण के आधार पर एआई के प्रभुत्व की धारणा को चुनौती मिलती है।
श्री वैष्णव ने भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की सफलता का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार जीवन और अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में एआई के प्रसार को प्रणालीगत तरीके से आगे बढ़ा रही है। जीपीयू की उपलब्धता को एक प्रमुख बाधा बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल अपनाया है, जिसके तहत लगभग 38,000 जीपीयू को एक साझा राष्ट्रीय कंप्यूटिंग सुविधा के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। यह सुविधा सरकार द्वारा समर्थित और सब्सिडी वाली है, जो छात्रों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और नवोन्मेषकों को वैश्विक लागत के लगभग एक तिहाई पर किफायती पहुंच प्रदान करती है। उन्होंने भारत की एआई रणनीति के चार स्तंभों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की:
India's systematic approach to AI adoption: To overcome GPU scarcity, the government has established a Public-Private Partnership with 38,000 GPUs as a common compute facility, accessible to students, researchers, and startups at roughly one-third the global cost, unlike many… pic.twitter.com/mcIY4dpEZU
- PIB India (@PIB_India) January 21, 2026श्री वैष्णव ने नियमन और शासन पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नियमन के लिए तकनीकी-कानूनी दृष्टिकोण के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नियमन केवल कानूनों पर निर्भर नहीं हो सकता, बल्कि इसमें ऐसे तकनीकी उपकरणों का भी सहयोग होना चाहिए जो पूर्वाग्रह और डीपफेक जैसी समस्याओं को कम कर सकें। उन्होंने कहा, "उदाहरण के लिए, डीपफेक का पता लगाने वाली प्रणालियों की सटीकता इतनी होनी चाहिए कि न्यायालयों में उनकी जांच हो सके।" उन्होंने कहा कि भारत डीपफेक का पता लगाने, पूर्वाग्रह को कम करने और उद्यमों में तैनाती से पहले मॉडलों के उचित अनलर्निंग सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकियां विकसित कर रहा है।
पैनल चर्चा का संचालन इयान ब्रेमर (अध्यक्ष और संस्थापक, यूरेशिया ग्रुप) ने किया और अन्य पैनलिस्टों में ब्रैड स्मिथ (उपाध्यक्ष और अध्यक्ष, माइक्रोसॉफ्ट), क्रिस्टालिना जॉर्जीवा (प्रबंध निदेशक, आईएमएफ) और खालिद अल-फलीह (निवेश मंत्री, सऊदी अरब) शामिल थे।
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