त्योहारों का सीजन शुरू होते ही महंगाई ने एक बार फिर आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है। शक्कर, आटा, मैदा, सूजी, चावल, दाल, साबूदाना, मसाले और सूखे मेवों के दाम बढ़े हैं। इनमें सबसे ज्यादा तेजी शकर के भाव में आई है। पुराने भोपाल के बाजार में गुरुवार को शकर का थोक भाव 63 रुपये किलो खुला, जबकि खुदरा बाजार में यह करीब 65 रुपये किलो में बिक रही है।
किराना व्यापारी संघ के अध्यक्ष विवेक साहू के मुताबिक करीब 18 दिन में शकर 18 रुपये किलो तक महंगी हुई है। उनका कहना है कि अगर इसी तरह तेजी जारी रही और सरकार ने समय रहते कदम नहीं उठाया तो शकर का भाव 70 रुपये किलो तक पहुंच सकता है।
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रेट बढ़ने की ये हैं प्रमुख वजहें
साहू के मुताबिक शक्कर के भाव बढ़ने की प्रमुख वजहों में कम बारिश, गन्ने की खेती पर असर, त्योहारों के लिए पर्याप्त स्टॉक बाजार में नहीं आना और इथेनॉल का इस्तेमाल शामिल है। उनका कहना है कि इस बार गन्ने की खेती सामान्य समय जैसी नहीं हुई है। कम बारिश का असर गन्ने के उत्पादन पर पड़ा है। उन्होंने बताया कि त्योहारों के सीजन में बाजार में जितना स्टॉक जारी होना चाहिए था, उतनी मात्रा में स्टॉक नहीं आया। आने वाले दिनों में अधिक मात्रा में स्टॉक जारी होने की उम्मीद है। इसके साथ ही इथेनॉल नीति को लेकर भी सरकार को पुनर्विचार करने की जरूरत बताई गई है। व्यापारी का कहना है कि गन्ने का इस्तेमाल इथेनॉल के लिए होने से शक्कर की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है।
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आटा, मैदा, सूजी और चावल भी महंगे
महंगाई का असर सिर्फ शकर तक सीमित नहीं है। आटा करीब 28 से बढ़कर 30 से 34 रुपये किलो, मैदा 30 से बढ़कर 34 रुपये किलो और सूजी 30 से बढ़कर 36 रुपये किलो तक पहुंच गई है। चावल के दाम में भी 5 से 7 रुपये किलो तक की तेजी बताई जा रही है। दालों के भाव भी बढ़े हैं। साबूदाना, मसाले और सूखे मेवों में भी तेजी है। व्यापारी के मुताबिक बाजार में तेजी कई चीजों में है, लेकिन सबसे ज्यादा उछाल फिलहाल शक्कर में है।
त्योहारों में बढ़ेगी मांग, और तेजी की आशंका
रक्षाबंधन का त्योहार आने वाला है। इसके बाद जन्माष्टमी, करवाचौथ और दीपावली जैसे त्योहार हैं। इन मौकों पर मिठाइयों और पकवानों की मांग बढ़ती है और शकर की खपत भी बढ़ जाती है। इसके बाद शादी का सीजन शुरू होगा। ऐसे में अगर शकर के दाम नहीं गिरे तो आने वाले समय में परिवारों का खर्च और बढ़ सकता है।
10 किलो खरीदने वाला अब पांच किलो में चला रहा काम
शकर के दाम बढ़ने का असर ग्राहकों की खरीदारी पर भी दिखाई दे रहा है। व्यापारियों के मुताबिक जो उपभोक्ता पहले 10 किलो शकर खरीदता था, वह अब 5 किलो खरीद रहा है। वहीं 5 किलो खरीदने वाला ग्राहक अब करीब 2 किलो में काम चला रहा है। ग्राहक इस इंतजार में है कि किसी तरह भाव थमें तो वह दोबारा ज्यादा मात्रा में शकर खरीद सकें।
हालांकि शकर रोजमर्रा की जरूरत है, इसलिए ग्राहक इसकी खरीदारी बंद नहीं कर सकता। व्यापारियों का कहना है कि सुबह की चाय से लेकर त्योहारों में बनने वाली मिठाइयों तक शकर की जरूरत बनी रहती है। ऐसे में कीमत बढ़ने के बावजूद इसकी मांग खत्म नहीं होगी, लेकिन लोग खरीदारी की मात्रा कम कर रहे हैं।
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70 रुपये किलो तक पहुंच सकता है भाव
शकर के दाम और बढ़ने की संभावना के सवाल पर साहू ने कहा कि अभी तेजी के पूरे आसार हैं। अगर सरकार ने कार्रवाई नहीं की तो शकर 70 रुपये किलो तक पहुंच सकती है। त्योहारों में मांग बढ़ने के कारण बाजार पर और दबाव बन सकता है।
महंगाई बढ़ेगी, लेकिन त्योहार नहीं रुकेगा
शकर महंगी होने से क्या इस बार त्योहार फीका पड़ेगा, इस पर व्यापारियों का कहना है कि ऐसा नहीं होगा। उनका कहना है कि शकर 100 रुपये किलो भी क्यों न हो जाए, लोग त्योहार मनाना नहीं छोड़ेंगे। जरूरत पड़ने पर मिठाइयों की मात्रा कम कर नमकीन या दूसरी चीजों पर खर्च किया जा सकता है, लेकिन त्योहार जरूर मनाया जाएगा।
सरकार से शकर की आपूर्ति बढ़ाने की मांग
व्यापारी ने सरकार से बाजार में शकर की आपूर्ति बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि पहले थोक विक्रेता को मिल से शक्कर उठाने के लिए 15 दिन का समय मिलता था। अब इसे घटाकर 7 दिन किया गया है। शकर जितनी जल्दी मिल से उठेगी, उतनी जल्दी बाजार में पहुंचेगी। बाजार में माल की उपलब्धता बढ़ने पर थोक विक्रेता भी उसे जल्द बेचेंगे। व्यापारियों के मुताबिक जब बाजार में मांग और आपूर्ति का संतुलन बनेगा तो शक्कर के भाव नीचे आने की उम्मीद है। फिलहाल त्योहारों से पहले लगातार बढ़ते दामों ने आम परिवारों के बजट की चिंता बढ़ा दी है।